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Gorakhpur: गीडा में फ्लैटेड फैक्ट्री के आवंटन के लिए अगले महीने बनेगी गाइडलाइन,सितंबर तक इंतजार
Thu, 18 Jan 2024 03:16 PM IST
रोहित शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: रोहित शर्मा
Updated Thu, 18 Jan 2024 03:16 PM IST
सार
गोरखपुर के गीडा में फ्लैटेड फैक्टरी का निर्माण सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। यहां पर 80 छोटे उद्यमियों को अपनी गारमेंट फैक्टरी शुरू करने के पूरी तरह से तैयार भवन उपलब्ध कराया जाएगा। नोएडा और अन्य बड़े शहरों की तर्ज पर गोरखपुर में भी फ्लैटेड फैक्टरियां लगनी हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर के गीडा में निर्माणाधीन फ्लैटेड फैक्टरी के आवंटन के लिए बोर्ड की अगले महीने होनेवाली बैठक में गाइडलाइन तय की जाएगी। यह बैठक 15 फरवरी के बाद होने की संभावना है। फ्लैटेड फैक्टरी का निर्माण सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। यहां पर 80 छोटे उद्यमियों को अपनी गारमेंट फैक्टरी शुरू करने के पूरी तरह से तैयार भवन उपलब्ध कराया जाएगा।
नोएडा और अन्य बड़े शहरों की तर्ज पर गोरखपुर में भी फ्लैटेड फैक्टरियां लगनी हैं। इसके लिए गीडा में निर्माण कार्य चल रहा है। यह निर्माण मई में ही पूरा होना था, लेकिन कार्य शुरू होने में देरी के चलते अब इसके सितंबर तक पूरा होने की संभावना है। लेकिन, इसके आवंटन की प्रक्रिया पहले ही तय कर ली जाएगी। पिछले दिनों उद्योग बंधु की बैठक में व्यापारियों ने इस मुद्दे को उठाते हुए आवंटन की प्रक्रिया जनवरी में ही पूरा कराने की मांग की थी।
इसके बाद गीडा प्रबंधन ने निर्माण कार्यों की समीक्षा की, जिसमें यह बात सामने आई कि कार्य पूर्ण होने में अभी करीब सात से आठ माह का वक्त लगेगा। फिर भी उद्यमियों की मांग को देखते हुए इस पर फरवरी में गाइड लाइन बनाने की चर्चा हुई है।
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नोएडा और अन्य बड़े शहरों की तर्ज पर गोरखपुर में भी फ्लैटेड फैक्टरियां लगनी हैं। इसके लिए गीडा में निर्माण कार्य चल रहा है। यह निर्माण मई में ही पूरा होना था, लेकिन कार्य शुरू होने में देरी के चलते अब इसके सितंबर तक पूरा होने की संभावना है। लेकिन, इसके आवंटन की प्रक्रिया पहले ही तय कर ली जाएगी। पिछले दिनों उद्योग बंधु की बैठक में व्यापारियों ने इस मुद्दे को उठाते हुए आवंटन की प्रक्रिया जनवरी में ही पूरा कराने की मांग की थी।
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इसके बाद गीडा प्रबंधन ने निर्माण कार्यों की समीक्षा की, जिसमें यह बात सामने आई कि कार्य पूर्ण होने में अभी करीब सात से आठ माह का वक्त लगेगा। फिर भी उद्यमियों की मांग को देखते हुए इस पर फरवरी में गाइड लाइन बनाने की चर्चा हुई है।
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उदघाटन के साथ ही शुरू होगा उत्पादन
फ्लैटेड फैक्टरी का विचार ग्रेटर नोएडा, सूरत, लुधियाना आदि शहरों से लिया गया है। दरअसल गारमेंट्स उद्योग में छोटे उद्यमियों की संख्या अधिक है। कम पूंजी के इन उद्यमियों को औद्योगिक इलाके में जगह उपलब्ध कराने के लिए बहु मंजिली इमारतें बनाई जा रही हैं। आवासीय फ्लैट जैसी जगह होने के कारण ही इसे फ्लैटेड फैक्टरी कहा जाता है।
बिल्डिंग में रंगाई-पुताई से लेकर बिजली की वायरिंग तक का कार्य कराने के बाद ही हैंडओवर किया जाता है। इसलिए उद्घाटन के दिन ही उद्यमी अपनी सिलाई मशीन लगाकर कपड़ा सिलाई का काम शुरू कर सकते हैं।
सीईओ गीडा, अनुज मलिक ने बताया कि फ्लैटेड फैक्टरी का निर्माण सितंबर-अक्तूबर तक पूरा होने की संभावना है। परंतु इसके आवंटन की प्रक्रिया के लिए गाइडलाइन पहले ही तय कर ली जाएगी। बोर्ड की अगली बैठक में इस पर प्रस्ताव रखा जाएगा। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है।
फ्लैटेड फैक्टरी का विचार ग्रेटर नोएडा, सूरत, लुधियाना आदि शहरों से लिया गया है। दरअसल गारमेंट्स उद्योग में छोटे उद्यमियों की संख्या अधिक है। कम पूंजी के इन उद्यमियों को औद्योगिक इलाके में जगह उपलब्ध कराने के लिए बहु मंजिली इमारतें बनाई जा रही हैं। आवासीय फ्लैट जैसी जगह होने के कारण ही इसे फ्लैटेड फैक्टरी कहा जाता है।
बिल्डिंग में रंगाई-पुताई से लेकर बिजली की वायरिंग तक का कार्य कराने के बाद ही हैंडओवर किया जाता है। इसलिए उद्घाटन के दिन ही उद्यमी अपनी सिलाई मशीन लगाकर कपड़ा सिलाई का काम शुरू कर सकते हैं।
सीईओ गीडा, अनुज मलिक ने बताया कि फ्लैटेड फैक्टरी का निर्माण सितंबर-अक्तूबर तक पूरा होने की संभावना है। परंतु इसके आवंटन की प्रक्रिया के लिए गाइडलाइन पहले ही तय कर ली जाएगी। बोर्ड की अगली बैठक में इस पर प्रस्ताव रखा जाएगा। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है।