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Gorakhpur News: गोरखपुर से नेपाल तक शुरू होगी सीधी रेल सेवा.. बड़ी लाइन के लिए मिले 300 करोड़
Wed, 21 Aug 2024 05:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 21 Aug 2024 05:28 AM IST
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बहराइच-नानपारा-नेपालगंज छोटी लाइन को ब्रॉडगेज में किया जाएगा तब्दील
बड़ी लाइन बन जाने के बाद गोरखपुर से नेपालगंज तक सीधे जा सकेगी ट्रेन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नेपाल का बांके जिला अगले साल तक गोरखपुर से सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इसके लिए बहराइच से नानपारा होते हुए नेपालगंज तक पुराने रेलमार्ग का आमान परिवर्तन किया जा रहा है। बजट में ब्रॉडगेज के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। एक साल में कार्य पूरा होना है। उम्मीद है कि अगले साल इस ट्रैक पर गोरखपुर से नेपालगंज तक सीधी ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। इसके शुरू होने से पूर्वांचल से हजारों पर्यटक सीधे नेपाल के मधेस इलाके में आ-जा सकेंगे।
सुगौली संधि के जरिए भारत में शामिल किए गए इलाकों को रेल सेवा से जोड़ने के लिए 15 दिसंबर 1886 को गोंडा-बहराइच-नानपारा-नेपालगंज रोड मीटर गेज (छोटी लाइन) की ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। बाद में गोंंडा से बहराइच होते हुए सीतापुर के बीच बड़ी लाइन बन गई। वहीं, बहराइच से नानपारा होते हुए नेपालगंज तक 56 किलोमीटर लंबी मीटर गेज पर केवल लोकल पैसेंजर ट्रेनों का ही संचालन होता था।
इस इलाके में रेल नेटवर्क बेहतर होने पर नेपाल के बांके जिला (मधेस) तक लोगों का सीधा आवागमन होता। इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन का तेजी से विकास होता। ऐसा इसलिए कि बांके जिले से हिमालय की पहाड़ियों के अलावा प्राकृतिक वन्य क्षेत्रों में भी घूमने के पर्याप्त अवसर हैं। इसे देखते हुए बहराइच से नानपारा तक की रेल लाइन को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
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रेल मंत्रालय ने बहराइच से नेपालगंज रेलवे स्टेशन तक 56 किलोमीटर ट्रैक को बड़ी लाइन में परिवर्तित करने के लिए 327 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। बहराइच से नानपारा होते हुए नेपालगंज तक आमान परिवर्तन के लिए इस रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों का संचालन फरवरी में बंद करा दिया गया था। अब काम तेजी से कराया जा रहा है। मार्च तक काम पूरा होने की उम्मीद है। बड़ी लाइन होने के बाद नेपालगंज रेलवे स्टेशन से बहराइच होते हुए गोंडा और गोरखपुर तक ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।
बहराइच बन जाएगा प्रमुख जंक्शन
आने वाले वर्षों में बहराइच पूर्वोत्तर रेलवे का एक प्रमुख जंक्शन बन जाएगा। अभी इस रूट पर गोरखपुर से सीतापुर-बरेली होते हुए दिल्ली जाने वाली ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा बहराइच-खलीलाबाद वाया भिनगा-श्रावस्ती-बलरामपुर-उतरौला-डुमरियागंज-मेहदावल-बांसी रूट का निर्माण होना है। 240.26 किमी. लंबे इस नई रेल लाइन के लिए भी बजट में 450 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस नई लाइन के बनने से गोरखपुर-गोंडा लाइन का एक विकल्प तैयार हो जाएगा। इसके बाद बहराइच स्टेशन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। एक और नई लाइन आनंदनगर-घुघली वाया महाराजगंज (50 किमी.) भी प्रस्तावित है। इसके लिए 450 करोड़ रुपये आवंटित हो गए हैं। यह नई लाइन गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग को सीधे बढ़नी-बहराइच से जोड़ देगी। इसके बाद बहराइच से बढ़नी-घुघली के रास्ते कप्तानगंज होते हुए बिहार के लिए ट्रेन चलाने की सुविधा होगी।
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बड़ी लाइन बन जाने के बाद गोरखपुर से नेपालगंज तक सीधे जा सकेगी ट्रेन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नेपाल का बांके जिला अगले साल तक गोरखपुर से सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इसके लिए बहराइच से नानपारा होते हुए नेपालगंज तक पुराने रेलमार्ग का आमान परिवर्तन किया जा रहा है। बजट में ब्रॉडगेज के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। एक साल में कार्य पूरा होना है। उम्मीद है कि अगले साल इस ट्रैक पर गोरखपुर से नेपालगंज तक सीधी ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। इसके शुरू होने से पूर्वांचल से हजारों पर्यटक सीधे नेपाल के मधेस इलाके में आ-जा सकेंगे।
सुगौली संधि के जरिए भारत में शामिल किए गए इलाकों को रेल सेवा से जोड़ने के लिए 15 दिसंबर 1886 को गोंडा-बहराइच-नानपारा-नेपालगंज रोड मीटर गेज (छोटी लाइन) की ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। बाद में गोंंडा से बहराइच होते हुए सीतापुर के बीच बड़ी लाइन बन गई। वहीं, बहराइच से नानपारा होते हुए नेपालगंज तक 56 किलोमीटर लंबी मीटर गेज पर केवल लोकल पैसेंजर ट्रेनों का ही संचालन होता था।
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इस इलाके में रेल नेटवर्क बेहतर होने पर नेपाल के बांके जिला (मधेस) तक लोगों का सीधा आवागमन होता। इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन का तेजी से विकास होता। ऐसा इसलिए कि बांके जिले से हिमालय की पहाड़ियों के अलावा प्राकृतिक वन्य क्षेत्रों में भी घूमने के पर्याप्त अवसर हैं। इसे देखते हुए बहराइच से नानपारा तक की रेल लाइन को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
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रेल मंत्रालय ने बहराइच से नेपालगंज रेलवे स्टेशन तक 56 किलोमीटर ट्रैक को बड़ी लाइन में परिवर्तित करने के लिए 327 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। बहराइच से नानपारा होते हुए नेपालगंज तक आमान परिवर्तन के लिए इस रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों का संचालन फरवरी में बंद करा दिया गया था। अब काम तेजी से कराया जा रहा है। मार्च तक काम पूरा होने की उम्मीद है। बड़ी लाइन होने के बाद नेपालगंज रेलवे स्टेशन से बहराइच होते हुए गोंडा और गोरखपुर तक ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।
बहराइच बन जाएगा प्रमुख जंक्शन
आने वाले वर्षों में बहराइच पूर्वोत्तर रेलवे का एक प्रमुख जंक्शन बन जाएगा। अभी इस रूट पर गोरखपुर से सीतापुर-बरेली होते हुए दिल्ली जाने वाली ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा बहराइच-खलीलाबाद वाया भिनगा-श्रावस्ती-बलरामपुर-उतरौला-डुमरियागंज-मेहदावल-बांसी रूट का निर्माण होना है। 240.26 किमी. लंबे इस नई रेल लाइन के लिए भी बजट में 450 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस नई लाइन के बनने से गोरखपुर-गोंडा लाइन का एक विकल्प तैयार हो जाएगा। इसके बाद बहराइच स्टेशन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। एक और नई लाइन आनंदनगर-घुघली वाया महाराजगंज (50 किमी.) भी प्रस्तावित है। इसके लिए 450 करोड़ रुपये आवंटित हो गए हैं। यह नई लाइन गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग को सीधे बढ़नी-बहराइच से जोड़ देगी। इसके बाद बहराइच से बढ़नी-घुघली के रास्ते कप्तानगंज होते हुए बिहार के लिए ट्रेन चलाने की सुविधा होगी।