खोराबार टाउनशिप लिए हटाया जा रहा अतिक्रमण: लाल निशान लगते ही उड़ जाती है नींद, सुबह तोड़फोड़ मचाता है बुलडोजर
गाेरखपुर-देवरिया रोड पर जंगल सिकरी बाईपास से करीब एक किलोमीटर आगे जाने पर बाईं तरफ जीडीए की योजना के लिए भूमि अधिग्रहित की गई है। इसमें जंगल सिकरी और सैनिक नगर कॉलोनी शामिल है, जहां पर 25 से 30 साल पुराने रिहायशी, पक्के मकान बने हुए हैं।
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खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना में आवासीय भूखंडों और फ्लैटों के निर्माण का काम जल्द ही शुरू होगा, लेकिन इसको लेकर हो रही तोड़फोड़ ने यहां पहले से बसे लोगों की नींद उड़ा दी है। 24 घंटे पहले प्रशासन की टीम लाल निशान लगाती है और फिर सुबह से बुलडोजर तोड़फोड़ मचाता है। कार्रवाई शुरू होने से मकान मालिकों में अफरा-तफरी है। अपना आशियाना बचाने के लिए वे अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगा रहे हैं।
इलाके में जाने पर लोगों में जीडीए की कार्रवाई का खौफ साफ नजर आता है। जिनके घर पर लाल निशान लग गए हैं, वे हताश दिखते हैं। पूछिए तो बस यही कहते हैं- खाली पड़ी भूमि का उचित मुआवजा देकर जीडीए अपनी योजना बसाए। पहले से बने पक्के रिहायशी मकानाें को न तुड़वाए। इसके बदले में विकास शुल्क लेकर हमें भी यहां रहने दें। अगर बसाने वाले ही उजाड़ेंगे तो लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
गाेरखपुर-देवरिया रोड पर जंगल सिकरी बाईपास से करीब एक किलोमीटर आगे जाने पर बाईं तरफ जीडीए की योजना के लिए भूमि अधिग्रहित की गई है। इसमें जंगल सिकरी और सैनिक नगर कॉलोनी शामिल है, जहां पर 25 से 30 साल पुराने रिहायशी, पक्के मकान बने हुए हैं। अब इन मकानों के टूटने की नौबत आ गई है। बाईपास से कॉलोनी की ओर मुड़ने पर मनोज का मकान है। वह इसमें जनरल स्टोर्स की दुकान खोलकर आजीविका चलाते हैं। बृहस्पतिवार की दोपहर 12.35 बजे उनके दुकान के सामने दुर्गविजय, कमलेश राय, संदीप मौर्या आदि बैठे थे।
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सामने एक चहारदीवारी पर लगे लाल निशान देखकर उनसे पूछा गया तो सबके चेहरे रुआंसे हो गए। मनोज सिंह ने कहा- 20-25 साल पुराना मकान है हमारा, टूट जाएगा तो हम कहां जाएंगे। तभी बुजुर्ग दुर्गविजय सिंह अचानक उठकर बगल के मकान में चले गए। वह काफी पुराने कागज लेकर आए। दिखाते हुए बोले कि 22 नवंबर 2003 को अधिग्रहण के पूर्व का मकान बना हुआ है। अब जीडीए सब पर बुलडोजर चलाएगा। हम लोग अपना परिवार लेकर कहां जाएंगे।
बेघर होने की चिंता, बात रखते हुए फफक पड़े दुर्गविजय
दुर्गविजय ने कहा कि 400 से अधिक पक्के मकान बने हुए हैं। हम लोगों ने अपने जीवनभर की पूंजी लगाकर घर बनाया है। इसमें हमारे बेटे-बहू, नाती-पोते सभी रहते हैं। अब जीडीए वाले कह रहे हैं कि तोड़ा जाएगा। वे अचानक आकर लाल निशान लगा दे रहे हैं। फिर 24 घंटे में तोड़फोड़ कर दे रहे हैं। हमारे घर पर बुलडोजर चलेगा तो हम कहां जाएंगे। बारिश का मौसम है। यह तो सरासर जुल्म है। इतना कहते हुए दुर्गविजय का गला रुंध गया। वे फफक पड़े।
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उनको सांत्वना देते हुए कमलेश राय ने कहा कि चुप हो जाइए, हम लोग सबसे मिलेंगे। अब सीएम योगी आएंगे तो उनके पास भी चलेंगे। इस दौरान वहां पहुंचीं संध्या ने अपने मकान की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां देखिए, हमारा मकान है। कोई नोटिस नहीं मिला है। पता चला है कि हमारा मकान भी तोड़ देंगे। मई महीने में महराजजी को पत्रक दिया गया था। तब उन्होंने कहा था किसी का मकान नहीं टूटेगा।
तब कब्जा नहीं लिया, अब तोड़ेंगे मकान
सैनिक नगर कॉलोनी में हरिशरन गुप्ता का निवास है। यहां पेड़ के नीचे हरिशरण गुप्ता, विकास पांडेय, पंकज त्रिपाठी, विजय नारायण मिश्र और सुधीर मिश्रा बात कर रहे थे। उन लोगों को लगा कि जीडीए कर्मचारी आ गए हैं। इससे लोग शांत हो गए। बाद में परिचय जानने के बाद लोगों ने बातचीत शुरू की।
अधिवक्ता रामदरस प्रसाद ने कहा कि विकास प्राधिकरण ने नियमानुसार तब कब्जा नहीं लिया। अब जबरन मकान ढहाने पर आमादा हैं। बुजुर्ग हरिशरन बोले, हमारा मकान तो 2002 में बना हुआ था। हमारे बाद पूरी कॉलोनी बसी है। अभिषेक शर्मा ने कहा कि यहां पर नगर निगम की सुविधाएं मिल रही हैं।
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कूड़ा उठाने के लिए उनकी गाड़ी आती है। आरसीसी सड़क बनी हुई है। वीरेंद्र ने बताया कि जीडीए के अधिकारी कुछ स्पष्ट नहीं कर रहे। हमें उजाड़ने के बजाय विकास शुल्क लेकर नियमित कर दें। यदि यहां निर्माण कराना गलता था तो पहले ही रोक दिए होते। धीरे-धीरे आसपास की महिलाएं भी पहुंच गईं। हर किसी के माथे पर मकान आशियाना उजड़ने की चिंता नजर आ रही थी।
लोगों से बातचीत के दौरान पता चला कि जीडीए अधिकारियों ने लोगों को तीन विकल्प सुझाए हैं। अधिकारियों की ओर से कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने मकान बनवा लिए हैं, वे लोग मुआवजा ले लें। उनको सस्ते दर पर योजना में भूखंड उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
लोगों ने क्या कहा
मनोज सिंह ने कहा कि जीडीए दूसरे का घर बसाएगा। हमारा तोड़ देगा। यह कहां का इंसाफ है। जो जुर्माना लगाना है, लगा लें। लेकिन हम लोगाें को नियमित कर दें। हम लोग शुल्क देने को तैयार हैं। बरसात के मौसम में मकान टूटने पर बच्चों को लेकर कहां जाएंगे।
संध्या शर्मा ने कहा कि जमीन खरीदकर मकान बनवाया गया। 20 साल से रह रहे हैं। लेकिन अब जीडीए के लोग आकर लाल निशान लगा दे रहे हैं। उनके कर्मचारी बोल रहे थे कि खाली करना पड़ेगा।
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कमलेश राय ने कहा कि गाढ़ी कमाई से हम लोगों ने मकान बनवाए हैं। मकान के अलावा कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। किसी ने 1998 तो किसी ने उसके पहले मकान बनाया था। अधिकारी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
संदीप मौर्या ने कहा कि हम लोगों ने विधायक और सांसद से मिलकर अपनी बात रखी है। हम लोगाें के मकानों को जीडीए नियमित कर दे। खाली पड़ी जमीनों का उचित मुआवजा दे। जो मुआवजा लेकर मकान बनाए हैं, उन पर कार्रवाई करें।
रामदरस प्रसाद ने कहा कि जीडीए को यह प्रबंध करना चाहिए कि जो जमीन उसकी जद में है, उनका बैनामा और खारिज दाखिल न हो सके। अधिकांश लोगों को पहले से कोई जानकारी नहीं होती है। 20 साल बाद घर छोड़कर कोई कहां जाएगा।
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सांसद से मिलकर लगाई मदद की गुहार
जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना पर काम चल रहा है। इसकी जद में आ रहे मकानों को खाली करने के संबंध में लोगों से बातचीत हुई है। उनको कुछ विकल्प सुझाए गए हैं। इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मामले पर विचार किया जा रहा है। जो भी फैसला लिया जाएगा, उससे जल्द ही अवगत कराया जाएगा।