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Gorakhpur News: गोरखपुर के स्कूलों में स्पेनिश, फ्रेंच, कोरियन भाषाएं पढ़ाए जाने की तैयारी

Thu, 28 May 2026 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Thu, 28 May 2026 02:43 AM IST
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Experts say the three-language formula will give careers a new direction.
विशेषज्ञ बोले- त्रि-भाषा फॉर्मूला से कॅरिअर को मिलेगी नई दिशा
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सीबीएसई की तीन भाषा शिक्षा नीति से वैश्विक स्तर पर बढ़ेंगी छात्रों की संभावनाएं




गोरखपुर। सीबीएसई बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 6 से - 9 तक तीन भाषाओं का नियम (त्रि-भाषा फॉर्मूला) अनिवार्य कर दिया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। गोरखपुर के स्कूलों में भी स्पेनिश, फ्रेंच और कोरियन जैसी विदेशी भाषाओं को अतिरिक्त या तीसरी व चौथी भाषा के रूप में पढ़ाने की तैयारियां शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते वैश्विक परिवेश में तीन भाषाओं की शिक्षा विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है।
कॅरिअर काउंसलर पूर्णेंदु शुक्ल का कहना है कि मातृभाषा, राष्ट्रभाषा और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा का ज्ञान बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके अनुसार, बहुभाषी शिक्षा से विद्यार्थी अन्य देशों की संस्कृति, परंपरा और शिक्षा प्रणाली को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। विदेशों में उच्च शिक्षा, शोध और रोजगार के अवसरों के दौरान भाषा का ज्ञान छात्रों के लिए बड़ी ताकत साबित होता है। वहीं, कई देशों में स्थानीय भाषा की समझ होने से संवाद स्थापित करना आसान हो जाता है।
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कोट

सीबीएसई विद्यालयों में हिंदी, अंग्रेजी और विदेशी भाषा में स्पेनिश, फ्रेंच, कोरियन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करना है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल एक भाषा का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बहुभाषीय विद्यार्थी प्रशासन, शिक्षा, तकनीक, पर्यटन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
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- डॉ. सुनीता कोहली, कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई



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बच्चों के लिए ये काफी अच्छा मौका है। पहले क्लास छह तक तीन भाषाएं पढ़ाई जाती थीं लेकिन अब नौवीं के आगे के बच्चों के लिए भी यह जरूरी हो गया है। हालांकि अभी बच्चों व अभिभावकों को इसके फायदे समझाना चुनौतीपूर्ण होगा। इस सत्र से यह नियम लागू कर दिया गया है।




- अजय शाही, चेयरमैन, आरपीएम एकेडमी

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कोट

इससे बच्चों को काफी अच्छा अवसर मिलेगा। बच्चे जो भाषा 12वीं के बाद सीखते हैं अब स्कूली शिक्षा में ही पढ़ सकेंगे। इससे वह अपनी मातृभाषा के साथ अन्य भाषा भी सीख पाएंगे। हमारे विद्यालय में अभी इसकी तैयारी चल रही है। फिलहाल हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत पढ़ाया जा रहा है।

- कनक हरि अग्रवाल, निदेशक, एसएस एकेडमी
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