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Gita Press: गीता प्रेस की पसंद बढ़ी... नहीं दे पा रहे 75 फीसदी किताबें

Sat, 23 Dec 2023 02:22 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 23 Dec 2023 02:22 PM IST
सार

गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी कहते हैं, एकल परिवारों की संख्या बढ़ने से पुस्तकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई हिंदू घर होगा जहां गीता प्रेस की पुस्तक न हो। श्रीमद्भागतव गीता, रामचरित मानस, हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती ये पुस्तक हर घर में अवश्य मिलेंगी।

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Gita Press increased reader they not able to give 75 percent of books
गोरखपुर की पहचान गीता प्रेस।

विस्तार

 भले ही नई पीढ़ी की रुचि पुस्तकों में कम हुई है, लेकिन गीता प्रेस की धार्मिक पुस्तकों के प्रति लगाव बढ़ा है। इसकी वजह मौजूद समय में लोग अपने बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करना चाहता है। गीता प्रेस से छपी पुस्तकों को माह। ज्यादा खरीदने लगे हैं, जिसके चलते गीता प्रेस मांग के अनुरूप 75 फीसदी पुस्तकें ही उपलब्ध करा पा रहा है।

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गीता प्रेस से 100 वर्षों में 95 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है। अब गीता प्रेस ने अगले 23 वर्षों यानी वर्ष 2047 तक 200 करोड़ धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रबंधन ने प्रशासन से गीडा में 20 एकड़ भूमि मांगी है। - वहीं, आधुनिक मशीनों को मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी कहते हैं, एकल परिवारों की संख्या बढ़ने से पुस्तकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई हिंदू घर होगा जहां गीता प्रेस की पुस्तक न हो। श्रीमद्भागतव गीता, रामचरित मानस, हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती ये पुस्तक हर घर में अवश्य मिलेंगी।
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कहा, मोबाइल और कंप्यूटर ने भले नई पीढ़ी में पुस्तकों के प्रति रुचि को कम कर दिया है, लेकिन धार्मिक पुस्तकों का महत्व पहले की तरह बरकरार है। वहीं, ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल का कहना है कि गीता प्रेस की पुस्तकें नई पीढ़ी में संस्कार का निर्माण करने के साथ ही उनमें सनातन के प्रति रूचि बढ़ाती हैं। गीता प्रेस मांग की तुलना में 75 फीसदी पुस्तकें ही अपने पाठकों को उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। यहां से सिर्फ श्रीमद्भागवत गीता की ही 24 हजार प्रतियां प्रतिदिन प्रकाशित होती है।

दूसरे देशों में भीं हो रहा है गीताप्रेस का विस्तार: गीताप्रेस की शाखा नेपाल के काठमांठो में है। यहां के सभी सात प्रदेशों में टीम गठित कर पुस्तक केंद्र खोलने की तैयारी चल रही है। जय किशन सारडा को अन्य देशों में विस्तार के लिए अंतरराष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है।

 

15 भाषाओं में प्रकाशित होती हैं पुस्तकें
गीता प्रेस से वर्तमान में 15 भाषाओं में पुस्तकों का प्रकाशन हो रहा है। इनमें असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलगू व ऊर्दू शामिल हैं।

अब एक घंटे में छपते हैं 15 हजार पेज
गीता प्रेस के स्थापना के समय गीता प्रेस में एक दिन में मुश्किल से 100 पेज ही छप पाते थे। लेकिन, आधुनिक मशीनों के कारण यहां हर घंटे में 15 हजार अधिक रंगीन पेज की छपाई की जाती है।
 

करोड़ों में प्रकाशित हुई हैं ये पुस्तकें
  • श्रीमद्भागवत गीता- 17.5 करोड़
  • रामचरित मानस एवं तुलसी साहित्य- 12 करोड़
  • पुराण, उपनिषद् आदि ग्रंथ- तीन करोड़
  • महिलाओं एवं बालकोपयोगी पुस्तकें- 12 करोड़
  • भक्त चरित्र एवं भजनमाला- 18 करोड़
  • कल्याण- 18 करोड़
  • अन्य प्रकाशन- 15 करोड़
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