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डॉक्टर की सलाह: मिर्गी का दौरा पड़े तो जूता मत सूघांइए, इलाज करवाइए
Tue, 09 May 2023 03:22 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 09 May 2023 03:22 PM IST
सार
डॉ. सुमित ने बताया कि अलग-अलग उम्र और जेंडर के लिए अलग-अलग दवाएं हैं। अगर किसी को 20 साल की उम्र में अगर मिर्गी के दौरे आ रहे हैं तो ऐसे मरीजों को अलग दवा दी जाती है। इसी तरह अगर युवती को दिक्कत है तो उसकी दवाएं भी अलग है।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आम तौर पर मिर्गी के मरीजों का दौरा पड़ने पर लोग लोग जूते और मोजे सूंघाने लगते हैं। जबकि, यह पूरी से गलत है। क्योंकि, 95 फीसदी मिर्गी के मरीजों को दौरा दो मिनट का ही पड़ता है। दो मिनट के बाद दौरा आना बंद हो जाता है। इस दौरान जूते और मोजे सूंघाने वाले लोगों को लगता है कि वह उसी से ठीक हुआ है। ऐसे मरीजों का बीआरडी में इलाज चल रहा है। साथ ही मिर्गी के गंभीर मरीजों के कॉलेज प्रशासन ने ऑपरेशन का फैसला लिया है। कॉलेज प्रशासन के इस पहल के बाद पूर्वांचल के मरीजों को काफी हद तक राहत मिलेगी।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विशेषज्ञ डॉ. सुमित ने बताया कि 15 से 50 साल के लोगों में मिर्गी का सबसे बड़ा कारण न्यूरो साइटिस्टेरोसिस (तंत्रिका तंत्र का परजीवी रोग) है। ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती है कि वह झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें। क्योंकि, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जो भी मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, उनकी स्थिति बेहद खराब रह रही है। मरीजों ने बताया कि जब भी उन्हें दौरा पड़ता है तो आसपास के लोग जूते और मोजे सूंघाने लगते हैं।
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ऐसे 200 मरीजों का फालोअप किया जा रहा है। उन्हें दवा देकर हर माह बुलाया जा रहा है। बताया कि ऐसे दो से तीन फीसदी मरीजाें के ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, जिसे बेहद कुशल न्यूरो सर्जन ही कर सकता है। क्योंकि, इसकी सर्जरी बेहद कठिन है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि मिर्गी के मरीजों का इलाज सुपर स्पेशियलिटी सेवा में न्यूरो विशेषज्ञों की टीम अच्छे से कर रही है। काफी संख्या में बीआरडी में मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। जल्द ही मिर्गी के मरीजों का ऑपरेशन शुरू किया जाएगा, जिससे की उन्हें ऑपरेशन के लिए लखनऊ और दिल्ली नहीं जाना पडे़ेगा।
अलग-अलग उम्र और जेंडर के लिए अलग-अलग हैं दवाएं
डॉ. सुमित ने बताया कि अलग-अलग उम्र और जेंडर के लिए अलग-अलग दवाएं हैं। अगर किसी को 20 साल की उम्र में अगर मिर्गी के दौरे आ रहे हैं तो ऐसे मरीजों को अलग दवा दी जाती है। इसी तरह अगर युवती को दिक्कत है तो उसकी दवाएं भी अलग है। अगर सही दवा नहीं चलती है तो युवाओं के वजन बढ़ने और बाल झड़ने की समस्या शुरू हो जाती है। इसी तरह अगर युवती को सही दवा नहीं दी गई तो शादी के बाद भविष्य में उसे मां बनने में दिक्कत होगी। अगर किसी तरह वह मां भी बन गई तो गर्भ में पल रहे बच्चे शारीरिक दिक्कतें हो सकती है।
मिर्गी आने पर सीधे या करवट के बल लिटा दें
न्यूरो मेडिसिन डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि परिवार में कोई मिर्गी रोगी है तो उसके दौरे की अवधि देखना जरूरी है। गंभीर स्थिति या ज्यादा अवधि के दौरे पर ही रोगी को अस्पताल में दिखाने की स्थिति बनती है। 95 फीसदी मरीजों को दो मिनट के ही दौरे आते हैं। जबकि, पांच फीसदी मरीजों को तीन से पांच मिनट के दौरे पड़ते हैं। ऐसे में अगर मरीज को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं तो उसे जमीन पर या समतल स्थान पर करवट से लिटा दें या उसकी गर्दन एक ओर मोड़ दें, जिससे मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाए।
मिर्गी आने पर सीधे या करवट के बल लिटा दें
न्यूरो मेडिसिन डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि परिवार में कोई मिर्गी रोगी है तो उसके दौरे की अवधि देखना जरूरी है। गंभीर स्थिति या ज्यादा अवधि के दौरे पर ही रोगी को अस्पताल में दिखाने की स्थिति बनती है। 95 फीसदी मरीजों को दो मिनट के ही दौरे आते हैं। जबकि, पांच फीसदी मरीजों को तीन से पांच मिनट के दौरे पड़ते हैं। ऐसे में अगर मरीज को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं तो उसे जमीन पर या समतल स्थान पर करवट से लिटा दें या उसकी गर्दन एक ओर मोड़ दें, जिससे मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाए।