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Gorakhpur News: चिड़ियाघर में दिखेंगे 10 स्वर्ण मृग भी, एक काला हिरण भी- प्रदेश का पहला सफेद हिरण पहले से ही

Wed, 10 Apr 2024 12:26 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 10 Apr 2024 12:26 PM IST
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Five more golden deer came to the zoo from Hindalco in gorakhpur zoo
हिंडाल्को मिनी जू में स्वर्ण मृग। इन्हें गोरखपुर चिड़ियाघर ला दिया गया। - फोटो : अमर उजाला
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान चिड़ियाघर में मौजूद वन्य जीवों में अब 10 स्वर्ण मृग और एक काला हिरण भी शामिल हो जाएगा। अभी कुछ दिन पहले रेणुकूट के हिंडाल्को से एक काला हिरण और पांच स्वर्ण मृग गोरखपुर लाए गए थे। मंगलवार की देर रात तक पांच और स्वर्ण मृग आ गए। डॉ. योगेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम रेणुकूट से लेकर इन्हें आई। बुधवार से इन स्वर्ण मृगों का ठिकाना गोरखपुर चिड़ियाघर हो जाएगा।
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हिंडालको परिसर रेणुकूट सोनभद्र स्थित मिनी जू अब बंद हो चुका है। वहां से 12 वन्य जीवों को गोरखपुर ले जाने का आदेश हुआ था। वन्य जीवों को गोरखपुर लाने के लिए डॉ. योगेश के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई थी। बीते 19 मार्च को रेणुकूट पहुंची टीम वहां से एक काले हिरण और पांच स्वर्ण मृग को गोरखपुर ले आई थी।
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Five more golden deer came to the zoo from Hindalco in gorakhpur zoo
डॉ योगेश सिंह के साथ मौजूद गोरखपुर से गई टीम के सदस्य - फोटो : अमर उजाला
डॉ. योगेश ने बताया कि चिड़ियाघर में रखने से पहले इन्हें 21 दिन क्वारंटीन प्रक्रिया में रखा जाएगा। पांच स्वर्ण मृग लेकर टीम मंगलवार की देर रात तक गोरखपुर आ गई। इन्हें भी सीधे क्वारंटीन किया जाएगा। शक्ति सिंह, रवि यादव, सर्वज्ञमानी, राकेश यादव समेत लोग मृग को लेने टीम के साथ गए थे।

Five more golden deer came to the zoo from Hindalco in gorakhpur zoo
डॉ योगेश सिंह के साथ खड़ी टीम - फोटो : अमर उजाला
बोमा विधि का किया प्रयोग
डॉ. योगेश और उनकी टीम जब रेणुकूट के मिनी जू में पहुंची तो, इन जानवरों को पकड़ने के लिए उन्हें काफी दिक्कतें हुई। इन जानवरों को पकड़ने के लिए ‘बोमा विधि’ का प्रयोग किया गया। बोमा विधि अफ्रीका की बेहद खास विधि होती है।
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गोरखपुर चिड़ियाघर में आए काले हिरण। - फोटो : अमर उजाला।
इसमें घास डालकर जानवरों को आने का मौका दिया जाता है। जब वे घास खाने लगते हैं तो फिर उन्हें बाड़े में बंद कर दिया जाता। क्योंकि, जबरन वन्य जीव को पकड़ कर कैद नहीं किया जा सकता। ऐसे में उन्हें खुद बाड़े में आने का इंतजार करना पड़ता। बोमा विधि इसमें सहायक होता है।
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