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गोरखपुर के इन किसानों को पराली जलाना पड़ा महंगा, सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग से हो रही मॉनीटरिंग

Tue, 27 Oct 2020 11:24 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, सहजनवां (गोरखपुर)।
अमर उजाला ब्यूरो, सहजनवां (गोरखपुर)। Published by: vivek shukla Updated Tue, 27 Oct 2020 11:24 AM IST
सार

  • सहजनवां तहसील के बरईपार तेतरिया का मामला, लेखपाल ने दर्ज कराया मुकदमा
  • इसके पहले सिकरीगंज और गोला के एक-एक किसान पर दर्ज हो चुका है मुकदमा

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FIR filed against many farmers for Burning straw in Gorakhpur
पराली जलाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में पराली जलाने पर सात और किसानों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। ये सातों किसान सहजनवां तहसील के बरईपार तेतरिया गांव के हैं। इसके पहले सिकरीगंज और गोला क्षेत्र के भी एक-एक किसान पर मुकदमा दर्ज हो चुका है।
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डीएम के. विजयेंद्र पांडियन और कृषि विभाग के अफसरों ने किसानों से अपील की है कि पराली जलाने को लेकर शासन से लेकर कोर्ट तक की सख्त है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है।
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जानकारी के मुताबिक, हलका लेखपाल अवधेश यादव को शिकायत मिली थी कि बरईपार तेतरिया के कुछ किसान अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। मौके पर पहुंची टीम को जांच में शिकायत सही मिली। इस पर लेखपाल ने गांव के ही ब्रह्मा सिंह, बरकत अली, सहाबुद्दीन, जमील, शकील, अब्दुल गनी और बेगम जान के खिलाफ हरित कानून के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी थी। जिस पर सहजनवां पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
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सेटेलाइट से भी हो रही पराली जलाने की निगरानी

कोर्ट की सख्ती के बाद शासन- प्रशासन पराली जलाने के मामलों को लेकर काफी सतर्क हो गया है। डीएम के निर्देश पर जहां एसडीएम और हलका लेखपाल लगातार निगरानी कर रहे हैं, वहीं शासन स्तर से इसकी निगरानी सेटेलाइट से भी की जा रही है। ऐसे में खेत में यदि कोई पराली जलाता है तो उसका पकड़ा जाना तय है, भले ही पराली जलाने के बाद खेत की जुताई ही क्यों न करा दें।

सिकरीगंज और गोला क्षेत्र में जिन एक-एक किसानों पर मुकदमा दर्ज हुआ, उसकी सूचना सेटेलाइट इमेज के आधार पर ही शासन से भेजी गई थी। इसके बाद मौके पर जांच में पूरा मामला खुल गया। कृषि विभाग के मुताबिक, पराली जलाने पर किसान के विरुद्ध मुकदमा तो दर्ज होगा ही, फसल की कटाई करने वाले कंबाइन हार्वेस्टर संचालक पर भी मुकदमा होना तय है। जुर्माना भी लगाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है रोक

बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश के लिए उच्चतम न्यायालय ने पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए शासन से लेकर जिला प्रशासन तक कई तरह की कवायदें कर रहा है। इसके लिए जहां एक तरफ किसानों को जागरूक किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ फसल अवशेष का निस्तारण करने वाले यंत्रों के साथ ही कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही पराली जलाने से रोकने और जलाने वालों पर कार्रवाई करने के लिए तहसील और थाने स्तर पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार के नेतृत्व में अलग-अलग समितियां भी गठित की गई हैं। इतना ही नहीं सेटेलाइट के जरिए भी निगरानी की जा रही है।
 
रिमोट सेंसिंग सेंटर से जारी होती है सूचना
रिमोट सेंसिंग सेंटर को सेटेलाइट से निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेटेलाइट के जरिए रिमोट सेंसिंग सेंटर आसानी से इस बात का पता लगा लेगा कि किस देशांतर और अक्षांश पर पराली जलाई जा रही है। इसकी सूचना जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। बाद में जिला प्रशासन जांच कराकर सूचना की पुष्टि कराने के बाद पराली जलाने वाले किसान और फसल काटने वाले कंबाइन हार्वेस्टर संचालक पर मुकदमा दर्ज करने के साथ ही जुर्माना वसूलने की कार्रवाई करेगा।
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