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Exclusive: प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का दफ्तर गोरखपुर से अयोध्या स्थानांतरित, जानिए किस वजह से बंद होते गए सभी दफ्तर
Thu, 15 Jul 2021 12:01 PM IST
vivek shukla
टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:01 PM IST
सार
कभी गोरखपुर में पीएमजीएसवाई के हुआ करते थे तीन मंडलीय कार्यालय। पर्याप्त काम नहीं होने की वजह से एक-एक करके बंद होते गए सभी दफ्तर।
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प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
काम के अभाव में पीएमजीएसवाई के मंडलीय कार्यालय को गोरखपुर से अयोध्या ट्रांसफर कर दिया गया है। जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के कभी तीन मंडलीय दफ्तर हुआ करते थे, लेकिन अब एक भी नहीं बचा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़कों के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की शुरूआत की गई थी। इसके तहत लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की सड़कों को लेकर पीएमजीएसवाई के तहत निर्माण कराया जाता था। निर्माण कराने वाली फर्म को पांच साल तक रख रखाव की जिम्मेदारी दी जाती थी। इसके लिए बजट का प्रावधान होता था। एक समय ऐसा भी था जब पीएमजीएसवाई के पास बहुत काम था। इस कारण पीएमजीएसवाई के गोरखपुर में तीन मंडलीय कार्यालय खोलने पड़े थे।
विधायकों के कहने पर आरईएस को दिए गए कार्य
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तह जितने भी कार्य जनपद में होने थे उन सभी कार्यों को विधायकों के कहने पर ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री ने ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (आरईएस) को दे दिया। जनपद के पांच से अधिक विधायकों ने लिखित सिफारिश की थी कि पीएमजीएसवाई के तहत होने वाले कार्यों को आरईएस से कराया जाए। इसके पीछे विधायकों की क्या मंशा थी यह तो वही जानें, लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि पीएमजीएसवाई का बचा एक मंडलीय कार्यालय भी स्थानांतरित हो गया।
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60 से अधिक कर्मचारी कार्यरत
पीएमजीएसवाई मंडलीय दफ्तर में लगभग 60 कर्मचारी कार्यरत हैं। गोरखपुर में अधीक्षण अभियंता बैठते हैं। किसी एक्सीईएन की तैनाती नहीं होने के कारण संतकबीरनगर के एक्सीईएन कार्य देखते थे। एई और जेई तैनात हैं। अब सभी को अयोध्या जाना होगा।
अधीक्षण अभियंता पीएमजीएसवाई अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग के गोरखपुर कार्यालय में कोई काम नहीं था। शायद यही वजह है कि पीएमजीएसवाई के मंडलीय दफ्तर को अयोध्या शिफ्ट करने का आदेश शासन से कर दिया गया। इस कार्यालय में जो भी कर्मचारी हैं उन्हें अयोध्या जाना पड़ेगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़कों के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की शुरूआत की गई थी। इसके तहत लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की सड़कों को लेकर पीएमजीएसवाई के तहत निर्माण कराया जाता था। निर्माण कराने वाली फर्म को पांच साल तक रख रखाव की जिम्मेदारी दी जाती थी। इसके लिए बजट का प्रावधान होता था। एक समय ऐसा भी था जब पीएमजीएसवाई के पास बहुत काम था। इस कारण पीएमजीएसवाई के गोरखपुर में तीन मंडलीय कार्यालय खोलने पड़े थे।
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विधायकों के कहने पर आरईएस को दिए गए कार्य
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तह जितने भी कार्य जनपद में होने थे उन सभी कार्यों को विधायकों के कहने पर ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री ने ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (आरईएस) को दे दिया। जनपद के पांच से अधिक विधायकों ने लिखित सिफारिश की थी कि पीएमजीएसवाई के तहत होने वाले कार्यों को आरईएस से कराया जाए। इसके पीछे विधायकों की क्या मंशा थी यह तो वही जानें, लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि पीएमजीएसवाई का बचा एक मंडलीय कार्यालय भी स्थानांतरित हो गया।
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60 से अधिक कर्मचारी कार्यरत
पीएमजीएसवाई मंडलीय दफ्तर में लगभग 60 कर्मचारी कार्यरत हैं। गोरखपुर में अधीक्षण अभियंता बैठते हैं। किसी एक्सीईएन की तैनाती नहीं होने के कारण संतकबीरनगर के एक्सीईएन कार्य देखते थे। एई और जेई तैनात हैं। अब सभी को अयोध्या जाना होगा।
अधीक्षण अभियंता पीएमजीएसवाई अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग के गोरखपुर कार्यालय में कोई काम नहीं था। शायद यही वजह है कि पीएमजीएसवाई के मंडलीय दफ्तर को अयोध्या शिफ्ट करने का आदेश शासन से कर दिया गया। इस कार्यालय में जो भी कर्मचारी हैं उन्हें अयोध्या जाना पड़ेगा।