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बस्ती: पशुधन भर्ती घोटाले में पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी से गरमाई सियासत, इस पूर्व मंत्री पर टिकी निगाहें
Thu, 15 Oct 2026 04:17 PM IST
अनुराग रंजन
अमर उजाला डिजिटल, गोरखपुर
अमर उजाला डिजिटल, गोरखपुर
Published by: अनुराग रंजन
Updated Thu, 15 Oct 2026 04:17 PM IST
सार
वर्ष 2017 में कांग्रेस और 2022 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद राजकिशोर सिंह को जीत नहीं मिली। वर्ष 2024 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने हरैया क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है।
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बस्ती की सियासत में बढ़ी हलचल
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
उत्तर प्रदेश में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद बस्ती की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तत्कालीन पशुधन मंत्री और हरैया के पूर्व विधायक राजकिशोर सिंह की पशुधन भर्ती घोटाले में भूमिका फिर से चर्चा में है। बस्ती की राजनीति में उनका प्रभाव पिछले तीन दशकों से रहा है। वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पहली बार विधायक बनने के बाद उनका राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और दोबारा बसपा से होते हुए वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तक रहा है। वे भले ही 2017 और 2022 में चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन क्रमश: 66,908 और 55,897 मत पाकर उन्होंने यह साबित किया कि उनकी सियासी जमीन अभी खिसकी नहीं है।
परिवार भी राजनीति में स्थापित
किसान परिवार से आने वाले राजकिशोर सिंह ने वर्ष 1990 में एपीएन पीजी कॉलेज, बस्ती के छात्रसंघ अध्यक्ष बने। विधायक से मंत्री तक के सफर में उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाने के साथ-साथ परिवार को भी राजनीति में स्थापित किया। उनकी माता शारदा सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके भाई बृजकिशोर सिंह भी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और अखिलेश यादव सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह शानू भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं।
वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद 2002 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर हरैया से विधायक निर्वाचित हुए। मायावती सरकार में उन्हें उद्यान मंत्री बनाया गया। वर्ष 2003 में सत्ता परिवर्तन के दौरान उन्होंने बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का साथ दिया। इसके बाद मुलायम सिंह यादव सरकार में उन्हें उद्यान एवं सिंचाई मंत्री की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर दोबारा विधायक बनने के बाद अखिलेश यादव सरकार में वह पशुधन एवं पंचायती राज मंत्री बने।
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2014 की भर्ती से जुड़ा विवाद
राजकिशोर सिंह के राजनीतिक जीवन का सबसे विवादित अध्याय वर्ष 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ। उस समय प्रदेश के 17 मंडलों में 1,198 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन, ओएमआर शीट के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। बाद में मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसी ने तत्कालीन विभागीय अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की। इस प्रकरण के बीच वर्ष 2016 में राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर सपा से बाहर कर दिया गया था।
चुनावी समीकरणों पर भी नजर
वर्ष 2017 में कांग्रेस और 2022 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद राजकिशोर सिंह को जीत नहीं मिली। वर्ष 2024 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने हरैया क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। अब भर्ती प्रकरण में पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा हो रही है।
हरैया में भाजपा के भीतर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी और स्थानीय समीकरण भी चर्चा का विषय हैं। मौजूदा विधायक अजय सिंह के सामने पार्टी में अन्य दावेदारों की भूमिका क्या होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, भर्ती प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई और राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर शासन का निर्णय इस पूरे घटनाक्रम के अहम पहलू बने हुए हैं।
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परिवार भी राजनीति में स्थापित
किसान परिवार से आने वाले राजकिशोर सिंह ने वर्ष 1990 में एपीएन पीजी कॉलेज, बस्ती के छात्रसंघ अध्यक्ष बने। विधायक से मंत्री तक के सफर में उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाने के साथ-साथ परिवार को भी राजनीति में स्थापित किया। उनकी माता शारदा सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके भाई बृजकिशोर सिंह भी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और अखिलेश यादव सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह शानू भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं।
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वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद 2002 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर हरैया से विधायक निर्वाचित हुए। मायावती सरकार में उन्हें उद्यान मंत्री बनाया गया। वर्ष 2003 में सत्ता परिवर्तन के दौरान उन्होंने बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का साथ दिया। इसके बाद मुलायम सिंह यादव सरकार में उन्हें उद्यान एवं सिंचाई मंत्री की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर दोबारा विधायक बनने के बाद अखिलेश यादव सरकार में वह पशुधन एवं पंचायती राज मंत्री बने।
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2014 की भर्ती से जुड़ा विवाद
राजकिशोर सिंह के राजनीतिक जीवन का सबसे विवादित अध्याय वर्ष 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ। उस समय प्रदेश के 17 मंडलों में 1,198 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन, ओएमआर शीट के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। बाद में मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसी ने तत्कालीन विभागीय अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की। इस प्रकरण के बीच वर्ष 2016 में राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर सपा से बाहर कर दिया गया था।
चुनावी समीकरणों पर भी नजर
वर्ष 2017 में कांग्रेस और 2022 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद राजकिशोर सिंह को जीत नहीं मिली। वर्ष 2024 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने हरैया क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। अब भर्ती प्रकरण में पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा हो रही है।
हरैया में भाजपा के भीतर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी और स्थानीय समीकरण भी चर्चा का विषय हैं। मौजूदा विधायक अजय सिंह के सामने पार्टी में अन्य दावेदारों की भूमिका क्या होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, भर्ती प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई और राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर शासन का निर्णय इस पूरे घटनाक्रम के अहम पहलू बने हुए हैं।