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Gorakhpur News: रामगढ़ताल में गिर रहा 17 मोहल्लों का गंदा पानी...सैर पर बदबू का ग्रहण
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रामगढ़ताल की सफाई करते लोग । संवाद
-लगाए गए दो एसटीपी की 50 एमएलडी तक पानी साफ करने की क्षमता, गिर रहा 50 एमएलडी पानी
-शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल पर गंदगी और बदबू से लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल रामगढ़ताल में गंदगी और बदबू बढ़ती जा रही है। अब लोग सुबह-शाम की सैर से भी परहेज करने लगे हैं। दरअसल, गोड़धोइया नाले के जरिये 17 मोहल्लों का गंदा पानी रामगढ़ताल में गिर रहा है। दो एसटीपी लगाए गए हैं लेकिन पानी की मात्रा इनकी क्षमता से ज्यादा होने के कारण शोधन नहीं हो पा रहा है। फिलहाल, सुधार के लिए जीडीए एक बहु-विभागीय टास्क कमेटी का गठन करने की तैयारी में है।
रामगढ़ताल की सतह पर काई बहुत ज्यादा बढ़ गई है जिससे पानी का रंग हरा नजर आ रहा है। उसमें ऑक्सीजन भी कम हो रही है जिसकी वजह से मछलियां मर रहीं हैं। पैडलेगंज और कुनराघाट के पास तो ताल के पानी का रंग काला पड़ गया है, सिर्फ नौका विहार की तरफ रामगढ़ताल का पानी कुछ साफ नजर आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नाइट्रेट और फॉस्फेट की अधिकता की वजह से ताल में एल्गल ब्लूम (शैवाल प्रस्फुटन) बढ़ गया है। आमतौर पर प्रदूषण की वजह से यह बढ़ता है। काई जमने की वजह से ताल में ऑक्सीजन घट रही है। रामगढ़ताल के पानी के शोधन के लिए चिड़ियाघर के पास 35 एमएलडी और कुनराघाट में 15 एलएलडी का एसटीपी लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, ताल में करीब 80 एमएलडी पानी गिर रहा है लेकिन साफ केवल 50 एमएलडी ही हो पा रहा है। इस वजह से इसमें तेजी से गंदगी बढ़ रही है।
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पानी का हरा दिखना ही चिंता का विषय
पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि रामगढ़ताल में ऑर्गेनिक पदार्थों की अधिकता हो गई है जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। ताल में काई भी ज्यादा बढ़ गई है। इस वजह से दिन में ऑक्सीजन मिल जाती है लेकिन रात में इसकी कमी हो जाती है। इससे मछलियां मर रहीं हैं क्योंकि उनको ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, समय-समय पर ताल के पानी की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। पानी का हरा दिखना ही चिंता का विषय है।
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ताल में किया गया छिड़काव
रामगढ़ताल में शनिवार को सहारा एस्टेट से मोहद्दीपुर स्मार्टव्हील एजेंसी की ओर जलकुंभी के बीच काफी संख्या में मृत पड़ी मछलियां दिख रहीं थीं। जीडीए की टीम ने इन मछलियों को निकालने के साथ पानी में रसायन का छिड़काव भी किया। सफाई पर सर्वाधिक जोर पैडलेगंज रिंग रोड से स्मार्टव्हील तक, पैड़लेगंज से नया सवेरा और चिड़ियाघर से सहारा एस्टेट गेट तक रहा। सहायक संपत्ति अधिकारी यशवंत सिंह ने बताया कि चूने और फिटकरी के मिश्रण का घोल बना कर छिड़काव कराया जा रहा है ताकि पानी में हरा शैवाल कट जाए। किसी रसायन का छिड़काव नहीं किया जा सकता क्योंकि मछलियों का बचाव भी करना है।
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गंदगी के कारण पयर्टकों ने मुंह मोड़ा
कुनराघाट के पास ताल का पानी काला नजर आने लगा है। वहां से पैडलेगंज रिंग रोड की तरफ बढ़ने पर काफी तेज बदबू आ रही है। इससे वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होती है। रामगढ़ताल शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां पर रोज सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं। रिंग रोड जब बनकर तैयार हुआ तो वहां बड़ी संख्या में लोग सैर-सपाटे के लिए पहुंचते थे और यह क्षेत्र गुलजार रहने लगा था। अब गंदगी की वजह से पर्यटकों ने मुंह मोड़ लिया है और नौका विहार पार्ट दो की तरफ जाने लगे हैं।
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रामगढ़ताल की सफाई और संरक्षण के लिए एक बहु-विभागीय टास्क कमेटी का गठन किया जाएगा। इसमें जीडीए के साथ जल निगम, नगर निगम समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहेंगे। यह कमेटी ताल से जुड़े सभी पहलुओं पर मंथन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए
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-शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल पर गंदगी और बदबू से लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल रामगढ़ताल में गंदगी और बदबू बढ़ती जा रही है। अब लोग सुबह-शाम की सैर से भी परहेज करने लगे हैं। दरअसल, गोड़धोइया नाले के जरिये 17 मोहल्लों का गंदा पानी रामगढ़ताल में गिर रहा है। दो एसटीपी लगाए गए हैं लेकिन पानी की मात्रा इनकी क्षमता से ज्यादा होने के कारण शोधन नहीं हो पा रहा है। फिलहाल, सुधार के लिए जीडीए एक बहु-विभागीय टास्क कमेटी का गठन करने की तैयारी में है।
रामगढ़ताल की सतह पर काई बहुत ज्यादा बढ़ गई है जिससे पानी का रंग हरा नजर आ रहा है। उसमें ऑक्सीजन भी कम हो रही है जिसकी वजह से मछलियां मर रहीं हैं। पैडलेगंज और कुनराघाट के पास तो ताल के पानी का रंग काला पड़ गया है, सिर्फ नौका विहार की तरफ रामगढ़ताल का पानी कुछ साफ नजर आता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि नाइट्रेट और फॉस्फेट की अधिकता की वजह से ताल में एल्गल ब्लूम (शैवाल प्रस्फुटन) बढ़ गया है। आमतौर पर प्रदूषण की वजह से यह बढ़ता है। काई जमने की वजह से ताल में ऑक्सीजन घट रही है। रामगढ़ताल के पानी के शोधन के लिए चिड़ियाघर के पास 35 एमएलडी और कुनराघाट में 15 एलएलडी का एसटीपी लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, ताल में करीब 80 एमएलडी पानी गिर रहा है लेकिन साफ केवल 50 एमएलडी ही हो पा रहा है। इस वजह से इसमें तेजी से गंदगी बढ़ रही है।
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पानी का हरा दिखना ही चिंता का विषय
पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि रामगढ़ताल में ऑर्गेनिक पदार्थों की अधिकता हो गई है जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। ताल में काई भी ज्यादा बढ़ गई है। इस वजह से दिन में ऑक्सीजन मिल जाती है लेकिन रात में इसकी कमी हो जाती है। इससे मछलियां मर रहीं हैं क्योंकि उनको ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, समय-समय पर ताल के पानी की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। पानी का हरा दिखना ही चिंता का विषय है।
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ताल में किया गया छिड़काव
रामगढ़ताल में शनिवार को सहारा एस्टेट से मोहद्दीपुर स्मार्टव्हील एजेंसी की ओर जलकुंभी के बीच काफी संख्या में मृत पड़ी मछलियां दिख रहीं थीं। जीडीए की टीम ने इन मछलियों को निकालने के साथ पानी में रसायन का छिड़काव भी किया। सफाई पर सर्वाधिक जोर पैडलेगंज रिंग रोड से स्मार्टव्हील तक, पैड़लेगंज से नया सवेरा और चिड़ियाघर से सहारा एस्टेट गेट तक रहा। सहायक संपत्ति अधिकारी यशवंत सिंह ने बताया कि चूने और फिटकरी के मिश्रण का घोल बना कर छिड़काव कराया जा रहा है ताकि पानी में हरा शैवाल कट जाए। किसी रसायन का छिड़काव नहीं किया जा सकता क्योंकि मछलियों का बचाव भी करना है।
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गंदगी के कारण पयर्टकों ने मुंह मोड़ा
कुनराघाट के पास ताल का पानी काला नजर आने लगा है। वहां से पैडलेगंज रिंग रोड की तरफ बढ़ने पर काफी तेज बदबू आ रही है। इससे वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होती है। रामगढ़ताल शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां पर रोज सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं। रिंग रोड जब बनकर तैयार हुआ तो वहां बड़ी संख्या में लोग सैर-सपाटे के लिए पहुंचते थे और यह क्षेत्र गुलजार रहने लगा था। अब गंदगी की वजह से पर्यटकों ने मुंह मोड़ लिया है और नौका विहार पार्ट दो की तरफ जाने लगे हैं।
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रामगढ़ताल की सफाई और संरक्षण के लिए एक बहु-विभागीय टास्क कमेटी का गठन किया जाएगा। इसमें जीडीए के साथ जल निगम, नगर निगम समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहेंगे। यह कमेटी ताल से जुड़े सभी पहलुओं पर मंथन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए