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अवैध कब्जे को लेकर डीएम कोर्ट ने सुनाया फैसला, दुकानदारों ने कहा- आशियाना उजाड़ना चाहता है नगर पंचायत
Fri, 25 Dec 2020 02:54 PM IST
vivek shukla
गोविंद यादव/ सतीश सिंह, देवरिया।
गोविंद यादव/ सतीश सिंह, देवरिया।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 25 Dec 2020 02:54 PM IST
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लार बाजार।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के देवरिया-मेहरौना मार्ग पर लार कस्बे में सड़क पर कब्जा कर मकान एवं दुकान बना लिए जाने के मामले में डीएम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। फैसले में लार नगर पंचायत के ईओ के आदेश को बरकरार रखा गया है। ऐसे में अब लार कस्बे में तकरीबन 50 मकान एवं दुकानों को तोड़कर सड़क चौड़ीकरण किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
लार नगर पंचायत का गठन वर्ष 1871 में हुआ था। राहगीरों की सहूलियत के लिए मुख्य बाजार के रास्ते सड़क बनाई गई थी। यह सड़क देवरिया से होते हुए बिहार तक जाती है। नगर पंचायत प्रशासन के मुताबिक उसी समय से मुख्य सड़क की चौड़ाई नक्शे में 46 फुट (70 कड़ी) है। जबकि इधर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया। जिससे चौड़ाई 20 कड़ी यानी 13 फुट में सिमटकर रह गई है।
इस रास्ते से होकर गुजरने में लोगों के माथे पर पसीना आ जाता है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन जाम न लगता हो। यहां तक की घंटों एंबुलेंस फंस जाती है। कुछ वर्ष पूर्व जाम में फंसने के दौरान एक नवजात की जान चली गई थी। वर्ष 2017 में नगर पंचायत अध्यक्ष सरोज यादव निर्वाचित हुईं तो तत्कालीन ईओ की तरफ से नगर की मुख्य सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर 70 अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा गया।
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लार नगर पंचायत का गठन वर्ष 1871 में हुआ था। राहगीरों की सहूलियत के लिए मुख्य बाजार के रास्ते सड़क बनाई गई थी। यह सड़क देवरिया से होते हुए बिहार तक जाती है। नगर पंचायत प्रशासन के मुताबिक उसी समय से मुख्य सड़क की चौड़ाई नक्शे में 46 फुट (70 कड़ी) है। जबकि इधर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया। जिससे चौड़ाई 20 कड़ी यानी 13 फुट में सिमटकर रह गई है।
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इस रास्ते से होकर गुजरने में लोगों के माथे पर पसीना आ जाता है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन जाम न लगता हो। यहां तक की घंटों एंबुलेंस फंस जाती है। कुछ वर्ष पूर्व जाम में फंसने के दौरान एक नवजात की जान चली गई थी। वर्ष 2017 में नगर पंचायत अध्यक्ष सरोज यादव निर्वाचित हुईं तो तत्कालीन ईओ की तरफ से नगर की मुख्य सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर 70 अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा गया।
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नगर पंचायत ने क्यों पास कर दिया नक्शा
नवंबर 2019 में ईओ राजन नाथ तिवारी ने 15 दिन में अवैध कब्जा हटाएं जाने का निर्देश दिया। इस तरह से छह नोटिस भेजा गया। इससे परेशान व्यवसायी मकबूल अहमद निवासी मठ वार्ड व 16 अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई को खारिज कर मामले को डीएम कोर्ट भेज दिया। डीएम कोर्ट में दोनों पक्ष सुनवाई के लिए पहुंचे। यहां तारीख पर तारीख पड़ती रही। 22 दिसंबर 2020 को मामले की सुनवाई करते हुए डीएम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। उन्होंने गुरुवार को फैसला सुना दिया। उन्होंने नगर पंचायत के ईओ के आदेश को बरकरार रखा है। ऐसे में अब तकरीबन 50 दुकानों को तोड़े जाने का रास्ता साफ हो गया है। इसकी भनक मिलने के बाद दुकानदारों की बेचैनी बढ़ गई है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र बरनवाल का कहना है कि नगर में जो भी मकानें, दुकानें बनी हैं, इनको बनवाने के लिए नगर पंचायत नक्शा पास करता है। इन दुकानदारों ने भी नक्शा पास कराया है। प्रश्न यह है कि अगर इनके द्वारा कब्जा किया गया तो ऐसे में कैसे नगर पंचायत ने नक्शा पास कर दिया।
दुकानदारों का कहना है कि यह भूमि जमीदारी की है, न कि नगर पंचायत की। दुकानदार पांच पुश्तों से रह रहे हैं। नगर पंचायत गुमराह कर तानाशाही रवैया अपनाकर गरीबों का आशियाना उजाड़ना चाहता है। यह नहीं होने दिया जाएगा। अगर सड़क चौड़ीकरण होता है तो सभी दुकानदारों को मुआवजा मिलना चाहिए।
लार बाजार के मुख्य याचिकाकर्ता मकबूल आलम ने बताया कि सड़क पर अतिक्रमण नहीं है। सभी लोग अपनी-अपनी जमीन पर काबिज हैं। हमने अपना पक्ष डीएम कोर्ट में रखा है। अभी डीएम कोर्ट का आदेश हमें प्राप्त नहीं हुआ है। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। फैसला चाहें जो भी हो। हम सरकार से उचित मुआवजे की मांग करेंगे।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र बरनवाल का कहना है कि नगर में जो भी मकानें, दुकानें बनी हैं, इनको बनवाने के लिए नगर पंचायत नक्शा पास करता है। इन दुकानदारों ने भी नक्शा पास कराया है। प्रश्न यह है कि अगर इनके द्वारा कब्जा किया गया तो ऐसे में कैसे नगर पंचायत ने नक्शा पास कर दिया।
दुकानदारों का कहना है कि यह भूमि जमीदारी की है, न कि नगर पंचायत की। दुकानदार पांच पुश्तों से रह रहे हैं। नगर पंचायत गुमराह कर तानाशाही रवैया अपनाकर गरीबों का आशियाना उजाड़ना चाहता है। यह नहीं होने दिया जाएगा। अगर सड़क चौड़ीकरण होता है तो सभी दुकानदारों को मुआवजा मिलना चाहिए।
लार बाजार के मुख्य याचिकाकर्ता मकबूल आलम ने बताया कि सड़क पर अतिक्रमण नहीं है। सभी लोग अपनी-अपनी जमीन पर काबिज हैं। हमने अपना पक्ष डीएम कोर्ट में रखा है। अभी डीएम कोर्ट का आदेश हमें प्राप्त नहीं हुआ है। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। फैसला चाहें जो भी हो। हम सरकार से उचित मुआवजे की मांग करेंगे।
नगर पंचायत अध्यक्ष सरोज यादव ने बताया कि नगर के विकास के लिए सड़क से अतिक्रमण हटाना आवश्यक है। हमने नगर पंचायत प्रशासन की तरफ से लगातार प्रयास किए। अब डीएम कोर्ट ने सारी अटकलों पर विराम लगा फैसला कर दिया है। उम्मीद है जल्द नगर पंचायत अतिक्रमण मुक्त होगा। प्रशासन से सहयोग लेकर इस कार्य में सहभागिता निभाई जाएगी। अवैध कब्जा हटाएं जाने के बाद सड़क का चौड़ीकरण हो जाएगा। हजारों लोग जाम में रोज-रोज नहीं फंसकर परेशान होंगे।
सराफा कारोबारी सुधीर कुमार बरनवाल ने बताया कि दुकानें टूटी तो 50 से अधिक दुकानदार सड़कों पर आ जाएंगे। यह दुकानदारों के लिए बड़ा ही दु:खद है। हम दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित होगा। बाईपास सड़क होने के बावजूद भी नगर पंचायत हम लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित करने में लगी है।
डीएम अमित किशोर ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में मेरे यहां कोर्ट में मामला विचाराधीन था। हमने फैसला सुना दिया है। नगर पंचायत के ईओ ने जिन बिंदुओं पर निर्देश दिया था। उसे बरकरार रखा गया है। जल्द ही अतिक्रमण हटाया जाएगा।
सराफा कारोबारी सुधीर कुमार बरनवाल ने बताया कि दुकानें टूटी तो 50 से अधिक दुकानदार सड़कों पर आ जाएंगे। यह दुकानदारों के लिए बड़ा ही दु:खद है। हम दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित होगा। बाईपास सड़क होने के बावजूद भी नगर पंचायत हम लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित करने में लगी है।
डीएम अमित किशोर ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में मेरे यहां कोर्ट में मामला विचाराधीन था। हमने फैसला सुना दिया है। नगर पंचायत के ईओ ने जिन बिंदुओं पर निर्देश दिया था। उसे बरकरार रखा गया है। जल्द ही अतिक्रमण हटाया जाएगा।