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गोरखपुर इलेक्ट्रिक बस: धूप-बारिश झेली, अब सर्दी झेलने के लिए भी रहें तैयार
Mon, 02 Oct 2023 12:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Updated Mon, 02 Oct 2023 12:54 PM IST
सार
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन महानगर के नौ रूटों पर हो रहा है। इन रूटों पर 300 से अधिक स्टॉपेज निर्धारित किए गए हैं। लेकिन ये सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। किसी भी स्टॉपेज पर जिम्मेदारों ने न कहीं शेड लगाया और न कोई बोर्ड। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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ई-बस गोरखपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर में इलेक्ट्रिक बसों से सफर करने वाले यात्री धूप, बारिश तो झेल लिए अब सर्दी भी झेलने के लिए तैयार रहें। करीब दो वर्षाें से स्टॉपेज पर शेड के अभाव में लोग इस समस्या को झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों को इन्हें होने वाली इस परेशानी से कोई वास्ता नहीं है। इलेक्ट्रिक बस संचालन समिति के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एक वर्ष पहले नगर निगम को शेड लगाने का प्रस्ताव भेजकर भूल गए।
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दोपहर करीब के 12:30 बजे पैडलेगंज चौराहे पर इलेक्ट्रिक बस के इंतजार में कई यात्री खड़े थे। इस बीच गोरखनाथ मंदिर जाने के लिए अनिकेत 10 मिनट से बस का इंतजार कर रहे थे। तेज धूप में पसीना उनके माथे से टपक रहा था। जैसे ही नौसड़ की ओर से आ रही इलेक्ट्रिक बस पैडलेगंज चौराहे पर आकर रुकी अनिकेत के चेहरे पर सुकून दिखा और वह झट से बस में चढ़ गए। उनके पीछे अन्य लोग भी एक-एक कर बस में चढ़ते नजर आए।
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दोपहर करीब 1:45 बजे गोलघर काली मंदिर पर तेज धूप में पिपराइच जाने के लिए प्रवीण 45 मिनट से बस का इंतजार कर रहे थे। लेकिन उन्हें बस नहीं मिली, जिसके बाद वह सड़क की दूसरी ओर जाकर छांव में खड़े होकर बस का इंतजार करने लगे। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज रोड पर जाने के लिए आशीष भी बस का इंतजार करते हुए नजर आए। आशीष ने बताया कि वह आधे घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बस नहीं आई। अब ऑटो से मेडिकल कॉलेज जा रहा हूं।
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इलेक्ट्रिक बसों के हैं 300 से अधिक स्टॉपेज
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन महानगर के नौ रूटों पर हो रहा है। इन रूटों पर 300 से अधिक स्टॉपेज निर्धारित किए गए हैं। लेकिन ये सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। किसी भी स्टॉपेज पर जिम्मेदारों ने न कहीं शेड लगाया और न कोई बोर्ड। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महानगर के 40 बस स्टाॅपेज पर शेड लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, लेकिन अभी इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी शेड लगवा दिए जाएंगे। - पीके तिवारी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इलेक्ट्रिक बस संचालन समिति।
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इलेक्ट्रिक बस कभी समय पर नहीं आती है। बस के लिए कभी-कभी घंटे भर से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, बसों के इंतजार के दौरान धूप में खड़ा होना पड़ता है। - दिलीप कुमार, पिपराइच
इलेक्ट्रिक बस में सफर काफी आरामदायक है, लेकिन बसों का इंतजार करने में हालत बिगड़ जाती है। जिम्मेदारों ने धूप और बारिश से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। - आदित्य, मेडिकल रोड
बसें कम होने से काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ता है। बारिश और गर्मी में बसों को पकड़ने में ज्यादा दिक्कत होती है। शेड के इंतजाम की आवश्यकता है। - दीप प्रकाश, गोरखनाथ।
महानगर के 40 बस स्टाॅपेज पर शेड लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, लेकिन अभी इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी शेड लगवा दिए जाएंगे। - पीके तिवारी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इलेक्ट्रिक बस संचालन समिति।
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इलेक्ट्रिक बस कभी समय पर नहीं आती है। बस के लिए कभी-कभी घंटे भर से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, बसों के इंतजार के दौरान धूप में खड़ा होना पड़ता है। - दिलीप कुमार, पिपराइच
इलेक्ट्रिक बस में सफर काफी आरामदायक है, लेकिन बसों का इंतजार करने में हालत बिगड़ जाती है। जिम्मेदारों ने धूप और बारिश से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। - आदित्य, मेडिकल रोड
बसें कम होने से काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ता है। बारिश और गर्मी में बसों को पकड़ने में ज्यादा दिक्कत होती है। शेड के इंतजाम की आवश्यकता है। - दीप प्रकाश, गोरखनाथ।