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Gorakhpur News: गन्ने के विकल्प के रूप में किसानों ने अपनाया केले की खेती

Fri, 14 Jul 2023 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Fri, 14 Jul 2023 02:51 AM IST
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Farmers adopted banana cultivation as an alternative to sugarcane
गोरखपुर। मंडल में किसानों ने गन्ने के विकल्प के रूप में केले की खेती को अपनाया है। सर्वाधिक केले की खेती कुशीनगर जनपद में 15300 हेक्टेयर में की गई है। वहीं गोरखपुर में अभी 2200 हेक्टेयर में ही केले की खेती हो पाई है। इसके लिए सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जा रहा है और बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
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पूर्वांचल में किसानों के लिए गन्ना नकदी फसल हुआ करती थी। अविभाज्य देवरिया जनपद जिसका हिस्सा कुशीनगर जनपद भी था, उसे चीनी का कटोरा कहा जाता था। यहां पर बहुत सी चीनी मिलें हुआ करती थीं। लेकिन, जब मिलों ने किसानों का भुगतान लटकाना शुरू किया और मिले बंद होनी शुरू हो गई तो वहां के किसानों ने विकल्प के रूप में केले की खेती को अपनाया।
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कुशीनगर में है हार्डेनिंग सेंटर
कुशीनगर जनपद में अधिक क्षेत्रफल में केले की खेती के पीछे हार्डेनिंग सेंटर का होना बताया जा रहा है। उद्यान विभाग के इंसपेक्टर शशि मुरारी पांडे ने बताया कि हार्डेनिंग सेंटर में पौधों को बाहर से मंगाकर रखा जाता है। वहां रखने के 45 दिन बाद किसानों में वितरित किया जाता है। हार्डेनिंग सेंटर गोरखपुर में नहीं है। इस नाते यहां पर केले की खेती कम हो रही है। हार्डेनिंग सेंटर होने के कारण केले के पौधे आसानी से मिल जाते हैं। इतना ही नहीं किसानों को सस्ता पौधा भी मिलता है।
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गोरखपुर में कैंपियरगंज, चरगांवा, पिपराइच, भटहट, उरुवां, ब्रह्मपुर में केले की खेती की जा रही है। वहीं कुशीनगर जिले में खड्डा, नेबुआ नौरंगिया, विशुनपुरा, पडरौना, दुधही, सेवरही, तमकूहीराज, मोती चक ब्लाॅक क्षेत्र में केले की खेती हो रही है।
एक हेक्टेयर में डेढ़ दो लाख की आती है लागत
केले की खेती में डेढ़ से दो लाख की लागत आती है। लागत निकालने के बाद किसान को तीन लाख के करीब बचत हो जाती है। पौध लगाने के 9 महीने बाद घार फूटने लगती है। तीन से चार महीने बाद केले की फसल तैयार हो जाती है। उसे काटकर किसान कोल्ड रूम में रखते है। यहां उसकी सप्लाई दूसरे प्रांतों में होती है। गोरखपुर में पैदा हुए केले की खपत यहीं पर हो जाती है। जबकि कुशीनगर का केला हरियाणा, दिल्ली, नेपाल सहित अन्य दूसरे प्रांतों में जाता है। किसान मान रह है कि केले के बराबर गन्ने में भी फायदा नहीं है, लेकिन केले की खेती में किसान को मेहनत अधिक करनी पड़ रही है।

कोट
केले की खेती इस समय बहुत लाभदायक हो गई है। सर्वाधिक खेती कुशीनगर जिले में हो रही है। यहां के किसानों ने गन्न के विकल्प के रूप में इसे अपनाया है। यहां का केला दूसरे राज्यों में जा रहा है।
- शशि मुरारी पांडे, इंसपेक्टर, उद्यान विभाग
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