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खुशखबर: कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट के लिए मिले पांच करोड़ रुपये, योजना के लिए शुरू हुई कवायद
Sat, 24 Sep 2022 03:02 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 24 Sep 2022 03:02 PM IST
सार
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष के लिए गति शक्ति योजना के तहत 5 करोड़ रुपये मिले हैं। जल निगम को सीईटीपी का निर्माण करना है। उनके अफसरों को जरूरी औपचारिकता जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है। आगे गति शक्ति योजना से सहायता की उम्मीद है। सीईटीपी का काम जल्द शुरू होगा। फंड को लेकर कोई दिक्कत नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में कॉमन इंफ्लूएट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के निर्माण को लेकर तेजी आ गई है। केंद्र से गति शक्ति योजना से वित्तीय वर्ष 2022-23 में पांच करोड़ रुपये की सहायता मिली है। शुक्रवार को गीडा प्रशासन के निर्देश पर जलनिगम के अधिकारियों ने योजना के लिए जरूरी औपचारिकता को पूरी करने की कवायद शुरू कर दी है। उम्मीद है कि नवंबर महीने से सीईटीपी का निर्माण शुरू हो जाएगा।
गीडा के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की तरफ से पहले ही 93 करोड़ रुपये की लागत से 7.5 एमएलडी के ट्रीटमेंट प्लांट की मंजूरी मिल चुकी है। दरअसल, गीडा की स्थापना के 30 साल बाद भी सीईटीपी की स्थापना नहीं हो सकी है। इस वजह से गीडा के उद्योगों का पानी आमी नदी में जाता था। इसको लेकर आमी बचाओ मंच के संयोजक विश्वविजय सिंह ने काफी आंदोलन किया था। जिसके बाद एनजीटी ने गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे के शोधन के लिए सीईटीपी लगाने का आदेश जारी किया हुआ है।
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अब गति शक्ति योजना से पांच करोड़ रुपये की सहायता मिलने से योजना को रफ्तार मिल गई है। करीब 93 करोड़ से बनने वाले सीईटीपी का निर्माण जल निगम को करना है। इसके लिए जल निगम जरूरी औपचारिकता पूरी करने में जुटा है। गीडा प्रशासन के मुताबिक, सीईटीपी के संचालन के लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। दरअसल, यह एसपीवी एक तरह की कमेटी ही होती है, जो सीईटीपी के संचालन में आने वाले खर्च की रूपरेखा तैयार करेगी।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष के लिए गति शक्ति योजना के तहत 5 करोड़ रुपये मिले हैं। जल निगम को सीईटीपी का निर्माण करना है। उनके अफसरों को जरूरी औपचारिकता जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है। आगे गति शक्ति योजना से सहायता की उम्मीद है। सीईटीपी का काम जल्द शुरू होगा। फंड को लेकर कोई दिक्कत नहीं है।
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गीडा के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की तरफ से पहले ही 93 करोड़ रुपये की लागत से 7.5 एमएलडी के ट्रीटमेंट प्लांट की मंजूरी मिल चुकी है। दरअसल, गीडा की स्थापना के 30 साल बाद भी सीईटीपी की स्थापना नहीं हो सकी है। इस वजह से गीडा के उद्योगों का पानी आमी नदी में जाता था। इसको लेकर आमी बचाओ मंच के संयोजक विश्वविजय सिंह ने काफी आंदोलन किया था। जिसके बाद एनजीटी ने गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे के शोधन के लिए सीईटीपी लगाने का आदेश जारी किया हुआ है।
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अब गति शक्ति योजना से पांच करोड़ रुपये की सहायता मिलने से योजना को रफ्तार मिल गई है। करीब 93 करोड़ से बनने वाले सीईटीपी का निर्माण जल निगम को करना है। इसके लिए जल निगम जरूरी औपचारिकता पूरी करने में जुटा है। गीडा प्रशासन के मुताबिक, सीईटीपी के संचालन के लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। दरअसल, यह एसपीवी एक तरह की कमेटी ही होती है, जो सीईटीपी के संचालन में आने वाले खर्च की रूपरेखा तैयार करेगी।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष के लिए गति शक्ति योजना के तहत 5 करोड़ रुपये मिले हैं। जल निगम को सीईटीपी का निर्माण करना है। उनके अफसरों को जरूरी औपचारिकता जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है। आगे गति शक्ति योजना से सहायता की उम्मीद है। सीईटीपी का काम जल्द शुरू होगा। फंड को लेकर कोई दिक्कत नहीं है।