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Gorakhpur News: शक, तलाक और कोर्ट केस....14 माह में बिखर गया परिवार

Fri, 05 Sep 2025 01:53 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Sep 2025 01:53 AM IST
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Doubt, divorce and court case....the family fell apart in 14 months
ममता।
ममता हत्याकांड : परिजन, रिश्तेदार और प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई दंपती में विवाद की दास्तां
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14 माह पहले गुलरिहा थाने में हुई थी पंचायत



पादरी बाजार (गोरखपुर)। शक, तलाक और कोर्ट केस। इन तीनों वजहों ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाही की ओर धकेल दिया। बुधवार शाम शाहपुर थाना क्षेत्र में ममता चौहान (35) की हत्या के बाद परिजन, रिश्तेदार और प्रत्यक्षदर्शियों ने जाे दास्तां सुनाई, उसका लब्बोलुआब तो यही है।



14 महीने पहले शक में शुरू हुए पारिवारिक कलह फिर तलाक के विवाद ने आखिरकार ममता की जान ले ली। पति विश्वकर्मा पत्नी ममता की हत्या के बाद अब सलाखों के पीछे है। इस पूरे विवाद की शिकार एक 13 वर्षीय बच्ची है जिसके सिर से माता-पिता का साया छीन चुका है।
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ममता अपनी 13 वर्षीय बेटी मुक्ति चौहान के साथ पादरी बाजार के किराए के मकान में रहती थीं। वह बैंक रोड स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर बेटी के भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थीं। पड़ोसियों का कहना है कि ममता हंसमुख और जिम्मेदार महिला थीं लेकिन घर की लड़ाई और कोर्ट केस ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया था। वहीं रिश्तेदारों ने बताया कि करीब 14 महीने पहले परिवार का विवाद इतना बढ़ गया था कि गुलरिहा थाने में पंचायत करनी पड़ी थी।
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इसके बाद ममता अपने ससुराल से सारा सामान लेकर पादरी बाजार स्थित पप्पू कटरा में किराए के मकान में रहने लगीं। छह महीने पहले उन्होंने फैमिली कोर्ट में बेटी के पालन-पोषण और खर्चे का दावा किया। रिश्तेदारों के मुताबिक, कोर्ट केस के दौरान विश्वकर्मा ममता के पास गया था लेकिन ममता ने सुरक्षा के लिए किसी युवक की मदद से विश्वकर्मा की पिटाई करा दी थी। इसके बाद अपना क्वार्टर बदलकर गीता वाटिका में रहना शुरू किया। बावजूद इसके, विश्वकर्मा लगातार उसके पीछे पड़ा रहा। उसकी जानकारी लेने लगा था।



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प्रत्यक्षदर्शी बोले- स्टूडियो के बाहर आरोपी कर रहा था इंतजार



वारदात के वक्त प्रत्यक्षदर्शियों अशरफ और लकी ने बताया कि विश्वकर्मा स्टूडियो के सामने बाइक पर बैठकर पत्नी का इंतजार कर रहा था। जब ममता बाहर निकलीं तो दोनों के बीच बहस के बाद धक्का-मुक्की हुई। इस बीच गुस्से में आकर विश्वकर्मा ने पिस्टल निकालकर ममता पर दो गोलियां चला दीं। एक गोली उनके सीने में लगी और दूसरी हाथ में लगी।



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मां को खोने के बाद अकेली पड़ गई मासूम



ममता की बेटी मुक्ति ने अपनी मां को खो दिया और पिता के खिलाफ कानूनी लड़ाई में अकेली पड़ गई। पड़ोसियों ने बताया कि ममता हमेशा अपने परिवार और बेटी के भविष्य के लिए लड़ती रहीं लेकिन तलाक और रुपयों के विवाद ने उनके जीवन को भयावह मोड़ पर ला दिया। पूरे इलाके में शोक और डर का माहौल है। यह घटना याद दिलाती है कि पारिवारिक कलह, शक, तलाक और रुपयों के झगड़े कैसे किसी की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल सकते हैं।



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लुधियाना से आ रहे मायके वाले



ममता की 13 वर्षीय बेटी मुक्ति इस खौफनाक दृश्य की सीधी गवाह रही। उसने पुलिस को तहरीर दी कि पिता ने उसकी मां को मार डाला। पड़ोसियों का कहना है कि बेटी अब पूरी तरह टूट चुकी है और मां की यादें उसे हर पल सताती हैं। मृतका के मायके वाले लुधियाना से शहर आ रहे हैं। उनके आने के बाद वह अपने मामा के साथ लुधियाना चली जाएगी।




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चार भाइयों में सबसे छोटा है हत्यारोपी



आरोपी विश्वकर्मा चार भाइयों धर्मेंद्र चौहान, राजेश चौहान और बबलू के बाद सबसे छोटा है। तीनों भाई अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं। जबकि विश्वकर्मा अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ घर पर रहता था। उसके पिता रेलवे कारखाने से लगभग 12 साल पहले रिटायर हुए थे। बुजुर्ग पिता ने बताया कि कुछ माह पहले विश्वकर्मा चौहान ने अपने हिस्से की जमीन पिता से रजिस्ट्री कराने के बाद करीब 35 लाख रुपये में बेच दी थी। ममता को जब इसकी जानकारी हुई तो वह रुपये की मांग करने लगी थीं। इसके बाद से विवाद और बढ़ गया था।
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