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एक परिवार में सांसद, विधायक और मंत्री: निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का कद बढ़ा, योगी सरकार में बने कैबिनेट मंत्री

Sat, 26 Mar 2022 12:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Mar 2022 12:23 PM IST
सार

डॉ. संजय निषाद योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, बेटे प्रवीण निषाद भाजपा सांसद तो सरवन निषाद विधायक हैं। निषाद परिवार में मंत्री, सांसद और विधायक तीनों हैं।

 

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Dr Sanjay Nishad became cabinet minister in Yogi government
डॉ. संजय निषाद। - फोटो : amar ujala

विस्तार

योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री व निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का राजनीतिक कद बड़ा हो गया है। वह भाजपा के सहयोग से कम समय में राजनीति के शिखर पर पहुंच गए। खुद मंत्री हैं। बेटे प्रवीण निषाद संतकबीरनगर से भाजपा सांसद व छोटे बेटे सरवन निषाद चौरीचौरा से भाजपा विधायक बन गए हैं। इसपर निषाद समाज ने खुशी जताई है। पादरीबाजार स्थित कैंप कार्यालय पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न भी मनाया गया है।

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उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद निषाद पार्टी की ताकत बढ़ी है। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सांसद का पद छोड़ दिया। लिहाजा, 2018 में उपचुनाव कराया गया। गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता था, इसलिए कद्दावर नेता उपेंद्र दत्त शुक्ला को चुनाव मैदान में उतारा गया। इसी बीच राजनीतिक उठापटक हुई और समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी से गठबंधन कर लिया। साथ ही निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बना दिया। उपचुनाव के नतीजे आए तो देश की राजनीति में हलचल मच गई।
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भाजपा प्रत्याशी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा, लेकिन यह सिलसिला बहुत ज्यादा समय तक नहीं चला। 2019 के चुनाव से पहले निषाद पार्टी ने भाजपा से गठबंधन कर लिया। निषाद पार्टी के महत्व को समझते हुए ही भाजपा ने गोरखपुर शहर से सांसद प्रवीण निषाद को संतकबीरनगर से चुनाव मैदान में उतार दिया।
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नतीजा रहा कि डॉ. संजय के बेटे प्रवीण निषाद भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंच गए। 2022 के चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने डॉ. संजय निषाद को एमएलसी बना दिया और निषाद पार्टी को प्रमुख सहयोगी दल बना लिया। भाजपा ने टिकट देकर डॉ. संजय के बेटे सरवन निषाद को चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतार दिया। सरवन चुनाव जीतकर लखनऊ पहुंच गए। अब विधायक हैं।  

 

कसरवल कांड से चर्चा में आए डॉ. संजय

गोरखपुर-संतकबीरनगर के बॉर्डर पर कसरवल के पास निषाद आरक्षण को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। तब सपा सरकार थी। प्रदर्शन के दौरान ही गोली चली और एक शख्स की मौत हो गई। इस मामले में डॉ. संजय निषाद ने प्रमुखता से उठाया। इसी घटना के बाद वह चर्चा में आ गए।  

राजनीति से पहले क्लिनिक चलाते थे डॉ. संजय निषाद

राजनीति में आने से पहले डॉ. संजय निषाद गोरखपुर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी की क्लीनिक चलाते थे। 2002 में पूर्वांचल मेडिकल इलेक्ट्रो होम्योपैथी एसोसिएशन बनाया। इस विधि को मान्यता दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए थे।

संगठन बनाकर राजनीति में कूदे

डॉ. संजय राजनीति में लंबे समय से हैं। वह 2008 में बामसेफ से जुड़े थे। इसी बीच उन्होंने ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनोरिटी वेल्फेयर मिशन और शक्ति मुक्ति महासंग्राम नाम के दो संगठन बनाए। निषाद पार्टी के गठन से पहले निषाद एकता परिषद बनाई और यहीं से मछुआ समुदाय को एक पहचान दिलाने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने मछुआ समुदाय की 553 जातियों को एक मंच पर लाने की मुहिम शुरू की है।

दो चुनावों में मिली थी हार

कैंपियरगंज से पहली बार विधानसभा का चुनाव भी लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा था। 2017 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी व पीस पार्टी के बीच गठबंधन हुआ। दोनों पार्टियों ने उत्तर प्रदेश की 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था। भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से निषाद पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली थी। डॉ. संजय निषाद ने गोरखपुर ग्रामीण से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में डॉ. संजय को 34,869 वोट मिले थे। इसके बावजूद चुनाव हार गए।

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