बदल रहा गोरखपुर: कूड़ा जरूर उठाइए मगर बाजार खुलने और बंद होने के बाद आइए
व्यापारी नितिन जायसवाल और विनय सिंह का सुझाव है कि शाम सात बजे कूड़ा उठाए जाने का फायदा नहीं मिल पाएगा। वजह यह है कि दुकानें रात दस बजे तक बंद होती हैं। नगर निगम की गाड़ी के जाने के बाद कूड़ा कचरा पड़ा रह जाएगा, जिसे रात में पशु तितर-बितर कर देंगे।
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गोरखपुर शहर के गोलघर में सफाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए नगर निगम की नई व्यवस्था के पहले दिन मंगलवार को दुकानदार और व्यापारी सजग नजर आए। बाजार साफ-सुथरा रहे और जुर्माना न भरना पड़े, इसके लिए सभी ने कूड़ा डस्टविन में रखा और नगर निगम की गाड़ी आने पर उसमें डाला। व्यापारियों ने नगर निगम की इस व्यवस्था की तारीफ की, साथ ही कूड़ा उठाने के समय में बदलाव की मांग की।
उनका कहना है कि नगर निगम ने सुबह 10 और शाम सात बजे कूड़ा उठाने की व्यवस्था बनाई है। जबकि लगभग सभी प्रतिष्ठान सुबह दस बजे के बाद ही खुलने शुरू होते हैं। साफ-सफाई के बाद कूड़ा एकत्र होता है। ऐसे में कूड़ा गाड़ी बाजार खुलने के बाद आनी चाहिए। इसी तरह रात में दुकानें बंद होने का समय हो तब कूड़ा उठायाा जाए। इससे साफ-सफाई रखने में आसानी होगी।
सोमवार को सहायक नगर आयुक्त ने गोलघर में दुकानदारों से संपर्क कर अपील की थी कि प्रतिष्ठान से निकलने वाला कूड़ा हर हाल में गाड़ी आने पर उसमें डालें। रोजाना सुबह 10 और शाम सात बजे दुकानों के सामने पहुंचकर गाड़ी कूड़ा उठाएगी। इसके लिए दुकान के आकार के आधार पर यूजर चार्ज 750 से 1500 रुपये तय किया गया है। इसके बाद यदि किसी ने गंदगी फैलाई तो जुर्माना काटकर उससे 500 से 750 रुपये वसूले जाएंगे। मंगलवार से गोलघर में कूड़ा उठाने की नई व्यवस्था लागू हो गई। हालांकि पहले दिन शाम की पाली में सफाई कर्मचारी शाम सात बजे की जगह 50 मिनट की देरी से 7.50 बजे गाड़ी लेकर पहुंचे।
चालक रंजीत गौड़ गाड़ी लेकर आए। वीर बहादुर सिंह की प्रतिमा के पीछे खड़ी की। गाड़ी पर सवार अनुराग और धीरज उतरे। सुपरवाइजर संदीप भी आ गए। इसके बाद कर्मचारियों ने इंदिरा बाल विहार की दुकानों के सामने से कूड़ा उठाना शुरू किया। एक-एक करके सभी दुकानों के सामने से कूड़ा उठाकर गाड़ी में रखा। आधे घंटे के भीतर ही कचरा बटोरकर गाड़ी कचहरी चौराहे की चली गई। इस दौरान सबसे सतर्क ठेले-खोमचे वाले नजर आए।
एक ही डस्टबिन इस्तेमाल कर रहे दुकानदार
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, दुकानदारों को गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग डस्टबिन में डालने के लिए प्रेरित किया गया है। लेकिन, मंगलवार को इस व्यवस्था का पालन नहीं हुआ। ठेले पर मोमो, टिकिया-चाट और फुल्की बेचने वाले हों या फिर रेस्टोरेंट संचालक, किसी दुकान के सामने अलग-अलग कूड़ेदान नहीं थे। सभी दुकानदार एक ही डिब्बे में हर तरह का कूड़ा डालते नजर आए। जबकि इसके लिए दुकानदारों को पहले नोटिस दिया गया है।
समय बदलें तो व्यवस्था ज्यादा कारगर होगी
शाम सात बजे की जगह कूड़ा गाड़ी रात में दुकान बंद होने के समय आए तो व्यवस्था ज्यादा कारगर होगी। डस्टबिन में पड़ा कचरा रात में पशु नहीं बिखरेंगे। इससे दुकानों के बंद होने के बाद सड़काें पर गंदगी नहीं फैलेगी-अभिषेक शाही, अध्यक्ष, गोलघर व्यापार मंडल।
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सुविधा शुरू हुई तो आगे भी चले
यह नगर निगम की अच्छी पहले है लेकिन मानिटरिंग होती रहनी चाहिए। जिससे यह नियमित चलती रहे। होटल और रेस्टोरेंट से ज्यादा कचरा निकलता है। सूखा और गीला कूड़ा के लिए लोग अलग-अलग डस्टबिन रखें -गौरीशंकर सरावगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गोलघर व्यापार मंडल।
सभी व्यवस्था में सहयोग करें
हॉस्पिटल और होटल संचालकों को विशेष ध्यान देना होगा। सभी लोग नगर निगम की इस व्यवस्था में सहयोग करें। गाड़ी के आने पर तत्काल कूड़ा उसमें डाल दें। इससे नगर की सफाई में सहयोग मिलेगा। साथ ही गोलघर को साफ-सुथरा रखा जा सकेगा। -समीर कुमार राय, कारोबारी।
सुबह दुकानें खुलने के बाद उठे कूड़ा
गोलघर के दुकानदार रात में नौ बजे तक कूड़ा गाड़ी भेजने की बात कह रहे हैं। पहले दिन रेलवे स्टेशन रोड से कूड़ा उठाने के बाद गाड़ी गोलघर पहुंची। सभी दुकानदारों को पहले ही हिदायत दी गई है। अभी किसी का चालान नहीं काटा गया है। किसी तरह की लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई होगी। -डॉ. मणिभूषण तिवारी, सहायक नगर आयुक्त।
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रात में पशु तितर-बितर कर देंगे कूड़ा, समय में हो बदलाव
व्यापारी नितिन जायसवाल और विनय सिंह का सुझाव है कि शाम सात बजे कूड़ा उठाए जाने का फायदा नहीं मिल पाएगा। वजह यह है कि दुकानें रात दस बजे तक बंद होती हैं। नगर निगम की गाड़ी के जाने के बाद कूड़ा कचरा पड़ा रह जाएगा, जिसे रात में पशु तितर-बितर कर देंगे। वहीं, व्यापारी शिबू, रामकुमार और दिनेश का कहना है कि नगर निगम की टीम सुबह सात बजे आएगी तो कोई फायदा नहीं है। गोलघर की दुकानें तो 10 बजे के बाद खुलती हैं। जो भी कूड़ा कचरा होगा इसके बाद ही निकलेगा। इसी तरह शाम सात बजे का समय भी ठीक नहीं है।