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जय राधे-जय ललिते से गूंज उठी गीता वाटिका
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श्री राधाअष्टमी महोत्सव पर गीता वाटिका प्रांगण स्थित भाई जी के पावन कक्ष में पद रत्नाकर का अखंड प
- फोटो : GORAKHPUR CITY
गोरखपुर। गीता वाटिका में पांच दिवसीय राधाष्टमी महोत्सव की शुरुआत सोमवार को भक्ति भाव से हुई। प्रथम दिन राधा जी की प्रिय सखी ललिता जी का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। इस दौरान जय राधे-जय ललिते से गीता वाटिका परिसर गूंज उठा।
पूजन-अर्चन, आरती, गिरिराज परिक्रमा व भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय बना रहा। किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया। वाटिका में रहने वाले श्रद्धालु ही कार्यक्रम में शामिल हुए। कोविड नियमों का पालन किया गया तथा बाहरी लोगों के लिए ऑनलाइन सजीव प्रसारण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भाईजी स्मृति भवन में सुबह छह बजे मधुरनाम संकीर्तन से हुई। 6.19 बजे प्राकट्य की आरती की गई। इस दौरान राकेश तिवारी ने ‘हमारे भाग्य हैं जागे जो ललिता घर में आई हैं’ सहित अनेक पद प्रस्तुत किया। षोडशोपचार पूजन हुआ।
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इस दौरान जय-जय राधे जय ललिते, संकीर्तन चलता रहा। इसके बाद भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार द्वारा लिखित ग्रंथ ‘पद रत्नाकर’ का अखंड पाठ शुरू हुआ। पदों के गायन से माहौल भक्तिमय हो गया था। शाम में श्रद्धालुओं ने भाईजी के ऑडियो प्रवचनों का लाभ लिया।
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पूजन-अर्चन, आरती, गिरिराज परिक्रमा व भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय बना रहा। किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया। वाटिका में रहने वाले श्रद्धालु ही कार्यक्रम में शामिल हुए। कोविड नियमों का पालन किया गया तथा बाहरी लोगों के लिए ऑनलाइन सजीव प्रसारण किया गया।
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कार्यक्रम की शुरुआत भाईजी स्मृति भवन में सुबह छह बजे मधुरनाम संकीर्तन से हुई। 6.19 बजे प्राकट्य की आरती की गई। इस दौरान राकेश तिवारी ने ‘हमारे भाग्य हैं जागे जो ललिता घर में आई हैं’ सहित अनेक पद प्रस्तुत किया। षोडशोपचार पूजन हुआ।
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इस दौरान जय-जय राधे जय ललिते, संकीर्तन चलता रहा। इसके बाद भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार द्वारा लिखित ग्रंथ ‘पद रत्नाकर’ का अखंड पाठ शुरू हुआ। पदों के गायन से माहौल भक्तिमय हो गया था। शाम में श्रद्धालुओं ने भाईजी के ऑडियो प्रवचनों का लाभ लिया।