बिजली निगम: एडजस्ट कॉलम को खत्म किया, जूझ रहे उपभोक्ता
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने कहा कि बिल में गड़बड़ी और हेरफेर को देखते हुए पावर कारपोरेशन की तरफ से एडजस्ट कॉलम को खत्म किया गया है। इससे गलत तरीके से बिजली बिल निस्तारण नहीं हो सकेगा। अभी ऐसी शिकायत नहीं मिली है।
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बिजली निगम ने बिलिंग व्यवस्था में एडजस्ट कॉलम (सुधार) खत्म कर दिया है। इसके तहत अब सिस्टम उपभोक्ता की आईडी से सीधे बिजली बिल बना देगा। मैनुअल बिजली बिल बनाए जाने और संशोधन किए जाने की सुविधा खत्म हो गई है। इससे उपभोक्ताओं को बहुत परेशानी हो रही है।
अभियंताओं ने बताया कि स्वीकृत किलोवाट के हिसाब से सिस्टम अब खुद बिजली बिल बना देगा। जैसे, दो किलोवाट का बिजली बिल है। मीटर रीडर यूनिट के हिसाब से बिजली बिल बना देगा। सिस्टम में ये दर्ज हो जाएगा। किलोवाट और रीडिंग यूनिट की खपत के हिसाब से कनेक्शन संख्या पर प्रतिमाह बिजली बिल बन जाएगा। इसमें अगर गड़बड़ी होगी तो पहले की तरह लिपिक उसमें सुधार नहीं कर सकेंगे।
ऐसे ही, मीटर बदलने पर बिल में काफी गड़बड़ी हो रही है। जैसे रोहित अपने घर में दो किलोवाट का बिजली कनेक्शन लिए हैं। मीटर में दो हजार रीडिंग का बिजली बिल उन्होंने जमा कर दिया। मीटर खराब होने पर दूसरा मीटर लगवाया और बिजली बिल बना तो 2400 यूनिट रीडिंग खपत का बिल बन गया, जबकि नियम के अनुसार नए मीटर में खपत हुए 400 यूनिट का ही बिजली बिल बनना था। एडजस्ट व्यवस्था खत्म होने से विभाग के कर्मचारी भी इसे सही नहीं कर पा रहे। सिस्टम की गड़बड़ी से नए मीटर में शून्य से रीडिंग लेकर पूरे 2400 यूनिट रीडिंग खपत का बिजली बिल बना दिया।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने कहा कि बिल में गड़बड़ी और हेरफेर को देखते हुए पावर कारपोरेशन की तरफ से एडजस्ट कॉलम को खत्म किया गया है। इससे गलत तरीके से बिजली बिल निस्तारण नहीं हो सकेगा। अभी ऐसी शिकायत नहीं मिली है।
मीटर रीडर बना रहे गलत बिजली बिल
बिजली बिल में मीटर रीडर की तरफ से गलत बिजली बिल बनाए जाने से उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है। मीटर रीडर घर बैठे ही मनमाने तरीके से उपभोक्ताओं के बिल बना रहे। ये शिकायत लगातार अभियंताओं को मिल रही।
अधीक्षण अभियंता शहरी ने इसे लेकर बिलिंग एजेंसी की फर्म को भी पत्र लिखा था, लेकिन सुधार नहीं हुआ है। शुक्रवार को टाउनहाल उपकेंद्र पर राहुल गए थे। मोबाइल की रिकार्डिंग लेकर आए थे। इसमें मीटर रीडिंग 2300 यूनिट थी, जबकि बिजली बिल 7200 रीडिंग की खपत पर बना था। ऐसे में बिजली बिल सही करवाने के लिए दौड़ रहे थे।
केस 1
मोहद्दीपुर के गौतम यादव के परिसर में लगा मीटर खराब हो गया था। समय से वह बिजली बिल का भुगतान करते थे। नया मीटर लगने के बाद 8200 यूनिट पर बिजली बिल बन गया था। पुराने बदले गए मीटर में चली आठ हजार यूनिट रीडिंग तक का बिजली बिल का भुगतान वो पहले ही कर चुके थे। इस महीने उन्हें 200 यूनिट बिजली बिल का ही भुगतान करना था।
केस 2
राप्तीनगर के शशांक ने चार महीने पहले बिजली कनेक्शन लिया था। पिछले महीने मीटर में तकनीकी गड़बड़ी हो गई, जिससे गलत बिजली बिल बन गया। उपखंड दफ्तर पहुंच उन्होंने अपना बिजली बिल सही करवाया और 3100 रीडिंग का भुगतान किया। नया मीटर लगने के बाद इस महीने उनके पास 3400 यूनिट खपत का बिजली बिल आ गया।