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Padma Shri Award: पुरस्कार की घोषणा के बाद बोले प्रो विश्वनाथ, मेरी तटस्थ लेखनी की स्वीकार्यता है पद्मश्री

Thu, 26 Jan 2023 10:41 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 26 Jan 2023 10:41 AM IST
सार

प्रो. विश्वनाथ तिवारी को पद्मश्री पुरस्कार मिलने की सूचना पाते ही उनके घर साहित्यकारों और शुभचिंतकों का बधाई देने के लिए तांता लग गया। उधर, मोबाइल फोन भी लगातार बजता रहा। प्रो. तिवारी ने कहा कि इस बधाई को मैं स्वीकार करता हूं।

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Former president of Sahitya Akademi vishvnath tiwari conversation with Amar Ujala announcement of Padma Shri
परिवार के साथ प्रो. विश्वनाथ तिवारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि मैं एक तटस्थ लेखक रहा हूं। अगर ऐसे लेखक को सरकार ने सम्मानित किया है तो यह उसकी भी तटस्थता को प्रदर्शित करता है।

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बुधवार की रात में पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा होने के बाद प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पद्मश्री पुरस्कार भारत सरकार के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। यदि किसी लेखक को बिना मांगे या प्रयत्न किए यह सम्मान सरकार देती है तो इससे महत्व और बढ़ जाता है।
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उन्होंने बताया कि पुरस्कार की सूचना उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। पद्मश्री मिलने की सूचना पाकर प्रो. तिवारी प्रसन्न नजर आए। उन्होंने कहा कि 82 वर्ष से ज्यादा की उम्र का हो गया हूं। सच कहूं तो यह सम्मान अगर पहले मिलता तो और ज्यादा खुशी होती। साहित्य की नई पीढ़ी के बारे में उन्होंने कहा कि नए लेखकों को काम करते रहने चाहिए। गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए।  
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देर रात तक बधाई देने वालों का तांता

प्रो. विश्वनाथ तिवारी को पद्मश्री पुरस्कार मिलने की सूचना पाते ही उनके घर साहित्यकारों और शुभचिंतकों का बधाई देने के लिए तांता लग गया। उधर, मोबाइल फोन भी लगातार बजता रहा। प्रो. तिवारी ने कहा कि इस बधाई को मैं स्वीकार करता हूं। इससे मुझे भविष्य में बेहतर लेखन के लिए प्रेरणा मिलेगी। जब तक जिंदा हूं लेखन करता रहूंगा।

दस्तावेज के संपादक प्रो. तिवारी के प्रकाशित हो चुके हैं दर्जनों ग्रंथ
प्रो. तिवारी साल 1978 से हिंदी की साहित्यिक पत्रिका ‘दस्तावेज’ का संपादन व प्रकाशन कर रहे हैं। अब तक इसके लगभग दो दर्जन विशेषांक प्रकाशित हुए हैं। ‘दस्तावेज’ के लिए उन्हें सरस्वती सम्मान मिल चुका है। अब तक उनके शोध व आलोचना के 12 ग्रंथ, सात कविता संग्रह, चार यात्रा संस्मरण, तीन संस्मरण और एक साक्षात्कार प्रकाशित हो चुके हैं। मूलरूप से कुशीनगर जिले के रायपुर भैंसही-भेड़िहारी गांव के रहने वाले प्रो. विश्वनाथ तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं। साहित्य के लिए वह इंग्लैंड, मारीशस, रूस, नेपाल, अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, आस्ट्रिया, जापान और थाईलैंड आदि देशों की यात्रा कर चुके हैं।

प्रो. विश्वनाथ को मिल चुके हैं ये सम्मान
साहित्य अकादमी का महत्तर सम्मान, सरस्वती सम्मान, व्यास सम्मान, रूस का पुश्किन सम्मान, शिक्षक श्री सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान, महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन सम्मान, महादेवी वर्मा गोयनका सम्मान, भारतीय भाषा परिषद का कृति सम्मान, भारतीय ज्ञानपीठ का मूर्तिदेवी पुरस्कार

 

हिंदी के साहित्यकार को पद्मश्री मिलना गौरव की बात है। प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न विधाओं में लेखन किया है, जिसे देश ने स्वीकार किया है। उनका रचनाकर्म और चिंतन अद्वितीय है। वे लगातार बेहतर लेखन का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में कुछ और अच्छी लेखनी उनके माध्यम से देश के सामने आएगी। मेरी बहुत सारी शुभकामनाएं हैं। - प्रो. अनिल राय, पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग गोविवि

प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को पद्मश्री मिलना समूचे हिंदी जगत और पूर्वांचल के लिए अत्यंत गौरव की बात है। प्रो. तिवारी का संपूर्ण जीवन साहित्य को समर्पित है। उनके समर्पण को सरकार द्वारा गौरव प्रदान किया गया है। गौरव के इस क्षण में हम अत्यंत आह्लादित हैं।-प्रो. प्रत्यूष दुबे, आचार्य गोरखपुर विश्वविद्यालय

बहुत दिनों बाद किसी व्यक्ति को पद्मश्री पुरस्कार मिला है। यह एक नागरिक सम्मान है, जो सरकार देती है। उनका लेखन इस स्तर का है कि पुरस्कार मिलना चाहिए। उनसे पहले हिंदी का कोई भी व्यक्ति साहित्य अकादमी का अध्यक्ष नहीं हुआ था। वे निर्विरोध अध्यक्ष बने थे। उनकी सरलता और सादगी के प्रति सम्मान का भाव है। उनके लेखन में भारतीयता और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जन जीवन का, किसानों की पीड़ा, मनुष्यता और मनुष्य की स्वाधीनता पर हो रहे हमले का विस्तार से उल्लेख मिलता है। - प्रो. चितरंजन मिश्र, साहित्यकार एवं पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग गोविवि
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