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Maha Shivratri: एक मार्च को मनाया जाएगा महाशिवरात्रि का पर्व, बन रहा है शिवयोग

Tue, 22 Feb 2022 03:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 22 Feb 2022 03:45 PM IST
सार

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्द्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए।

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festival of Mahashivratri will be celebrated on March 1
महाशिवरात्रि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवो के देव महादेव की उपासना का पर्व महाशिवरात्रि एक मार्च को ग्रह-नक्षत्रों के शुभ संयोगों के बीच मनाई जाएगी। इस अवसर पर महानगर के महादेव झारखंडी, मुक्तेश्वरनाथ, मानसरोवर शिव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा।

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वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, एक मार्च दिन मंगलवार को सूर्योदय सुबह छह बजकर 15 मिनट और चतुर्दशी तिथि का मान रात्रि 12 बजकर 17 मिनट तक, धनिष्ठा नक्षत्र भी संपूर्ण दिन रात्रिशेष तीन बजकर 18 मिनट तक, परिघ योग दिन में 10 बजकर 38 मिनट तक के पश्चात संपूर्ण दिन और संपूर्ण रात्रि शिव योग है। इस योग में महादेव का पूजन-अर्चन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायी होगा।

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व्रत का महत्व

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्द्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। जो व्यक्ति शिवरात्रि को निर्जला व्रत रहकर जागरण और रात्रि के चारों प्रहरों में चार बार पूजा करता है, वह शिव की कृपा को प्राप्त करता है। शिवरात्रि महात्म्य में लिखा है कि शिवरात्रि से बढ़कर कोई दूसरा व्रत नहीं है।

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ऐसे करें पूजन-अर्चन

पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें। व्रत रखकर किसी शिव मंदिर या अपने घर में नर्मदेश्वर की मूर्ति अथवा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर समस्त पूजन सामग्री एकत्र कर आसन पर विराजमान होकर ‘मम इह जन्मनि जन्मान्तरेवार्जित सकल पाप क्षयार्थं आयु-आरोग्य-ऐश्वर्य-पुत्र-पौत्रादि सकल कामना सिद्धिपूर्वक अन्ते शिवसायुज्य प्राप्तये शिवरात्रिव्रत साड्गता सिध्यर्थं साम्बसदाशिव पूजनम करिष्ये।’

मंत्र जप करते हुए स्थापित शिवमूर्ति की षोडशोपचार पूजा करें। आक, कनेर, विल्वपत्र और धतूरा, कटेली आदि अर्पित करें। रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र, शिव संबंधित अन्य धार्मिक कथा सुनें। रुद्रभिषेक करा सकें, तो अत्यंत उत्तम है। रात्रि जागरण कर दूसरे दिन प्रात:काल शिवपूजा के पश्चात जौ, तिल और खीर से ‘त्र्यम्बकं यजामहे’ या ‘ऊं नम: शिवाय’ आदि मंत्रों का जाप कर यज्ञशाला में 108 आहुतियां दें। ब्राह्मणों या शिवभक्तों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें फिर स्वयं भोजन कर व्रत का पारण करें।

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