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Gorakhpur News: 99 लाख की बरामदगी के बाद फर्जी आईएएस गौरव कुमार गायब
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गोरखपुर। गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए 99.09 लाख रुपये के मामले में सामने आए फर्जी आईएएस गौरव कुमार का अब कोई पता नहीं है। नाम उजागर होते ही उसने मोबाइल बंद कर दिया और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास स्थित उसका किराए का कमरा भी ताला बंद मिला। पुलिस और जांच एजेंसियां उसकी तलाश में कई जिलों में छापा मार रही हैं।
जांच में पर्दाफाश हुआ है कि यह कथित आईएएस अधिकारी पिछले एक साल से बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। वह खुद को बांका (बिहार) में तैनात आईएएस गौरव कुमार बताकर लोगों से सरकारी नौकरी, ठेका और सरकारी निवेश के नाम पर मोटी रकम ठगता था। पुलिस को अब तक कई बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल पेमेंट के सबूत मिले हैं, जिनसे यह नेटवर्क और बड़ा लग रहा है।
शनिवार को एलआईयू और पुलिस की टीम ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास स्थित उसके संभावित ठिकानों और किराए के कमरे की जांच की। वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि गौरव खुद को बिहार का निवासी बताता था और हमेशा बड़े अफसर की तरह व्यवहार करता था। पर जब बांका जिला प्रशासन से संपर्क किया गया तो न वहां उसकी कोई पोस्टिंग मिली और न किसी गौरव कुमार नामक आईएएस अधिकारी का रिकॉर्ड।
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एक अधिकारी के मुताबिक, गौरव खुद को केंद्र सरकार के विशेष प्रोजेक्ट का अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था। उसके पास कई फर्जी पहचान पत्र और विजिटिंग कार्ड मिलने की आशंका है। पुलिस ने अब गौरव के मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और कॉल डिटेल को खंगालना शुरू किया है। एक टीम यूपी-बिहार सीमा पर दबिश दे रही है।
वहीं, मकान मालिक के अनुसार, गौरव ने किराए पर कमरा लेते समय खुद को बांका निवासी बताया, लेकिन जांच में वहां उसका कोई राशन कार्ड, आधार, वोटर आईडी या परिवार का रिकॉर्ड नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल गोरखपुर तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि गौरव ने कई शहरों में सरकारी नियुक्ति और ठेका दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगे हैं।
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जांच में पर्दाफाश हुआ है कि यह कथित आईएएस अधिकारी पिछले एक साल से बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। वह खुद को बांका (बिहार) में तैनात आईएएस गौरव कुमार बताकर लोगों से सरकारी नौकरी, ठेका और सरकारी निवेश के नाम पर मोटी रकम ठगता था। पुलिस को अब तक कई बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल पेमेंट के सबूत मिले हैं, जिनसे यह नेटवर्क और बड़ा लग रहा है।
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शनिवार को एलआईयू और पुलिस की टीम ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास स्थित उसके संभावित ठिकानों और किराए के कमरे की जांच की। वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि गौरव खुद को बिहार का निवासी बताता था और हमेशा बड़े अफसर की तरह व्यवहार करता था। पर जब बांका जिला प्रशासन से संपर्क किया गया तो न वहां उसकी कोई पोस्टिंग मिली और न किसी गौरव कुमार नामक आईएएस अधिकारी का रिकॉर्ड।
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एक अधिकारी के मुताबिक, गौरव खुद को केंद्र सरकार के विशेष प्रोजेक्ट का अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था। उसके पास कई फर्जी पहचान पत्र और विजिटिंग कार्ड मिलने की आशंका है। पुलिस ने अब गौरव के मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और कॉल डिटेल को खंगालना शुरू किया है। एक टीम यूपी-बिहार सीमा पर दबिश दे रही है।
वहीं, मकान मालिक के अनुसार, गौरव ने किराए पर कमरा लेते समय खुद को बांका निवासी बताया, लेकिन जांच में वहां उसका कोई राशन कार्ड, आधार, वोटर आईडी या परिवार का रिकॉर्ड नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल गोरखपुर तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि गौरव ने कई शहरों में सरकारी नियुक्ति और ठेका दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगे हैं।