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Gorakhpur News: डीडीयू अपने 64 वर्षों का परीक्षा रिकॉर्ड करेगा डिजिटल
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में वर्ष 2021-22 और उसके बाद के सभी परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड डिजिटली संग्रहित हैं। अब वर्ष 1957 से 2020-21 के भी सभी डेटा संग्रहित करने की योजना है। इस पहल से लाखों पुरातन छात्रों के डेटा हमेशा के लिए डिजिटल रूप से संरक्षित रहेंगे।
किसी भी अभिलेख को कागज के रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में डिजिटलीकरण न केवल अभिलेखों के संरक्षण का आधुनिक उपाय है बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप जरूरी भी है। इससे पुराने परीक्षा अभिलेखों की खोज और सत्यापन प्रक्रिया भी अत्यंत सरल हो जाएगी। वर्तमान में कई बार वर्षों पुराने दस्तावेजों की तलाश में लंबा समय लगता है। डिजिटल व्यवस्था में कुछ ही क्षणों में आवश्यक रिकाॅर्ड उपलब्ध हो सकेंगे।
डीडीयू प्रशासन का मानना है कि डिजिटल अभिलेख व्यवस्था से मार्कशीट या परीक्षा विवरण में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या फर्जीवाड़े की आशंका काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। अंकपत्र में छेड़छाड़ के कई मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। परीक्षा संबंधी सभी रिकॉर्ड डिजिटल हो जाने से यह आशंकाएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी।
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इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि वर्ष 1957 से 2020-21 तक के परीक्षा संबंधी सभी डेटा डिजिटल रूप से संरक्षित किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इससे कोई भी जानकारी कुछ ही क्षण में आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। छेड़छाड़ की आशंकाएं भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
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किसी भी अभिलेख को कागज के रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में डिजिटलीकरण न केवल अभिलेखों के संरक्षण का आधुनिक उपाय है बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप जरूरी भी है। इससे पुराने परीक्षा अभिलेखों की खोज और सत्यापन प्रक्रिया भी अत्यंत सरल हो जाएगी। वर्तमान में कई बार वर्षों पुराने दस्तावेजों की तलाश में लंबा समय लगता है। डिजिटल व्यवस्था में कुछ ही क्षणों में आवश्यक रिकाॅर्ड उपलब्ध हो सकेंगे।
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डीडीयू प्रशासन का मानना है कि डिजिटल अभिलेख व्यवस्था से मार्कशीट या परीक्षा विवरण में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या फर्जीवाड़े की आशंका काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। अंकपत्र में छेड़छाड़ के कई मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। परीक्षा संबंधी सभी रिकॉर्ड डिजिटल हो जाने से यह आशंकाएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी।
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इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि वर्ष 1957 से 2020-21 तक के परीक्षा संबंधी सभी डेटा डिजिटल रूप से संरक्षित किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इससे कोई भी जानकारी कुछ ही क्षण में आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। छेड़छाड़ की आशंकाएं भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।