पहलगाम आतंकी हमला: गोरखपुर में पांच पाकिस्तानी... नहीं जाएंगे वापस, एलटीवी के आधार पर रहने की अनुमति
पहलगाम आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय की तरफ से 25 अप्रैल को निर्देश जारी किया गया। इसमें वीजा के प्रकार को लेकर स्पष्ट किया गया है। इसके तहत कुल 16 कैटेगरी में शामिल पाकिस्तानियों के वीजा में एलटीवी और डिप्लोमेटिक व सरकारी लोगों को फिलहाल बाहर रखा गया है।
विस्तार
पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के नागरिकों का वीजा निलंबित करने का फैसला लिया है। ऐसे में गोरखपुर में रह रहे पांच पाकिस्तानी लोग भी चिंतित हैं। हालांकि उन्हें देश छोड़कर नहीं जाना होगा, क्योंकि यह फैसला लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) व डिप्लोमेटिक और सरकारी लोगों पर फिलहाल लागू नहीं होगा। पांच लोगों में दो हिंदू (भाई-बहन) पीपीगंज इलाके के हैं, जबकि तीन मुस्लिम जाफरा बाजार, घासीकटरा और दुर्गाबाड़ी में रह रहे हैं। इनको पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न झेलने वाले हिंदू और मुस्लिम परिवार मानते हुए एलटीवी के आधार पर भारत में रहने की अनुमति दी गई है।
दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की वीजा सेवाएं पूरी तरह से बंद किए जाने की घोषणा कर दी गई थी। इससे भ्रम फैल गया था। एलटीवी वाले परिवारों को भी पाकिस्तान जाने को लेकर खुफिया एजेंसियों की तरफ से संपर्क किया जाने लगा। जिले के कैंपियरगंज की रमा देवी और इनके भाई बसंत कुमार दोनों का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। बसंत का जन्म 1957 और बहन रमा देवी का 1965 में पाकिस्तान में हुआ था। धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर 1981 में दोनों भाई-बहन पाकिस्तान से भारत चले आए। फिर गोरखपुर में बतौर शरणार्थी आज भी रहते हैं।
रमा देवी की शादी भी गोरखपुर आने के बाद पीपीगंज क्षेत्र में कर दी गई। भाई और बहन की तरफ से भारतीय नागरिकता के लिए भी आवेदन किया जा चुका है, जो अभी लंबित है। ऐसे ही कोतवाली थाना क्षेत्र के दुर्गाबाड़ी में रईसा खातून पत्नी सनाउल्लाह भी हैं। रईसा का जन्म 1957 में हुआ था। सिर्फ दो साल की उम्र में ही परिवार इन्हें लेकर भारत आ गया। वह भारत में धार्मिक शरणार्थी के आधार पर रहने लगीं। कुछ दिन के बाद वह गोरखपुर आकर बस गईं। जाफरा बाजार की निगहत अनीस पत्नी स्वर्गीय समीम महमूद का 1960 में पाकिस्तान में जन्म हुआ। 1983 से यह भी गोरखपुर में रह रही हैं। घासीकटरा की रहने वाली नासरा खातून पत्नी स्वर्गीय फारुख का जन्म 1941 में पाकिस्तान में हुआ था। वह 1982 में भारत चली आईं। इसके बाद वह गोरखपुर में ही शरणार्थी के तौर पर रह रही हैं। खुफिया एजेंसियों की जांच में इनका वर्तमान में पाकिस्तान से किसी तरह का कोई संपर्क भी नहीं हैं। एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि चूंकि इनके पास एलटीवी है, ऐसे में अभी इन्हें भारत छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारत सरकार की तरफ से एलटीवी वालों को भी भारत छोड़ने के लिए निर्देशित किया गया तो इन्हें भी भारत छोड़ना पड़ सकता है।
25 को जारी किया गया था आदेश
पहलगाम आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय की तरफ से 25 अप्रैल को निर्देश जारी किया गया। इसमें वीजा के प्रकार को लेकर स्पष्ट किया गया है। इसके तहत कुल 16 कैटेगरी में शामिल पाकिस्तानियों के वीजा में एलटीवी और डिप्लोमेटिक व सरकारी लोगों को फिलहाल बाहर रखा गया है।
गोरखपुर में लॉन्ग टर्म वीजा( एलटीवी) वाले पांच लोग हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार एलटीवी वालों को भारत छोड़ने की जरूरत नहीं है, इन्हें आदेश से बाहर रखा गया है। ऐसे में ये फिलहाल गोरखपुर में ही हैं। पुलिस की टीम लगातार अपनी निगरानी और जांच करती रहती है। - गौरव ग्रोवर, एसएसपी