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डॉक्टर्स डे विशेष: चिकित्सक के जज्बे से बदली इस अस्पताल की सूरत, कहानी जानकर आप भी करेंगे गर्व
Thu, 01 Jul 2021 03:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 01 Jul 2021 03:58 PM IST
सार
अस्पताल के भवन से लेकर सेवाओं तक में किया सुधार। अब सीएचसी श्रेणी में शामिल हो चुकी है पीएचसी।
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प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अश्विनी चौरसिया ने बदली भटहट पीएचसी की तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
कोविड के कठिन दौर में एक चिकित्सक के जज्बे ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को न केवल कायाकल्प का खिताब दिलवाया, बल्कि अस्पताल की सूरत भी बदल दी। कायाकल्प के लिए मूल्यांकन भी कोरोना प्रोटोकॉल के बीच हुआ और पहले ही प्रयास में 83.1 फीसदी के जनपद स्तर पर सर्वाधिक अंक के साथ यह अवार्ड जीत लिया। अब इस पीएचसी की पहचान सीएचसी के तौर पर होती है और सीएचसी भटहट की पहचान हैं, वहां के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अश्विनी चौरसिया।
जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित भटहट सीएचसी कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हुआ करता था। केंद्र की छत पर जमी गंदगी से ऐसा जलजमाव होता था कि बरसात के दिनों में दिवारों की सीलन से मरीज, चिकित्सक, कर्मचारी परेशान थे। इस बीच डॉ. अश्विनी चौरसिया को केंद्र की जिम्मेदारी दी गई तो उन्होने एक-एक करके अस्पताल की सूरत बदल दी।
डॉ. चौरसिया ने सबसे पहले अस्पताल की छत पर जमा गंदगी को साफ करवाते हुए ऑयल पेंटिंग करवाई गई और पूरी इमारत का रंग-रोगन करवाया गया। अस्पताल में छह इंटरकॉम, 14 सीसीटीवी कैमरे, सरकारी बजट से सभी कमरे के लिए नई आलमारी, सभी कमरों के लिए नए फर्नीचर लगवाए गए। एक बड़ा सुलभ शौचालय भी बनवाया। ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (बीपीएमयू) कक्ष को कार्पोरेट ऑफिस जैसी सूरत दी गई है।
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अस्पताल में पहले दो बेड का इमर्जेंसी वार्ड था, लेकिन उन्होंने इसे तीन बेड का करवाया। इनके प्रयास की वजह से महिला ओपीडी, ईटीसी, ड्रेसिंग एंड इंजेक्शन रूम के मरीजों के लिए अलग से वेटिंग एरिया बनाया गया है।
लेबर वार्ड के पास में ही सैनेट्री पैड की मशीन लगवाई गई। जहां से बिना किसी से मांगे सैनेटरी पैड प्राप्त किया जा सकता है। जबकि, शौचालय के पास इमीनेटर सैनिटरी पैड मशीन लगवाई गई, जहां यूज किए जा चुके पैड को नष्ट किया जाता है।
लेबर वार्ड के बगल में कंगारू मदर केयर (केएमसी) वार्ड बनाया गया, जहां स्टाफ प्रसूताओं को प्रशिक्षित कर सुविधा देता है। 35 किलोमीटर परिधि के मरीजों को यह अस्पताल सुविधा प्रदान कर रहा है। इस पर 2.25 लाख की आबादी का लोड है।
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जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित भटहट सीएचसी कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हुआ करता था। केंद्र की छत पर जमी गंदगी से ऐसा जलजमाव होता था कि बरसात के दिनों में दिवारों की सीलन से मरीज, चिकित्सक, कर्मचारी परेशान थे। इस बीच डॉ. अश्विनी चौरसिया को केंद्र की जिम्मेदारी दी गई तो उन्होने एक-एक करके अस्पताल की सूरत बदल दी।
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डॉ. चौरसिया ने सबसे पहले अस्पताल की छत पर जमा गंदगी को साफ करवाते हुए ऑयल पेंटिंग करवाई गई और पूरी इमारत का रंग-रोगन करवाया गया। अस्पताल में छह इंटरकॉम, 14 सीसीटीवी कैमरे, सरकारी बजट से सभी कमरे के लिए नई आलमारी, सभी कमरों के लिए नए फर्नीचर लगवाए गए। एक बड़ा सुलभ शौचालय भी बनवाया। ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (बीपीएमयू) कक्ष को कार्पोरेट ऑफिस जैसी सूरत दी गई है।
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अस्पताल में पहले दो बेड का इमर्जेंसी वार्ड था, लेकिन उन्होंने इसे तीन बेड का करवाया। इनके प्रयास की वजह से महिला ओपीडी, ईटीसी, ड्रेसिंग एंड इंजेक्शन रूम के मरीजों के लिए अलग से वेटिंग एरिया बनाया गया है।
लेबर वार्ड के पास में ही सैनेट्री पैड की मशीन लगवाई गई। जहां से बिना किसी से मांगे सैनेटरी पैड प्राप्त किया जा सकता है। जबकि, शौचालय के पास इमीनेटर सैनिटरी पैड मशीन लगवाई गई, जहां यूज किए जा चुके पैड को नष्ट किया जाता है।
लेबर वार्ड के बगल में कंगारू मदर केयर (केएमसी) वार्ड बनाया गया, जहां स्टाफ प्रसूताओं को प्रशिक्षित कर सुविधा देता है। 35 किलोमीटर परिधि के मरीजों को यह अस्पताल सुविधा प्रदान कर रहा है। इस पर 2.25 लाख की आबादी का लोड है।