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Diwali 2021: शुभ संयोगों के बीच पांच दिनों का दीपोत्सव महापर्व कल से, जानिए कब है कौन सा त्योहार
Mon, 01 Nov 2021 12:41 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 01 Nov 2021 12:41 PM IST
सार
बुधवार को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), बृहस्पतिवार को दिवाली, शुक्रवार को अन्नकूट और गोवर्धन पूजा तथा शनिवार को यम द्वितीया, भैया दूज एवं चित्रगुप्त पूजा का आयोजन किया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : istock
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विस्तार
शुभ संयोगों के बीच पांच दिनों के दिवाली महापर्व की शुरुआत मंगलवार को धनतेरस से हो रही है। बुधवार को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), बृहस्पतिवार को दिवाली, शुक्रवार को अन्नकूट और गोवर्धन पूजा तथा शनिवार को यम द्वितीया, भैया दूज एवं चित्रगुप्त पूजा का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही पांच दिनों के महापर्व का समापन हो जाएगा।
धनतेरस
धनतेरस का पर्व दो नवंबर को मनाया जाएगा। द्वादशी तिथि का मान सुबह आठ बजकर 35 मिनट तक, इसके बाद संपूर्ण दिन, रात्रि और अगले दिन सुबह सात बजकर 14 मिनट तक त्रयोदशी होगी। इस दिन वैधृति योग और धाता नामक महा औदायिक योग है। इस योग में खरीदारी करना अत्यंत ही शुभकारी होगा। पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन धनतेरस के साथ ही धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन धन के स्वामी कुबेर की पूजा भी होती है। इस दिन धातु के बने बर्तनों को खरीदना आगामी वर्ष के लिए समृद्धिदायक माना जाता है। धनतेरस के दिन शाम को यम के निमित्त दीपदान होता है। ऐसा करने से आने वाले वर्ष में घर में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
नरक चतुर्दशी का पर्व तीन नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस दिन सुबह सात बजकर 15 मिनट से चतुर्दशी तिथि अगले दिन सुबह पांच बजकर 31 मिनट तक है। इस दिन विष्कुंभ एवं प्रीति योग और आनंद नामक महा औदायिक योग भी है। पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, इस दिन के सूर्योदय से पूर्व तेल और उबटन लगाकर स्नान करने का विधान है। इस दिन स्नान से जहां सौंदर्य की प्राप्ति होती है वहीं शरीर में दिव्य शक्ति का संचार होता है और कई प्रकार के रोगों से छुटकारा भी मिलता है। वहीं शाम को दीये जलाकर छोटी दिवाली मनाई जाती है।
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दिवाली
दिवाली चार नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि को तीन बजकर 32 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र सुबह आठ बजे से बजकर 12 मिनट तक इसके बाद स्वाती नक्षत्र, प्रीति योग दिन में 12 बजकर 40 मिनट पश्चात आयुष्मान योग है। प्रीति योग से श्रद्धालुओं में आपसी सौहार्द बढ़ेगा। वहीं आयुष्मान योग रोगों से छुटकारा दिलाएगा। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी के साथ-साथ महासरस्वती एवं महाकाली की भी पूजा की जाती है। व्यवसायी दिवाली से नववर्ष का आरंभ मानते हैं, इसलिए इस दिन नए बही खातों का पूजन, तुला (तराजू) तिजोरी, व्यवसाय स्थान पर प्रयुक्त मशीनरी आदि का पूजन किया जाता है।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा पांच नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक शुक्लपक्ष प्रतिपदा का मान पूरे दिन भर और रात को एक बजकर 21 मिनट तक है। इस दिन स्वाती नक्षत्र सुबह छह बजकर 52 मिनट, पश्चात विशाखा नक्षत्र। इस दिन आयुष्मान और सौभाग्य दोनों योग हैं। ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। खरीफ फसल के लिए नए अन्न एवं शाक सब्जियों को पहली बार इस मौसम में अन्नकूट के रूप में बनाने का प्रचलन है। अन्नकूट बनाकर भगवान विष्णु का भोग लगाया जाता है। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया जाता है।
यम द्वितीया, भैया दूज एवं चित्रगुप्त पूजा
यम द्वितीया, भैया दूज एवं चित्रगुप्त पूजा छह नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन अनुराधा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात्रिशेष तीन बजकर 43 मिनट तक होगा। इस दिन अमृत नामक महा औदायिक योग है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, इस दिन भाई अपने बहन के घर जाता है और उसके हाथ का भोजन करता है। बहन भाई का तिलक कर उसकी दीर्घायु की कामना करती है। इस दिन चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है।
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धनतेरस
धनतेरस का पर्व दो नवंबर को मनाया जाएगा। द्वादशी तिथि का मान सुबह आठ बजकर 35 मिनट तक, इसके बाद संपूर्ण दिन, रात्रि और अगले दिन सुबह सात बजकर 14 मिनट तक त्रयोदशी होगी। इस दिन वैधृति योग और धाता नामक महा औदायिक योग है। इस योग में खरीदारी करना अत्यंत ही शुभकारी होगा। पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन धनतेरस के साथ ही धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन धन के स्वामी कुबेर की पूजा भी होती है। इस दिन धातु के बने बर्तनों को खरीदना आगामी वर्ष के लिए समृद्धिदायक माना जाता है। धनतेरस के दिन शाम को यम के निमित्त दीपदान होता है। ऐसा करने से आने वाले वर्ष में घर में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
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नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
नरक चतुर्दशी का पर्व तीन नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस दिन सुबह सात बजकर 15 मिनट से चतुर्दशी तिथि अगले दिन सुबह पांच बजकर 31 मिनट तक है। इस दिन विष्कुंभ एवं प्रीति योग और आनंद नामक महा औदायिक योग भी है। पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, इस दिन के सूर्योदय से पूर्व तेल और उबटन लगाकर स्नान करने का विधान है। इस दिन स्नान से जहां सौंदर्य की प्राप्ति होती है वहीं शरीर में दिव्य शक्ति का संचार होता है और कई प्रकार के रोगों से छुटकारा भी मिलता है। वहीं शाम को दीये जलाकर छोटी दिवाली मनाई जाती है।
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दिवाली
दिवाली चार नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि को तीन बजकर 32 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र सुबह आठ बजे से बजकर 12 मिनट तक इसके बाद स्वाती नक्षत्र, प्रीति योग दिन में 12 बजकर 40 मिनट पश्चात आयुष्मान योग है। प्रीति योग से श्रद्धालुओं में आपसी सौहार्द बढ़ेगा। वहीं आयुष्मान योग रोगों से छुटकारा दिलाएगा। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी के साथ-साथ महासरस्वती एवं महाकाली की भी पूजा की जाती है। व्यवसायी दिवाली से नववर्ष का आरंभ मानते हैं, इसलिए इस दिन नए बही खातों का पूजन, तुला (तराजू) तिजोरी, व्यवसाय स्थान पर प्रयुक्त मशीनरी आदि का पूजन किया जाता है।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा पांच नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक शुक्लपक्ष प्रतिपदा का मान पूरे दिन भर और रात को एक बजकर 21 मिनट तक है। इस दिन स्वाती नक्षत्र सुबह छह बजकर 52 मिनट, पश्चात विशाखा नक्षत्र। इस दिन आयुष्मान और सौभाग्य दोनों योग हैं। ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। खरीफ फसल के लिए नए अन्न एवं शाक सब्जियों को पहली बार इस मौसम में अन्नकूट के रूप में बनाने का प्रचलन है। अन्नकूट बनाकर भगवान विष्णु का भोग लगाया जाता है। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया जाता है।
यम द्वितीया, भैया दूज एवं चित्रगुप्त पूजा
यम द्वितीया, भैया दूज एवं चित्रगुप्त पूजा छह नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन अनुराधा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात्रिशेष तीन बजकर 43 मिनट तक होगा। इस दिन अमृत नामक महा औदायिक योग है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, इस दिन भाई अपने बहन के घर जाता है और उसके हाथ का भोजन करता है। बहन भाई का तिलक कर उसकी दीर्घायु की कामना करती है। इस दिन चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है।