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Diwali 2022: धूमधाम से आज मनेगी दीपावली, श्रद्धालु भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को करेंगे प्रसन्न

Mon, 24 Oct 2022 10:42 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 24 Oct 2022 10:42 AM IST
सार

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुईं थीं। बताया कि इस त्योहार को मनाने के कई कारण हैं। भगवान राम इसी दिन 14 वर्ष का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या में आए थे, इसलिए इस दिन दीप जलाकर प्रसन्नता व्यक्त की जाती है।

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Diwali 2022 will be celebrated today with pomp in Gorakhpur
दिवाली 2022 - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रोशनी का महापर्व दीपावली सोमवर को धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रद्धालु दीप जलाकर विधि-विधान से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर प्रसन्न करेंगे। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन चतुर्दशी तिथि शाम पांच बजकर चार मिनट तक, पश्चात अमावस्या तिथि है। इस दिन हस्त नक्षत्र दोपहर बाद तीन बजकर 18 मिनट तक पश्चात चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग है।

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दीपावली का महात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुईं थीं। बताया कि इस त्योहार को मनाने के कई कारण हैं। भगवान राम इसी दिन 14 वर्ष का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या में आए थे, इसलिए इस दिन दीप जलाकर प्रसन्नता व्यक्त की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। दीपावली की रात्रि को महानिशा की संज्ञा दी गई है। रात्रिकाल में जागरण कर सभी लोग मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए तत्पर रहते हैं। लक्ष्मी पूजन के अतिरिक्त इस दिन व्यापारिक स्थलों की पूजा, तुला पूजन, बहीखाता, लेखनी,  कुबेर पूजन, भगवान गणेश, महाकाली और महासरस्वती का भी पूजन होता है।
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ऐसे करें पूजन-अर्चन

पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन सुबह उठकर स्नानादि के बाद पितृगण और देवताओं का पूजन करें। यदि संभव हो तो दूध, दही और घृत से पितरों का श्राद्ध करें। दिनभर उपवास रखकर या फलाहार ग्रहण करके गोधूलि बेला में श्रीगणेश, कलश, षोडश मातृका व ग्रह पूजन कर भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें। इसके बाद महाकाली, महासरस्वती और धन के देवता कुबेर की विधिवत पूजन करें। इसी समय दीपदान कर यमराज और पितृगणों के निमित्त ससंकल्प दीपदान करना चाहिए।

पूजन मुहूर्त
प्रदोष काल: शाम पांच बजकर 38 मिनट से आठ बजकर 14 मिनट तक (दो घंटा 36 मिनट तक)।
निशीथ काल: रात आठ बजकर 15 मिनट से रात 10 बजकर 50 मिनट तक।
महा निशीथ काल: रात 10 बजकर 51 मिनट से अर्द्धरात्रि के बाद एक बजकर 26 मिनट तक।

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