गोरखपुर: हर माह चार हजार से अधिक लोगों को काट रहे कुत्ते, यहां देखें आंकड़े
बीआरडी में 25 मरीजों को एआरवी के साथ इम्युनोग्लोबुलिन भी लगाना पड़ रहा, कोरोना की दूसरी लहर के बाद बदल गया है कुत्तों का व्यवहार, हो गए आक्रामक।
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गोरखपुर जिले में हर माह औसतन चार हजार से अधिक लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। आलम यह है कि हर दिन करीब 150 मरीज जिला अस्पताल में एआरवी (एंटी रेबीज वैक्सीन) लगवाने पहुंच रहे हैं जबकि बीआरडी में करीब 25 मरीजों को एआरवी के साथ इम्युनोग्लोबिन लगाना पड़ रहा है। जानकार बता रहे हैं कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद कुत्तों के व्यवहार में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि कुत्ते अब ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। अनलॉक में कुत्तों को पहले की अपेक्षा भोजन कम मिल रहा है। इस वजह से कुत्तों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज ज्यादा आ रहे हैं। कोरोना कर्फ्यू के अनलॉक में रोजाना तकरीबन 150 मरीज वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं।
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि यदि मरीज एआरवी नहीं लगवाते हैं, तो वह अपनी जान से खेल रहे हैं। कुत्तों के काटने का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता जाता है। ऐसे में मरीज के शरीर में क्या परिवर्तन हो जाए यह किसी को नहीं पता। इसलिए कुत्तों के काटने पर तत्काल टीका जरूर लगवाना चाहिए।
वैक्सीन की कमी नहीं
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त संख्या में है। एक व्यक्ति को चार एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। इसमें जिस दिन कुत्ते ने काटा हो उस दिन, तीसरे दिन, सातवें और 28वें दिन वैक्सीन लगाने की जरूरत होती है। आमतौर पर 0.25 प्रतिशत कुत्ते ही रैपिड होते हैं, जिनके काटने से रेबीज होता है। पालतू कुत्तों के काटने से रेबीज की आशंका न के बराबर होती है। पालतू कुत्तों को पहले ही एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा दी जाती है।
केवल बीआरडी में लगता है इम्युनोग्लोबुलिन
एसआईसी ने बताया कि इम्युनोग्लोबुलिन केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लगता है। इसके एक वायल की कीमत दो हजार के आसपास है। इसकी सप्लाई शासन से केवल मेडिकल कॉलेजों में की जाती है। जबकि इम्नोग्लोबोलीन लगवाने के लिए हर दिन 20 से 25 लोग जिला अस्पताल पहुंचते हैं। यह ऐसे मरीजों को लगाया जाता है, जो बेहद गंभीर श्रेणी में आते हैं।