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Doctor Advice: बच्चे के गुस्से, जिद को न करें नजरअंदाज, तुरंत ले डॉक्टर की सलाह

Thu, 18 Aug 2022 10:15 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 18 Aug 2022 10:15 AM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर माह 20 से 25 आ रहे हैं। कुछ बच्चे तो काउंसिलिंग से ठीक हो जा रहे हैं, कुछ को दवा की जरूरत पड़ रही है।   उन्होंने बताया कि यह भी देखा गया है कि इन बच्चों का आईक्यू लेबल अन्य बच्चों की तुलना में कुछ अधिक मिला है।

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Do not ignore child anger stubbornness
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर आप का बच्चा गुस्सा करता है, हर बात में जिद करता है, चिड़चिड़ेपन का शिकार है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज बिल्कुल न करें। ये लक्षण ओपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर  (ओडीडी) के हो सकते हैं।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, ओडीडी में किशोरों के मस्तिष्क में एक तरह का बदलाव होता है, जो उनकी तर्क क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में बच्चों पर गुस्सा न हों, उन्हें प्यार से समझाएं। ज्यादा दिक्कत बढ़ने पर तत्काल मनोचिकित्सक से सलाह लें।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. तपस कुमार ने बताया कि ओडीडी जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे बच्चों का गुस्सा और जिद बढ़ने लगता है। लोगों को लगता है कि यह सामान्य हैं। जबकि, यह गंभीर बीमारी होती है, जो धीरे-धीरे बच्चों के मस्तिष्क को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
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ऐसे केस बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर माह 20 से 25 आ रहे हैं। कुछ बच्चे तो काउंसिलिंग से ठीक हो जा रहे हैं, कुछ को दवा की जरूरत पड़ रही है।   उन्होंने बताया कि यह भी देखा गया है कि इन बच्चों का आईक्यू लेबल अन्य बच्चों की तुलना में कुछ अधिक मिला है। साथ ही स्मार्टनेस में भी ज्यादा मिली है, लेकिन इसका इस्तेमाल वह सही जगहों पर नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि उनकी काउंसिलिंग करनी पड़ रही है। लड़कियों के मुकाबले लड़के इस सिंड्रोम से ज्यादा पीड़ित होते हैं।


घर के माहौल का भी असर
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ अमित शाही ने बताया कि ऐसी स्थिति में घर का माहौल सबसे ज्यादा असरदार होता है। अगर घर में आए दिन विवाद हो रहा है, तो ऐसी स्थिति में बच्चे जल्दी ठीक नहीं हो पाते हैं। जबकि, अगर माहौल खुशनुमा है, तो बच्चों पर इसका प्रभाव दिखता है और वह इस सिंड्रोम से जल्दी उबर जाते हैं। परिवार के माहौल के अनुसार ही उनके मस्तिष्क पर उसका असर भी पड़ता है।

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