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Gorakhpur News: व्हाट्सएप पर आया फर्जी चालान एप, क्लिक करते ही खाते से उड़ गए 89 हजार
Sat, 22 Nov 2025 01:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:41 AM IST
सार
गोविंद ने बताया कि बीते 9 अक्तूबर की शाम को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। इसमें गाड़ी चालान का एक एप लिंक भेजा गया था। गोविंद ने इसे असली चालान समझकर जैसे ही खोलने की कोशिश की, उनका मोबाइल अचानक हैंग हो गया। कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से पांच बार में 89,800 रुपये निकाले जाने का मैसेज आया।
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विस्तार
साइबर ठगी का नया तरीका सामने आया है, जिसमें ठग मोबाइल पर व्हाट्सएप से फर्जी चालान एप भेजकर खाते से रुपये उड़ा रहे हैं। ताजा मामला थाना एम्स क्षेत्र का है, जहां रामगढ़ उर्फ रजही निवासी गोविंद पासवान के मोबाइल पर गाड़ी चालान के नाम पर भेजे गए एप लिंक पर क्लिक करते ही उनके खाते से 89,800 रुपये गायब हो गए।
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पीड़ित की तहरीर पर एम्स पुलिस ने अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
गोविंद ने बताया कि बीते 9 अक्तूबर की शाम को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। इसमें गाड़ी चालान का एक एप लिंक भेजा गया था। गोविंद ने इसे असली चालान समझकर जैसे ही खोलने की कोशिश की, उनका मोबाइल अचानक हैंग हो गया।
कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से पांच बार में 89,800 रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। रकम यूपीआई से पांच बार में निकाली गई। घटना के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही एम्स थाने में तहरीर दी।
कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से पांच बार में 89,800 रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। रकम यूपीआई से पांच बार में निकाली गई। घटना के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही एम्स थाने में तहरीर दी।
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इस संबंध में थानाप्रभारी संजय मिश्रा ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
साइबर अपराधी ऐसे बनाते हैं ठगी के शिकार
साइबर ठग व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिये ट्रैफिक ई- चालान, प्रदूषण फाइन, फास्ट टैग अपडेट जैसे एप या लिंक भेजते हैं। जैसे ही यूजर लिंक खोलता है, फोन में बैकग्राउंड में हानिकारक कोड इंस्टॉल हो जाता है, जिससे मोबाइल हैंग या स्लो दिखता है।
मालवेयर स्क्रीन पढ़ने और ऑटो पेमेंट ट्रिगर करने की क्षमता रखता है। इससे ठग खाते का यूपीआई पिन बायपास कर छोटी-छोटी किस्तों में रुपया निकाल लेते हैं। यहीं नहीं साइबर ठग अब गाड़ी चालान, बिजली बिल, बैंक केवाईसी और सरकारी सब्सिडी अपडेट के नाम पर एप भेजकर ठगी कर रहे हैं।
साइबर ठग व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिये ट्रैफिक ई- चालान, प्रदूषण फाइन, फास्ट टैग अपडेट जैसे एप या लिंक भेजते हैं। जैसे ही यूजर लिंक खोलता है, फोन में बैकग्राउंड में हानिकारक कोड इंस्टॉल हो जाता है, जिससे मोबाइल हैंग या स्लो दिखता है।
मालवेयर स्क्रीन पढ़ने और ऑटो पेमेंट ट्रिगर करने की क्षमता रखता है। इससे ठग खाते का यूपीआई पिन बायपास कर छोटी-छोटी किस्तों में रुपया निकाल लेते हैं। यहीं नहीं साइबर ठग अब गाड़ी चालान, बिजली बिल, बैंक केवाईसी और सरकारी सब्सिडी अपडेट के नाम पर एप भेजकर ठगी कर रहे हैं।