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चोरी से बढ़ा रहे थे व्यापार: फर्जी ई-वे बिल बना भेज रहे थे 16 करोड़ का कबाड़, जीएसटी टीम ने पकड़ा

Sat, 09 Sep 2023 11:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 09 Sep 2023 11:14 AM IST
सार

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू देवममणि शर्मा ने कहा कि रांची से पंजाब के लिए फर्जी ई-वे बिल के जरिए ट्रक से लोहे का कबाड़ भेजने की सूचना मिली थी। टीमों को लगाया गया था। कुशीनगर में संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली गई। जांच-पड़ताल में ई-वे बिल फर्जी पाया गया।

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Fake eway bills of 16 crores were being sent and junk worth 16 crores was being sent
जीएसटी द्वारा जब्त की गई ट्रक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वस्तु एवं सेवा कर विभाग (जीएसटी) की एसआईबी टीम ने कुशीनगर में फर्जी ई-वे बिल पर बिहार से पंजाब के लिए ट्रक से जा रहा 16 करोड़ का कबाड़ पकड़ा है। जांच में पता चला है कि झारखंड के रांची की एक बोगस फर्म ने फर्जी तरीके से 16 करोड़ रुपये का ई-वे बिल डाउनलोड किया और लोहे का कबाड़ पंजाब के लिए बुक कर दिया था। जबकि बिहार से ट्रक में इसे लादकर ले जाया जा रहा था। टीम ने माल सहित ट्रक को जब्त कर लिया है।

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जीएसटी अधिकारियों के मुताबिक, कुशीनगर के पास तीन दिन पहले जीएसटी की एसआईबी और सचल दस्ता टीम को जानकारी मिली थी कि फर्जी ई-वे बिल के आधार पर बिहार से माल लोड कर दूसरे प्रदेशों में भेजा जा रहा है।
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इसी सूचना पर टीम ने बिहार-यूपी बार्डर पर कुशीनगर के पास वाहनों की चेकिंग शुरू की। इस दौरान एक लोड ट्रक कुशीनगर हेतिमपुर टोल प्लाजा की ओर से आते दिखा। सचल दस्ता टीम ने ट्रक को रोककर जांच की। पहले तो ड्राइवर ने सब सामान्य बताते हुए कागज और ई-वे बिल दिखाया। ई-वे बिल देखकर टीम के लोगों का दिमाग खटक गया।
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झारखंड के रांची के बजरंग इंटरप्राइजेज नाम से कबाड़ का 16 करोड़ रुपये का ई-वे बिल डाउनलोड था, जबकि ड्राइवर ने बताया कि बिहार से माल को लोडकर पंजाब ले जा रहे हैं। संदेह के आधार पर ट्रक को जब्त कर लिया गया। ज्वाइंट कमिश्नर, जीएसटी ने डाउनलोड ई-वे बिल के आधार पर झारखंड सेल टैक्स कमिश्नर से संपर्क किया।

उन्होंने झारखंड में उक्त पते पर फर्म की जानकारी ली तो वहां न तो दफ्तर था और न ही इस नाम के अस्तित्व में कोई फर्म संचालित थी। सूचना पर ट्रक को सीज कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। बोगस फर्म पर फर्जी ई-वे बिल की गड़बड़ी का ऐसे पहला मामला सामने आया है।

 

फर्जी ई-वे बिल से पंजाबी व्यापारी को दे रहा था लाभ

जीएसटी नियमों के अनुसार, खरीदे हुए उत्पाद का कर जमा कर इसे आगे वाले को फायदा पहुंचाया जाता है। इस पद्यति को आईटीसी कहते हैं। जैसे, दो लाख रुपये की खरीदारी किसी फर्म ने की तो उसे 18 प्रतिशत का कर जमा करना होगा। लेकिन जिस फर्म को ये दो लाख रुपये में बेचेंगे, वह इसे तीन लाख रुपये में आगे बेचती है तो उसपर उसे तीन लाख रुपये का नहीं, बल्कि एक लाख रुपये का कर देना होगा। पीछे वाली फर्म के आईटीसी की लाभ फर्म को मिला जाता है। ऐसे ही, रांची वाली फर्म ने फर्जी 196 करोड़ रुपये के ई-वे बिल से पंजाब वाली फर्म को लगभग तीन करोड़ रुपये के आईटीसी का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया था।

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू देवममणि शर्मा ने कहा कि रांची से पंजाब के लिए फर्जी ई-वे बिल के जरिए ट्रक से लोहे का कबाड़ भेजने की सूचना मिली थी। टीमों को लगाया गया था। कुशीनगर में संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली गई। जांच-पड़ताल में ई-वे बिल फर्जी पाया गया। माल सहित ट्रक को जब्त कर लिया गया है। पंजाब सरकार के माध्यम से पंजाब की फर्म से 118 प्रतिशत से कर वसूल किया जाएगा।
 
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