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फादर्स डे 2021: किसी के सिर से छिना पिता का साया, कोई पिता की प्रेरणा से बना आत्मनिर्भर, पढ़िए इनकी संघर्षों की कहानी

Sun, 20 Jun 2021 02:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 20 Jun 2021 02:58 PM IST
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Fathers day 2021 Painful story of sons and daughters orphaned from Corona
बेटियों के साथ पूर्व प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश राय। - फोटो : अमर उजाला।
आज फादर्स डे है, लेकिन हर बार से अलग। किसी के सिर से पिता का साया छिना है तो कहीं पिता को बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ा है। बस यादे हैं, जिनके सहारे कइयों को जीवन काटना होगा। प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही बेटे- बेटियों की कामयाबी की कहानी, जिनसे पिता का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है। साथ में कुछ ऐसे ही लोगों की आपबीती भी जिन्हें कोरोना ने ताउम्र दर्द दे दिया है।
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पिता की प्रेरणा से आत्मनिर्भर बना, उनकी सीख मेरा आदर्श
19 मई 2021, मेरे जीवन का सबसे काला दिन। जब पापा ने साथ छोड़ दिया। कोरोना संक्रमित हुए पापा को लाख कोशिश के बाद भी बचा नहीं पाया। उनके द्वारा दी गई सीखें मेरे जीवन का आदर्श है। वे अक्सर अपनी गलतियों को साझा करते थे। कहते थे कि जो गलती मैंने कर दी उसे तुम कभी न करना।
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यह कहना है गोविवि के असिस्टेंट प्रोफेसर वेद प्रकाश राय का, जिनके पिता डॉ. ओम प्रकाश राय का निधन कोरोना के चलते हो गया। डॉ. राय, डीएवी डीग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य थे और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय थे। दाउदपुर निवासी डॉ. वेद प्रकाश पिताकिी स्मृतियों को साझा करते हुए भावुक हो गए।
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कहा कि हमारी पांच बहने और दो भाई हैं। पापा ने सभी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। 20 दिनों तक पापा अस्पताल में रहे, लेकिन कभी यह नहीं लगा कि वे साथ छोड़ जाएंगे। वे हमेशा कहते थे, कभी झूठ मत बोलना। किसी का नुकसान मत करना, सभी के दुख में सबसे पहले खड़े होना। सबसे विनम्र रहना, हमेशा आगे बढ़ना, मतभेद हो तो उसे दूर करना पर मन का भेद न पालना। 

सिर से उठा पिता का साया, यादों के सहारे बस होगी जिंदगी: निहारिका

कोरोना के चलते पहले मां को खोया, फिर से किसी तरह खुद को संभाला और संक्रमित पिता के इलाज में जुट गई। उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, लेकिन पिता 15 दिनों तक कोरोना से लड़ने के बाद जिंदगी की जंग हार गए। 

नियति ने मां को तो छिन लिया था, उम्मीद थी कि पिता का साया तो सिर पर बना रहेगा, मगर वह भी 19 मई को दुनिया छोड़ कर चले गए। पिता के निधन के बाद निहारिका पूरी तरह से टूट चुकी है। मां- पिता के नहीं रहने पर उन्हें संभालने वाला अब कोई नहीं है। तीन बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। 

फादर्स- डे अवसर पर बातचीत का सिलसिला शुरू होते ही पिता की याद में निहारिका के आंसू छलक उठे। रुंधे गले से बोलीं, पिता की यादों के सहारे अब जिंदगी बसर होगी। कूड़ाघाट निवासी गुलाब अग्रहरि व उनकी पत्नी के अलावा बेटी निहारिका भी 29 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गई थीं। निहारिका की मां की तबीयत बिगड़ी और उसी दिन उनती मौत हो गई।

30 अप्रैल को पिता गुलाब की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें टीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां हालात बिगड़ने लगी तो निहारिका ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के लिए कोशिश की। महामारी में स्थिति ऐसी थी कि एक भी बेड खाली नहीं मिले। चार मई को किसी तरह मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इसके बाद निहारिका ने अपनी सेहत पर भी ध्यान दिया और कोरोना को मात दी।  इसी बीच उनके पिता 19 मई को कोरोना से लड़ाई हार गए। 
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