{"_id":"5e0f6c0b8ebc3e87b67993e9","slug":"geeta-vatika-bhagwat-katha-end-gorakhpur-news-gkp335740042","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गीता वाटिका में राधा बाबा जन्मोत्सव पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गीता वाटिका में राधा बाबा जन्मोत्सव पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन
Fri, 03 Jan 2020 10:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 10:28 PM IST
विज्ञापन
श्रीमद्भागवत कथा में शामिल लोग।
- फोटो : अमर उजाला
राधा बाबा के 108वें जन्मोत्सव पर गीता वाटिका में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन शुक्रवार को हुआ। वृंदावन से आए कथाव्यास मदनमोहन दास महाराज ने कहा कि हृदय में भगवान का निवास होता है, इसलिए हृदय को कामनाओं और वासनाओं से सुरक्षित रखना चाहिए।
ठाकुर जी को अहंकार पसंद नहीं है। वे किसी का अहंकार नहीं रहने देते। देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गिरिराज पूजन कराया ।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान को संतों की भक्ति करने वाले अधिक प्रिय हैं। एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रस शब्द से ही रास बना है। रास में सभी रसों (शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य एवं मधुर) का समावेश है। रस रूप पर ब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण की काम विजय लीला को ही रास कहते हैं। रास की कथा का श्रवण करने से हृदय रोग समाप्त हो जाते हैं।
विज्ञापन
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को स्वाभाविकता ही प्रिय है। श्रीकृष्ण की बंसी की ध्वनि सुनकर गोपियां जिस स्थिति में थीं उसी स्थिति में श्रीकृष्ण मिलन के लिए निकल पड़ीं। किसी गोपी ने एक आंख में काजल लगाया था दूसरे में नहीं। कोई गोपी गोबर मिट्टी से सने हाथों ही निकल पड़ीं।
विज्ञापन
ठाकुर जी को अहंकार पसंद नहीं है। वे किसी का अहंकार नहीं रहने देते। देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गिरिराज पूजन कराया ।
विज्ञापन
कथा व्यास ने कहा कि भगवान को संतों की भक्ति करने वाले अधिक प्रिय हैं। एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रस शब्द से ही रास बना है। रास में सभी रसों (शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य एवं मधुर) का समावेश है। रस रूप पर ब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण की काम विजय लीला को ही रास कहते हैं। रास की कथा का श्रवण करने से हृदय रोग समाप्त हो जाते हैं।
विज्ञापन
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को स्वाभाविकता ही प्रिय है। श्रीकृष्ण की बंसी की ध्वनि सुनकर गोपियां जिस स्थिति में थीं उसी स्थिति में श्रीकृष्ण मिलन के लिए निकल पड़ीं। किसी गोपी ने एक आंख में काजल लगाया था दूसरे में नहीं। कोई गोपी गोबर मिट्टी से सने हाथों ही निकल पड़ीं।
बंसी लीला का मंचन देख भाव विभोर हुए श्रद्धालु
श्रीराधा बाबा के 108वें जन्मोत्सव पर आयोजित रासलीला में वृंदावन से आए स्वामी श्रीरामजी शर्मा की रासमंडली ने प्रिया प्रियतम के साथ गोपी जनों के रास-नृत्य के बाद कन्हैया की बंसी चोरी लीला का प्रस्तुतीकरण किया गया। जिसे देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के सचिव उमेश कुमार सिंघानिया ने बताया कि श्रीराधाबाबा का 108वां जन्मोत्सव चार जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन दैनिक कार्यक्रमों के साथ शहनाई वादन, प्रात: 9:30 बजे शोभायात्रा, 10:30 बजे भावार्चन, 11 बजे जन्म की आरती, एक बजे श्री गिरिराज-पूजन, दोपहर 3:30 से शाम 6:30 बजे तक रासलीला, शाम सात बजे दीप प्रज्ज्वलन एवं रात्रि 10 बजे से रात्रि जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के सचिव उमेश कुमार सिंघानिया ने बताया कि श्रीराधाबाबा का 108वां जन्मोत्सव चार जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन दैनिक कार्यक्रमों के साथ शहनाई वादन, प्रात: 9:30 बजे शोभायात्रा, 10:30 बजे भावार्चन, 11 बजे जन्म की आरती, एक बजे श्री गिरिराज-पूजन, दोपहर 3:30 से शाम 6:30 बजे तक रासलीला, शाम सात बजे दीप प्रज्ज्वलन एवं रात्रि 10 बजे से रात्रि जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।