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गोरखपुर में 50 हजार लोगों के लिए रोजगार ढूंढ रहा प्रशासन, इन खास लोगों को मिलेगी मदद
Sat, 25 Apr 2020 11:12 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 25 Apr 2020 11:12 AM IST
सार
- मनरेगा से लेकर गीडा की फैक्ट्रियों तक में तलाशे जा रहे विकल्प
- शासन के निर्देश पर डीएम ने शुरू की तैयारी, बाहर से आए लोगों की दिया जाएगा रोजगार
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Gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
लॉकडाउन के बीच दूसरे प्रांतों से गोरखपुर लौटे करीब 25 हजार लोगों को सामने अब जीविकोपार्जन की समस्या खड़ी होने लगी है। जिला प्रशासन का अनुमान है कि लॉकडाउन खत्म होते ही करीब इतने ही लोग और गोरखपुर लौटेंगे। हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा लिहाजा इनके सामने घर का खर्च उठाने जैसी मुश्किलें खड़ी होने के पहले ही जिला प्रशासन इनके लिए रोजगार के विकल्प तलाशने में जुट गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सप्ताह भर के भीतर रोजगार सृजन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर देने का निर्देश दिया है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि जिले में करीब 50 हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए सभी विकल्पों पर मंथन चल रहा है।
गीडा, गोरखनाथ औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित हो रहे उद्योगों, एक जिला एक उत्पाद, एनआरएलएम, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना, कौशल विकास मिशन, खादी ग्रामोद्योग तथा मनरेगा के माध्यम से कितने लोगों को रोजगार दिया जा सकता है, इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान करीब 25 हजार लोग बाहर से आए। लॉकडाउन खत्म होने पर इतने ही लोगों के और आने की उम्मीद है। इनमें से ज्यादातर मजदूर या फैक्ट्रियों आदि में काम करने वाले हैं। इनके सामने जीविकोपार्जन का संकट न खड़ा हो इसलिए इन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। उद्यमियों से भी अपील की जाएगी कि वे जिले के मजदूरों को प्राथमिकता दें।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सप्ताह भर के भीतर रोजगार सृजन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर देने का निर्देश दिया है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि जिले में करीब 50 हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए सभी विकल्पों पर मंथन चल रहा है।
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गीडा, गोरखनाथ औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित हो रहे उद्योगों, एक जिला एक उत्पाद, एनआरएलएम, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना, कौशल विकास मिशन, खादी ग्रामोद्योग तथा मनरेगा के माध्यम से कितने लोगों को रोजगार दिया जा सकता है, इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान करीब 25 हजार लोग बाहर से आए। लॉकडाउन खत्म होने पर इतने ही लोगों के और आने की उम्मीद है। इनमें से ज्यादातर मजदूर या फैक्ट्रियों आदि में काम करने वाले हैं। इनके सामने जीविकोपार्जन का संकट न खड़ा हो इसलिए इन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। उद्यमियों से भी अपील की जाएगी कि वे जिले के मजदूरों को प्राथमिकता दें।