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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Exclusive interview of Vice Chancellor Pro. Rajesh Singh on financial condition of Gorakhpur University

कुलपति से विशेष बातचीत: गोरखपुर विश्वविद्यालय आर्थिक मजबूती के लिए हाइफा से लेगा तीन सौ करोड़

Wed, 24 Nov 2021 12:52 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 24 Nov 2021 12:52 PM IST
सार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय आमदनी और खर्च के असंतुलन से जूझ रहा है। क्योंकि हर वर्ष की तरह राज्य सरकार से इस वर्ष 30 करोड़ नहीं मिले। ऐसे में वेतन देने के लिए भी एफडी से लोन लेना पड़ा।

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Exclusive interview of Vice Chancellor Pro. Rajesh Singh on financial condition of Gorakhpur University
डीडीयू के कुलपति प्रो. राजेश सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी (हाइफा) से 300 करोड़ रुपये का लंबी अवधि का ऋण लेने की कोशिश में जुटा है। राजभवन में कुलाधिपति के सामने इसका प्रजेंटेशन भी हो चुका है।
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दरअसल, विवि आमदनी और खर्च के असंतुलन से जूझ रहा है। विश्वविद्यालय की कुल वार्षिक आय करीब 100 करोड़ रुपये है, जिसमें 84 करोड़ रुपये तो शिक्षक व कर्मचारियों के वेतन में चला जाता है, जबकि करीब 10 करोड़ रुपये आउटसोर्सिंग कर्मचारी व सिक्योरिटी में खर्च होते हैं। राज्य सरकार से हर वर्ष 30 करोड़ रुपये मिलते हैं, लेकिन इस साल मात्र आठ करोड़ रुपये ही मिले हैं। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारियों को वेतन देने तक में दिक्कत आने लगी है। विश्वविद्यालय की वित्तीय हालत को लेकर कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने खुलकर बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-
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सवाल: जानकारी मिली है कि शिक्षकों-कर्मचारियों को इस माह वेतन देने के लिए विश्वविद्यालय की एफडी पर लोन लेना पड़ा है?
जवाब : जी सही है। दरअसल, प्रत्येक वर्ष राज्य सरकार से 30 करोड़ रुपये मिलते हैं, इस वर्ष सिर्फ आठ करोड़ रुपये ही मिले हैं। 22 करोड़ रिलीज कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा हूं। कुलाधिपति और मुख्यमंत्री से कई बार मिलकर इस बात को रख चुका हूं। विश्वविद्यालय के पास 58 करोड़ की एफडी है। नवंबर महीने में वेतन देने के लिए एफडी पर सात करोड़ को लोन लिया गया है। इसके अलावा कोई और उपाय नहीं था।
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सवाल : 14 महीने पूर्व जब आपने कुलपति के रूप में कामकाज संभाला तब विश्वविद्यालय में वित्तीय स्थिति कैसी थी?
जवाब:
देखिए, विश्वविद्यालय की कुल आय करीब 100 करोड़ रुपये वार्षिक है। आर्थिक संसाधन बढ़ाने के लिए कभी कोई काम नहीं हुआ। जो एक्यूरेट आय थी उसी के भरोसे काम चलता था।

सवाल : वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के लिए आपकी क्या कोई योजना है?
जवाब :
हमने आय के स्रोत बढ़ाने के प्रयास किए हैं। सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू किए, लेकिन आय का 80 फीसदी सेल्फ फाइनेंस के क्षेत्र में ही खर्च होगा। लैब, कक्षाएं सुधारने का उपयोग इससे हो रहा है। यहां सेल्फ फाइनेंस वाले विद्यार्थी अध्ययन करेंगे। इसका लाभ आने वाले दिनों में दिखाई देगा। वहीं विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 रुपये की मामूली वृद्धि की है। इसके अलावा खर्चे कम किए गए हैं। हॉस्टलों में 20 से 25 आउटसोर्सिंग कर्मचारी तैनात किए गए थे, अब पांच-सात लोग वही काम कर रहे हैं। कहीं कोई दिक्कत नहीं है।

सवाल- हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी (हाइफा) से भी कुछ मदद लेने की कोशिशों की बात सामने आई हैं ?
जवाब :
हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी सिर्फ सेंट्रल यूनिवर्सिटी और आईआईटी संस्थानों को ही ऋण देती है। पहली बार कोशिश की जा रही है कि राज्य यूनिवर्सिटी को भी मिले। इसके लिए राजभवन में कुलाधिपति के समक्ष प्रेजेंटेशन हो चुका है। यह राशि अगर मिल जाए तो विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से मजबूत होगा और संसाधन बढ़ जाएंगे। ऐसा होने पर विद्यार्थियों की भी रुचि बढ़ेगी। रोजगार को लेकर और प्लानिंग की जा सकेगी। इससे यहां के विद्यार्थी दूसरी यूनिवर्सिटी नहीं जाएंगे। आय का स्रोत भी बढ़ेगा।

सवाल : केंद्र सरकार से कोई बजट की उम्मीद है क्या?
जवाब :
विश्वविद्यालय को स्पोर्ट्स हब बनाने में लगा हूं। राज्य सरकार के माध्यम से 40 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के पास है। एडवांस स्टेज में है, संभावना है कि इसी वित्तीय वर्ष में बजट मिल जाए। प्रस्ताव के मुताबिक विश्वविद्यालय में हॉकी का एस्ट्रोटर्फ, अंतर्राष्ट्रीय स्वीमिंग पूल, आठ लेन का सिंथेटिक ट्रैक और मल्टीपरपज हॉल बनने हैं।

 
सवाल : शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए क्या प्रयास हुए हैं?
जवाब :
गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जहां नई शिक्षा नीति के मुताबिक पाठ्यक्रमवार पूरा स्ट्रक्चर वेबसाइट पर अपलोड है। जो गाइडलाइन आई थी, उसमें अतिरिक्त कोर्स भी जोड़ा गया है। हर सेमेस्टर में 8-10 विकल्प दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए इसे बनाया गया है।
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