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Gorakhpur News: फर्जी स्टांप प्रकरण अब स्पेशल रिपोर्ट केस...पुलिस ऑफिस से होगी माॅनिटरिंग
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एसएसपी ने विशेषाधिकार का प्रयोग किया, परंपरागत के अलावा पहला एसआर केस
वेंडरों को नोटिस भेजकर पुलिस बुला रही पूछताछ के लिए, यहीं से तैयार हो रही संदिग्धों की सूची
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। फर्जी स्टांप प्रकरण को स्पेशल रिपोर्ट (एसआर) केस घोषित कर दिया गया है। अपराध की गंभीरता के आधार पर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे एसआर की श्रेणी में डाला है। अब इसकी माॅनिटरिंग पुलिस ऑफिस से होगी। साथ ही प्रगति और की गई हर कार्रवाई की जानकारी डीजी ऑफिस को भी भेजनी होगी।
मकसद है कि आने वाले अफसरों को यह मालूम रहे कि परंपरागत हत्या, दुष्कर्म, लूट के अलावा जिले में फर्जी स्टांप जैसा गंभीर अपराध भी हो चुका है। परंपरागत केस को छोड़ दें तो जिले का यह पहला एसआर केस है।
जानकारी के मुताबिक, दीवानी कचहरी में फर्जी स्टांप के मामले की पुष्टि होने के बाद कैंट थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने मास्टरमाइंड रविदत्त मिश्रा को शुक्रवार को जेल भिजवाया था। इस प्रकरण की जांच के लिए एएसपी मानुष पारिक की देखरेख में स्पेशल जांच टीम (एसआईटी) भी गठित है। अब केस को एसएसपी ने एसआर सूची में डाल दिया है, जिसके बाद हर प्रगति की जानकारी खुद उन्हें भी होगी और उनके ऑफिस से इसके बारे में प्रगति को रोज जाना जाएगा।
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उधर, पुलिस मास्टरमाइंड रविदत्त से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस वेंडरों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुला रही है। इसमें से कई ऐसे भी वेंडर हैं, जो पुलिस के पास नहीं आ रहे हैं। इन्हें पुलिस संदिग्ध मानते हुए उनकी अलग सूची तैयार कर रही है।
वहीं, आने वालों का रिकॉर्ड भी देखा जा रहा है कि उन्होंने कितना स्टांप खरीदा था और कितने की बिक्री की है। इस पूरे रिकॉर्ड को देखा जा रहा हैं। पुलिस को उन तीन लोगों की भी तलाश है, जिसका नाम रविदत्त ने उगला है। बताया जा रहा है कि अभी वह फरार हैं और उनकी दुकान भी बंद चल रही है। इससे पुलिस का शक और गहरा गया है। पुलिस सरगर्मी से उनकी तलाश में जुटी है।
......
क्या होता है एसआर केस
स्पेशल रिपोर्ट केस (एसआर) में हिंसक अपराध की एक श्रेणी हैं, जैसे हत्या, दुष्कर्म, लूट, डकैती आदि। इस केस की माॅनिटरिंग जिला पुलिस ऑफिस के अलावा सभी आला अफसर यहां तक की डीजीपी तक से होती है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है। कोई भी नया अफसर आता है तो जिले में होने वाले अपराध को जानने के लिए एसआर फाइल को जरूर देखता है। अभी सिर्फ परंपरागत केस ही इसमें दर्ज किए जाते थे, लेकिन एसएसपी ने पहली बार अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर पहले केस को एसआर घोषित कर दिया है।
यह हुआ था
फर्जी स्टांप का मामला 10 जनवरी को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन की शिकायत पर सामने आया। उनका कहना है कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन, गोरखपुर के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन से भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था। अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। महज तीन हजार का स्टांप सही पाया गया, बाकी 50 हजार का फर्जी था। डीएम के आदेश पर नासिक भी पत्र भेजकर इसके फर्जी होने की पुष्टि करा ली गई। इसके बाद ही पुलिस ने केस दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। जांच में पता चला कि आरोपी रविदत्त ने स्टांप को लेकर दूसरे वेंडर के मुहर का इस्तेमाल कर बेचा था।
...
फर्जी स्टांप का मामला गंभीर है। इसकी जांच के लिए एसआईटी पहले ही गठित कर दी गई है। मास्टरमाइंड जेल भी गया है। अब इस केस को एसआर घोषित कर दिया गया है, ताकि इसकी लगातार माॅनिटरिंग हो और गिरोह का पर्दाफाश हो। एसआईटी जांच कर रही है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी
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वेंडरों को नोटिस भेजकर पुलिस बुला रही पूछताछ के लिए, यहीं से तैयार हो रही संदिग्धों की सूची
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। फर्जी स्टांप प्रकरण को स्पेशल रिपोर्ट (एसआर) केस घोषित कर दिया गया है। अपराध की गंभीरता के आधार पर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे एसआर की श्रेणी में डाला है। अब इसकी माॅनिटरिंग पुलिस ऑफिस से होगी। साथ ही प्रगति और की गई हर कार्रवाई की जानकारी डीजी ऑफिस को भी भेजनी होगी।
मकसद है कि आने वाले अफसरों को यह मालूम रहे कि परंपरागत हत्या, दुष्कर्म, लूट के अलावा जिले में फर्जी स्टांप जैसा गंभीर अपराध भी हो चुका है। परंपरागत केस को छोड़ दें तो जिले का यह पहला एसआर केस है।
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जानकारी के मुताबिक, दीवानी कचहरी में फर्जी स्टांप के मामले की पुष्टि होने के बाद कैंट थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने मास्टरमाइंड रविदत्त मिश्रा को शुक्रवार को जेल भिजवाया था। इस प्रकरण की जांच के लिए एएसपी मानुष पारिक की देखरेख में स्पेशल जांच टीम (एसआईटी) भी गठित है। अब केस को एसएसपी ने एसआर सूची में डाल दिया है, जिसके बाद हर प्रगति की जानकारी खुद उन्हें भी होगी और उनके ऑफिस से इसके बारे में प्रगति को रोज जाना जाएगा।
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उधर, पुलिस मास्टरमाइंड रविदत्त से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस वेंडरों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुला रही है। इसमें से कई ऐसे भी वेंडर हैं, जो पुलिस के पास नहीं आ रहे हैं। इन्हें पुलिस संदिग्ध मानते हुए उनकी अलग सूची तैयार कर रही है।
वहीं, आने वालों का रिकॉर्ड भी देखा जा रहा है कि उन्होंने कितना स्टांप खरीदा था और कितने की बिक्री की है। इस पूरे रिकॉर्ड को देखा जा रहा हैं। पुलिस को उन तीन लोगों की भी तलाश है, जिसका नाम रविदत्त ने उगला है। बताया जा रहा है कि अभी वह फरार हैं और उनकी दुकान भी बंद चल रही है। इससे पुलिस का शक और गहरा गया है। पुलिस सरगर्मी से उनकी तलाश में जुटी है।
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क्या होता है एसआर केस
स्पेशल रिपोर्ट केस (एसआर) में हिंसक अपराध की एक श्रेणी हैं, जैसे हत्या, दुष्कर्म, लूट, डकैती आदि। इस केस की माॅनिटरिंग जिला पुलिस ऑफिस के अलावा सभी आला अफसर यहां तक की डीजीपी तक से होती है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है। कोई भी नया अफसर आता है तो जिले में होने वाले अपराध को जानने के लिए एसआर फाइल को जरूर देखता है। अभी सिर्फ परंपरागत केस ही इसमें दर्ज किए जाते थे, लेकिन एसएसपी ने पहली बार अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर पहले केस को एसआर घोषित कर दिया है।
यह हुआ था
फर्जी स्टांप का मामला 10 जनवरी को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन की शिकायत पर सामने आया। उनका कहना है कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन, गोरखपुर के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन से भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था। अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। महज तीन हजार का स्टांप सही पाया गया, बाकी 50 हजार का फर्जी था। डीएम के आदेश पर नासिक भी पत्र भेजकर इसके फर्जी होने की पुष्टि करा ली गई। इसके बाद ही पुलिस ने केस दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। जांच में पता चला कि आरोपी रविदत्त ने स्टांप को लेकर दूसरे वेंडर के मुहर का इस्तेमाल कर बेचा था।
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फर्जी स्टांप का मामला गंभीर है। इसकी जांच के लिए एसआईटी पहले ही गठित कर दी गई है। मास्टरमाइंड जेल भी गया है। अब इस केस को एसआर घोषित कर दिया गया है, ताकि इसकी लगातार माॅनिटरिंग हो और गिरोह का पर्दाफाश हो। एसआईटी जांच कर रही है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी