बांसगांव के नगर पंचायत अध्यक्ष वेदप्रकाश शाही के खिलाफ डेढ़ करोड़ के गबन का मामला दर्ज
- डीएम के आदेश पर वर्तमान अधिशासी अधिकारी कमलेश शाही की तहरीर पर केस
- मुरादाबाद की कंपनी को गलत तरीके से टेंडर देने के मामले में दर्ज हुआ केस
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बांसगांव नगर पंचायत के अध्यक्ष वेदप्रकाश शाही उर्फ पप्पू के खिलाफ डेढ़ करोड़ के गबन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। बृहस्पतिवार देर रात दर्ज इस मुकदमे में पूर्व अधिशासी अधिकारी अविनाश मल्ल और लघु उद्योग निगम लिमिटेड के मुरादाबाद कार्यालय के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक को भी आरोपी बनाया गया है। मामले की प्राथमिक जांच जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने बांसगांव के एसडीएम पंकज दीक्षित से कराई थी। जांच में डेढ़ करोड़ रुपये का घपला सामने आया था।
बांसगांव नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी कमलेश शाही की ओर से दर्ज कराए गए केस के मुताबिक, नगर पंचायत बांसगांव की ओर से टाटा 407 हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट वाहन की आपूर्ति के लिए 19 जुलाई 2018 को 1 करोड़ 50 लाख 59 हजार 286 रुपये की निविदा निकाली गई थी। वाहन आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड के क्षेत्रीय कार्यालय मुरादाबाद को मिली थी, लेकिन सभी वाहनों की आपूर्ति नहीं की गई। टेंडर प्रक्रिया में भी नियम-मानकों का पालन नहीं किया गया। मनमाने तरीके से काम दिया गया और धनराशि का गबन किया गया।
इसकी शिकायत विनय सिंह समेत 11 सभासदों ने 27 फरवरी 2020 को जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन से की थी। जिलाधिकारी ने एसडीएम पंकज दीक्षित को जांच सौंपी और रिपोर्ट तलब की। एसडीएम ने 6 अप्रैल को जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने 13 मई को अधिशासी अधिकारी कमलेश शाही को मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया। अधिशासी अधिकारी ने 20 मई को थानाध्यक्ष बांसगांव को तहरीर दी और नगर पंचायत अध्यक्ष सहित अन्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया।
एसडीएम ने ऐसे पकड़ी धांधली
-नगर पंचायत खुद कार्यदायी संस्था है, फिर भी डेढ़ करोड़ रुपये का टेंडर नहीं निकाला गया। 500 किलोमीटर दूर मुरादाबाद की फर्म को डेढ़ करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया।
-धनराशि का भुगतान किया गया, लेकिन जीएसटी, टीडीएस की कटौती नहीं हुई। मुरादाबाद की फर्म की ओर से टीडीएस जमा करने का कोई चालान भी नहीं प्रस्तुत किया गया है।
-हाइड्रोलिक टाटा 207 की खरीदारी के लिए 14.75 लाख 400 रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन गाड़ी दूसरी और खराब आई। जो गाड़ी आई, उसकी कीमत बेहद कम थी। गाड़ी के कोई कागज नहीं हैं। पंजीकरण व बीमा भी नहीं हुआ है।
-टाटा 207 के लिए 18.29 लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन यह गाड़ी अभी तक नगर पंचायत को नहीं मिली है। यह सीधे-सीधे गबन का मामला है।
यह हो सकती है सजा
धारा 419, 420 : धोखाधड़ी करना (सजा-सात वर्ष कारावास व जुर्माना)
धारा 409 : विश्वास का आपराधिक हनन (सजा दस साल और आर्थिक दंड)
धारा 406 : अधिकार का गलत इस्तेमाल कर नुकसान पहुंचाना (सजा तीन साल या आर्थिक दंड या दोनों)
धारा 467 : मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण की कूटरचना (सजा सात साल व आर्थिक दंड)
धारा 468 : कूटरचित दस्तावेज का छल करने के लिए इस्तेमाल करना (सजा सात साल व आर्थिक दंड)
धारा 471 : कूटरचित दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल करना (सजा: जमानतीय व संज्ञेय अपराध, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के विचारणीय)
फर्म के खिलाफ ही मुकदमे का आदेश हुआ था। नगर पंचायत अध्यक्ष का नाम साजिशन डाला गया है। टेंडर की प्रक्रिया पारदर्शी थी। जो वाहन आया है, उसका पंजीकरण कराया गया था। बीमा भी हुआ था। एक वाहन अभी तक नहीं आया है। इसके लिए कई रिमाइंडर भेजे गए हैं। फर्म प्रबंधन के खिलाफ अब नगर पंचायत की ओर से मुकदमा कराया जाएगा।
-वेद प्रकाश शाही उर्फ पप्पू, अध्यक्ष बांसगांव नगर पंचायत