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Gorakhpur News: व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के परिचायक हैं पांच गुण : डॉ. वेद प्रकाश
Fri, 23 Aug 2024 04:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 23 Aug 2024 04:44 AM IST
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- महाराणा प्रताप महाविद्यालय में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ स्मृति सप्तदिवसीय व्याख्यान माला
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। विद्या, विनय, वाणी, वस्त्र और शरीर ये पांच गुण मनुष्य को प्रतिष्ठावान बनाते हैं। केवल सुंदर और आकर्षक शरीर ही एक अच्छे व्यक्तित्व का परिचायक नहीं होता है। अष्टावक्र मुनि इसके सबसे बेहतर उदाहरण हैं कि शारीरिक असमानता के बावजूद अपने ज्ञान के कारण वे एक महान व्यक्तित्व को प्राप्त करते हैं।
ये बातें किसान पीजी कॉलेज सेवरही, कुशीनगर के सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. वेद प्रकाश पांडेय ने कहीं। वे महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में ब्रह्मलीन राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ महाराज की 10वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्तदिवसीय व्याख्यामाला के दूसरे दिन “व्यक्तित्व निर्माण की दिशाएं“ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व के सम्यक विकास के तीन अंग संवेदना का विकास, भाव का विकास, आत्मा या आध्यात्मिकता का विकास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हम सबको अपने अंदर के व्यक्तित्व को पहचानना चाहिए। जिस व्यक्तित्व को हम पहचानने का प्रयास करते हैं, वह हमारे अंतः क्रियाओं और वाह्य क्रियाओं के रूप में परिलक्षित होता है।
कार्यक्रम का संचालन बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। विद्या, विनय, वाणी, वस्त्र और शरीर ये पांच गुण मनुष्य को प्रतिष्ठावान बनाते हैं। केवल सुंदर और आकर्षक शरीर ही एक अच्छे व्यक्तित्व का परिचायक नहीं होता है। अष्टावक्र मुनि इसके सबसे बेहतर उदाहरण हैं कि शारीरिक असमानता के बावजूद अपने ज्ञान के कारण वे एक महान व्यक्तित्व को प्राप्त करते हैं।
ये बातें किसान पीजी कॉलेज सेवरही, कुशीनगर के सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. वेद प्रकाश पांडेय ने कहीं। वे महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में ब्रह्मलीन राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ महाराज की 10वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्तदिवसीय व्याख्यामाला के दूसरे दिन “व्यक्तित्व निर्माण की दिशाएं“ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व के सम्यक विकास के तीन अंग संवेदना का विकास, भाव का विकास, आत्मा या आध्यात्मिकता का विकास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हम सबको अपने अंदर के व्यक्तित्व को पहचानना चाहिए। जिस व्यक्तित्व को हम पहचानने का प्रयास करते हैं, वह हमारे अंतः क्रियाओं और वाह्य क्रियाओं के रूप में परिलक्षित होता है।
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कार्यक्रम का संचालन बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।