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खेती-किसानी: गन्ने की सूखी पत्तियां जलाएं नहीं, खेत में ही खाद बनाएं, बढ़ेगी उपज

Wed, 15 Dec 2021 02:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 15 Dec 2021 02:45 PM IST
सार

अभी अधिकतर किसान गन्ने की छिलाई के बाद खेत में ही जला देते हैं सूखी पत्तियां, ट्रेस कटर से सूखी पत्तियों का भूसा बना खेत में बिछा दें, सिंचाई के बाद जुताई कर दें।

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Do not burn dry leaves of sugarcane make manure in field itself
गन्ना। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाराष्ट्र के किसान जहां गन्ने की सूखी पत्तियों का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में करते हैं, वहीं गोरखपुर मंडल के किसान सूखी पत्तियों को जलाकर न केवल प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही महाराष्ट्र में प्रशिक्षण के दौरान गन्ने की पत्तियों के जरिए जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के गुर सीखे। अब यह गुर मंडल के किसानों को भी सिखाए जाएंगे।

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गोरखपुर मंडल में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। गन्ने की छिलाई के दौरान प्रति एकड़ 40 से 50 क्विंटल तक सूखी पत्तियां निकलती हैं। इन पत्तियों का कोई उपयोग नहीं होने के चलते आमतौर पर किसान इसे खेत में जला देते हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि संस्थान का एक प्रतिनिधि मंडल प्रशिक्षण के लिए महाराष्ट्र गया था। वहां बसंत दादा शर्करा संस्थान एवं गन्ना अनुसंधान संस्थान पूना में प्रशिक्षण के दौरान गन्ने की पत्तियों पर चर्चा की गई।
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महाराष्ट्र में किसान गन्ने की छिलाई के बाद सूखी पत्तियों को ट्रेस कटर मशीन से काटकर भूसे की तरह बना लेते हैं। इसे खेत में बिछाकर सिंचाई के बाद खेत की जुताई करा देते हैं। इससे सूखी पत्तियां मिट्टी में सड़कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ा देती हैं।
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गन्ने की पत्ती जलाने से होता है नुकसान

  • एक ग्राम मिट्टी में 10 से 35 करोड़ तक लाभकारी जीवाणु व एक से दो लाख तक लाभकारी फंफूद जलकर नष्ट हो जाती है।
  • मृदा का तापमान बढ़ने से लाभकारी जीव राइजोवियम, एजैटोवेक्टर, एजो स्पाइंरिलम आदि जैविक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
  • मृदा की जलधारण क्षमता कम होती है। 15 सेमी की गहराई तक पाए जाने वाले लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं।

पत्तियों को जैविक खाद बदलने से ये होगा लाभ

  • पत्तियां सड़कर जैविक खाद में बदलेंगी, जिससे कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ेगी। फसल अवशेष में लगभग सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं।
  • मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ जाती है। मृदा के वायु संचार में वृद्धि होती है। खर पतवारों का प्रभाव कम हो जाता है।
  • वातावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। 10 क्विंटल फसल अवशेष को जैविक खाद में बदलने पर 5.5 किग्रा नाइट्रोजन, दो से तीन किग्रा फास्फोरस, 25 किग्रा पोटाश, 1.2 किग्रा सल्फर तथा 400 किग्रा जैविक कार्बन का फायदा मिलेगा।
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