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Gorakhpur News: छात्रों में आत्महत्या जैसा भाव उत्पन्न होना पीड़ादायक : कुलपति
Wed, 11 Sep 2024 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 11 Sep 2024 12:35 AM IST
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गाेरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में “आत्महत्या के विमर्श में परिवर्तन” विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि जीवन ईश्वर का दिया सबसे अनमोल तोहफा है। समाज में छात्र वर्ग के मन में आत्महत्या जैसा भाव उत्पन्न होना पीड़ादायक है। साथ ही यह हमारे लिए एक चुनौती भी है कि हम इसका रोकथाम किस प्रकार से करें। विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करना हमारा उतरदायित्व है। इसी दिशा में विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में स्नेह केंद्र का प्रस्ताव न सिर्फ छात्रों अपितु समाज के हित में एक महत्वपूर्ण पहल होगा।
विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने मुख्य अतिथि एवं सभी अतिथियों का स्वागत किया। डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दूबे ने कहा कि आत्महत्या के प्रयास करने वाले व्यक्ति को एक अपराधी माना जाता है। इस प्रकार के ही अनेक कथनों को बदलने की बात कही जा रही है। जैसा कि अब भारतीय न्याय संहिता में आत्महत्या को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुषमा पांडेय ने कहा कि अकेलापन एवं अवसाद आत्महत्या का मूल कारण है। पैनल में डॉ. गिरिजेश कुमार यादव, डॉ. रश्मि रानी, डॉ. राम कीर्ति सिंह, डॉ. प्रियंका गौतम ने चर्चा की। डॉ. विस्मिता पालीवाल और डॉ. गरिमा सिंह ने कार्यकम का सफल आयोजन किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि जीवन ईश्वर का दिया सबसे अनमोल तोहफा है। समाज में छात्र वर्ग के मन में आत्महत्या जैसा भाव उत्पन्न होना पीड़ादायक है। साथ ही यह हमारे लिए एक चुनौती भी है कि हम इसका रोकथाम किस प्रकार से करें। विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करना हमारा उतरदायित्व है। इसी दिशा में विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में स्नेह केंद्र का प्रस्ताव न सिर्फ छात्रों अपितु समाज के हित में एक महत्वपूर्ण पहल होगा।
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विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने मुख्य अतिथि एवं सभी अतिथियों का स्वागत किया। डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दूबे ने कहा कि आत्महत्या के प्रयास करने वाले व्यक्ति को एक अपराधी माना जाता है। इस प्रकार के ही अनेक कथनों को बदलने की बात कही जा रही है। जैसा कि अब भारतीय न्याय संहिता में आत्महत्या को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुषमा पांडेय ने कहा कि अकेलापन एवं अवसाद आत्महत्या का मूल कारण है। पैनल में डॉ. गिरिजेश कुमार यादव, डॉ. रश्मि रानी, डॉ. राम कीर्ति सिंह, डॉ. प्रियंका गौतम ने चर्चा की। डॉ. विस्मिता पालीवाल और डॉ. गरिमा सिंह ने कार्यकम का सफल आयोजन किया।
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