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UP: रेलवे में नौकरी के नाम पर 70 युवकों से ठगी, बर्खास्त कर्मचारी पर FIR, रचा फर्जी भर्ती का जाल

Sun, 31 May 2026 04:20 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sun, 31 May 2026 04:20 PM IST
सार

युवकों को रेलवे में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया और उनसे पंजीकरण, टूल्स तथा अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पांच हजार से दस हजार रुपये तक लिए गए। भुगतान के लिए मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड भेजा जाता था, जिसके माध्यम से रकम जमा कराई जाती थी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दो दिनों के भीतर 60 से 70 युवक इंटरव्यू के लिए यांत्रिक कारखाना पहुंच चुके थे।

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FIR lodged against dismissed railway employee for cheating in the name of providing job in railway
फर्जी दस्तावेज से नौकरी - फोटो : amar ujala

विस्तार

रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 70 युवकों से ठगी के मामले में शाहपुर पुलिस ने रेलवे के बर्खास्त कर्मचारी पर शनिवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि रेलवे से बर्खास्त कर्मचारी दीपक कुमार सिंह ने एक प्राइवेट विज्ञापन जारी कराया और फिर ऑनलाइन रुपये लेकर युवकों को 23 मई को इंटरव्यू के लिए बुलाया।

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युवकों के यांत्रिक कारखाना आने के बाद उन्हें ठगी की जानकारी हुई, जिसके बाद रेलवे के वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी ने शाहपुर थाने तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी।

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जानकारी के मुताबिक, 23 मई को विभिन्न जिलों से करीब 70 युवक रेलवे के यांत्रिक कारखाना परिसर में इंटरव्यू देने पहुंच गए। युवकों के हाथ में नियुक्ति और इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज थे, लेकिन कारखाना प्रशासन को इस भर्ती प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पहुंचने पर अधिकारियों को शक हुआ और जांच शुरू की गई।

पूछताछ में सामने आया कि सभी युवकों को एक ही माध्यम से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। जांच में पता चला कि आरोपी दीपक कुमार सिंह ने खुद को रेलवे से जुड़ा अधिकारी बताकर सोशल मीडिया और इंटरनेट माध्यमों से भर्ती का प्रचार कराया था।

युवकों को रेलवे में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया और उनसे पंजीकरण, टूल्स तथा अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पांच हजार से दस हजार रुपये तक लिए गए। भुगतान के लिए मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड भेजा जाता था, जिसके माध्यम से रकम जमा कराई जाती थी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दो दिनों के भीतर 60 से 70 युवक इंटरव्यू के लिए यांत्रिक कारखाना पहुंच चुके थे। लगातार अभ्यर्थियों के आने और मामले की जानकारी फैलने के बाद कारखाना प्रशासन सतर्क हो गया। इसके बाद वरिष्ठ कार्मिक अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की जांच कराई।
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जांच में यह तथ्य सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी थी और इसके पीछे पूर्व रेलकर्मी दीपक कुमार सिंह की भूमिका सामने आई। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अभ्यर्थियों का विश्वास जीतने के लिए साझा किया था एचआरएमएस आईडी और पासवर्ड
जांच में सामने आया कि आरोपी दीपक कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों का विश्वास जीतने के लिए एचआरएमएस आईडी और पासवर्ड तक साझा किए, जिससे पूरी प्रक्रिया वास्तविक भर्ती जैसी प्रतीत होने लगी। मामले की विभागीय पड़ताल में पता चला कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में लखनऊ स्थित आलमबाग कार्यशाला में कार्यरत था, लेकिन वर्तमान में बर्खास्त किया जा चुका है।

विभागीय दस्तावेजों की भी हो रही जांच
रेलवे प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान आरोपी के इस्तेमाल में एक मोबाइल नंबर मिला, जबकि रेलवे के आधिकारिक एचआरएमएस रिकॉर्ड में उससे अलग नंबर दर्ज है। ऐसे में यह भी जांच की जा रही है कि कहीं पहचान और विभागीय अभिलेखों का दुरुपयोग तो नहीं किया गया। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी भर्ती के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने अभ्यर्थी इसके झांसे में आए हैं।
 
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