गोरखपुर में भूकंप: पहले खुद हुए सुरक्षित, फिर करीबियों का जाना हाल
भूकंप की दहशत सबसे ज्यादा बहुमंजिली इमारतों में रहने वालों में देखी गई। भूकंप में लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत की वजह से लोग सीढि़यों से नीचे की ओर भागे। हालांकि भूकंप चंद सेकंड का होने की वजह से लोगों ने राहत की सांस ली।
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भूकंप के दो झटके पर पहले तो लोग खुद सुरक्षित स्थान पर पहुंचे, फिर परिचित और रिश्तेदारों का फोन करने की होड़ दिखी। संदेश के टोन फोन पर लगातार बजते रहे। अपनों की खैरियत जानने के बाद लोगों ने चैन की सांस ली। जिन घरों में बुजुर्ग चलने में असमर्थ रहे वहां का दृश्य बैचेन करने वाला दिखा। परिजन मदद के लिए पड़ोसियों से भी गुहार लगाते रहे। पड़ोसियों ने ऐसे लोगों की खूब मदद की।
भूकंप की दहशत सबसे ज्यादा बहुमंजिली इमारतों में रहने वालों में देखी गई। भूकंप में लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत की वजह से लोग सीढि़यों से नीचे की ओर भागे। हालांकि भूकंप चंद सेकंड का होने की वजह से लोगों ने राहत की सांस ली। मगर, सबके अंदर डर जरूर रहा कि फिर दोबारा यह झटका न आ जाए।
पिछली बार आए भूकंप की याद लोगों के जेहन में ताजा होने की वजह से लोग काफी देर तक घर को छोड़कर खाली मैदान में नजर आए।
बच्चों की आ गई मस्ती
भूकंप की त्रासदी से अनजान बच्चों के लिए मस्ती का समय था। वह खुले मैदान में रात में खुद को पाकर खेलने लगे। घरवाले भी उन्हें कुछ नहीं बोल रहे थे। वहीं, इन तनावभरे इस माहौल में बच्चों को खेलते देख बड़े कुछ सुकून महसूस कर रहे थे।
अचानक कुत्ते भौंकने लगे
भूकंप आने से चंद मिनट पहले ही जानवरों से पूरा इलाका गूंज गया था। शिवपुरी के अमित दुबे बताते हैं, वह खाना खाने के बाद घर के बाहर टहलने निकले थे। अचानक कुत्ते भौंकने लगे। पहले तो समझ में नहीं आया कि उन्हें ऐसा क्या हो गया। लेकिन जब भूकंप आया तो पुरखों की बात याद आ गई कि कोई भी अनहोनी की जानकारी जानवरों को पहले हो जाती है।