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सुमेर सागर ताल: सुंदरीकरण से पहले लंबित वादों का अध्ययन करेगा जीडीए, ताल-राप्ती रीवर फ्रंट को करेगा विकसित

Thu, 02 Mar 2023 11:25 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 02 Mar 2023 11:25 AM IST
सार

जीडीए सुमेर सागर ताल का सुदंरीकरण कराने जा रहा है। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। गत बुधवार को हुई जीडीए बोर्ड बैठक के दौरान ताल और राप्ती किनारे के क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की चर्चा के दौरान यह तय हुआ कि लंबित मामलों के अध्ययन के बाद ही सुमेर सागर ताल का सुंदरीकरण शुरू कराया जाए।

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GDA will study pending promises before beautification
विकसित होने के बाद ऐसा दिखेगा सुमेर सागर ताल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

किसी भी तरह की कानूनी अड़चन में फंसने से बचने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब सुमेर सागर ताल के सुंदरीकरण का कार्य शुरू कराने के पहले इसकी भूमि को लेकर न्यायालयों में चल रहे लंबित वादों का अध्ययन करेगा।

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ताल की जमीन पर पिछले करीब तीन-चार दशकों से कब्जा चला आ रहा था जिसे प्रशासन ने करीब डेढ़ साल पहले खाली कराया था। इस कार्रवाई के लिए खिलाफ कई लोगों ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस दाखिल कर रखा है। कई मामले लंबित हैं।
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जीडीए सुमेर सागर ताल का सुदंरीकरण कराने जा रहा है। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। गत बुधवार को हुई जीडीए बोर्ड बैठक के दौरान ताल और राप्ती किनारे के क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की चर्चा के दौरान यह तय हुआ कि लंबित मामलों के अध्ययन के बाद ही सुमेर सागर ताल का सुंदरीकरण शुरू कराया जाए।
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इसी तरह चिलुआताल, महेसरा और राप्ती किनारे के क्षेत्र को भी पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग से अनुमोदन लेने का निर्णय हुआ है। चिलुआताल में पहले से ही विकास कार्य चल रहे हैं। जिस संस्था द्वारा काम किया जा रहा है, जीडीए उससे समन्वय बनाकर काम करेगा। इस क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से भू उपयोग भी तय किया गया है।

अब यीपीसीडा क्षेत्र के आस-पास मानचित्र स्वीकृत कराने में नहीं होगी दिक्कत
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की जमीन के आस-पास निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराना अब आसान होगा। शहर क्षेत्र में यूपीसीडा की काफी जमीन है। जमीन चिह्नित नहीं होने की वजह से इसके आसपास के क्षेत्रों में भी निर्माण के लिए मानचित्र पास नहीं हो पाता था। वह क्षेत्र भी यूपीसीडा में दर्शाता है। महायोजना 2031 में यूपीसीडा के क्षेत्र को चिह्नित कर दिया गया है। इस क्षेत्र से अब जो मानचित्र के आवेदन आएंगे, उसकी आसानी से जांच की जा सकेगी कि संबंधित क्षेत्र यूपीसीडा में है या उसके बाहर। जो क्षेत्र बाहर होगा, प्राधिकरण तय समय सीमा के भीतर उसका मानचित्र स्वीकृत कर देगा।
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