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Gorakhpur News: 20 और पीड़ितों के बयान दर्ज, 33 तक पहुंची ठगी के शिकार लोगों की संख्या

Mon, 09 Mar 2026 02:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2026 02:40 AM IST
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Fake Inspector Case: 1.5 to 2 lakh rupees were collected per person on the pretext of getting them jobs in the police and health departments.
फर्जी इंस्पेक्टर प्रकरण : पुलिस और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर प्रति व्यक्ति डेढ़ से दो लाख रुपये वसूले
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पीड़ितों के बयान और कार में मिले दस्तावेज बने अहम आधार, पुलिस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में



बयान दर्ज कराने वालों में गाजीपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, बस्ती, अमेठी, औरैया और जालौन के पीड़ित शामिल







गोरखपुर। सिकरीगंज पुलिस ने फर्जी इंस्पेक्टर प्रकरण में ठगी की शिकार चार महिलाओं समेत 20 लोगों के बयान दर्ज कर उन्हें विवेचना का हिस्सा बना लिया है। अब तक ठगी के शिकार 33 लोगों की पहचान सामने आ चुकी है। पुलिस का कहना है कि सभी पीड़ितों के बयान और बरामद दस्तावेजों के आधार पर आरोपी के खिलाफ जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।



जांच में सामने आया है कि बेलघाट के लखवापाकड़ गांव निवासी आरोपी दिग्विजयनाथ खुद को इंस्पेक्टर बताकर लोगों को अपनी ऊंची पहुंच का झांसा देता था। वह पुलिस और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से डेढ़ से दो लाख रुपये तक वसूलता था। शहर और आसपास के जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी का लालच देकर उनसे आवेदन पत्र, दस्तावेज और पैसे ले लिए जाते थे।
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इस मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब सिकरीगंज पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान बेलघाट क्षेत्र के लखवापाकड़ गांव निवासी दिग्विजयनाथ के रूप में हुई। पुलिस की जांच में सामने आया कि वह न सिर्फ नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता था बल्कि खाकी वर्दी पहनकर सड़कों पर चेकिंग के बहाने भी लोगों से वसूली करता था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से पुलिस ने बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और सामान बरामद किए थे।
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इनमें पुलिस वर्दी, कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक) पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद की मुहर, फर्जी पहचान पत्र, नेम प्लेट, बैज, स्टार, पेनड्राइव और मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा तलाशी में 21 अटेस्टेशन फॉर्म, यूपी पुलिस में एचसीएम पद के लिए 18 आवेदन पत्र, 24 लोगों के दस्तावेजों की छायाप्रति, आठ बैंक पासबुक की फोटो कॉपी और छह मोबाइल सिम कार्ड भी बरामद किए गए। पुलिस को पीले रंग के 15 लिफाफे भी मिले जिन पर कार्यालय कुलपति, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय, प्रयागराज अंकित था।



एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी ने बताया कि आरोपी के पास से बरामद दस्तावेज, मुहर और पीड़ितों के बयान मामले में अहम साक्ष्य साबित होंगे। जांच लगभग पूरी कर ली गई है और जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी चल रही है। जांच के दौरान और पीड़ित सामने आते हैं तो उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे।



इन लोगों ने दर्ज कराए बयान



अंबेडकरनगर के नंदूपुर, फतेहपुर, बेलाबाघ कुसुम सिंह, बस्ती के हरैया निवासी मनीषा सिंह, अंबेडकरनगर के सिकंदरपुर सम्मनपुर निवासी रंजना मौर्या, जालौन के रहिया उरई निवासी नीलम देवी, गाजीपुर के करंडा धर्ममपुर निवासी सुनील कुमार यादव, आजमगढ़ के मदियापार निवासी रिंकु यादव, अचलीपुर निवासी रवि प्रकाश मिश्रा, अंबेडकरनगर के डिघौटा माधवपुर जलालपुर धर्मेंद्र कुमार, बस्ती के हरैया निवासी जीतेंद्र सिंह, आजमगढ़ के कोयलसा औराडाड़ निवासी भानू प्रकाश मिश्र, अयोध्या के महाराजगंज निवासी रीतेश सिंह, अंबेडकरनगर के देवरिया बुर्जुग निवासी मंगेश यादव, सिकरीगंज निवासी धीरज शर्मा, अंबेडकरनगर के बंशापुर, केदारनगर निवासी आदित्य वर्मा, अरविंद कुमार, अयोध्या के गोसाईगंज निवासी धीरेंद्र यादव, विवेक यादव, आजमगढ़ के मेहनाजपुर निवासी नीतिश सिंह, अमेठी के संग्रामपुर निवासी अतुल कुमार शामिल हैं।




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यह है मामला



बीते 10 फरवरी को सिकरीगंज पुलिस ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले फर्जी इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया था। आरोपी न सिर्फ सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलता था, बल्कि पुलिस की वर्दी पहनकर सड़क पर चेकिंग के बहाने वसूली भी करता था। आरोपी की पहचान बेलघाट के लखवापाकड़ गांव निवासी दिग्विजयनाथ के रूप में हुई। तलाशी में उसके कब्जे से उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, नेम प्लेट, बैज, स्टार, पेनड्राइव, मोबाइल फोन बरामद हुआ था।
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