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यादगार पल: यूपीएससी में 190वीं रैंक पाकर खुशी से झूम उठे डीएफओ अविनाश, बोले- सफर के बीच ही पता चला कि अब आईपीएस हो गया हूं
Sat, 25 Sep 2021 02:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 02:02 PM IST
सार
अविनाश कुमार पिछले दो साल से गोरखपुर में डीएफओ के पद पर कार्यरत हैं। अविनाश को तीसरे प्रयास में सफलता मिली है।
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डीएफओ अविनाश कुमार।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अविनाश कुमार का प्रयागराज से गोरखपुर का सफर शुक्रवार को यादगार पल के रूप में दर्ज हो गया। सफर के बीच मोबाइलफोन की बजी घंटी ने उन्हें ऐसी खुशी दे दी, जिसे ताउम्र भूल नहीं पाएंगे। उन्हें बताया गया कि उनका चयन आईपीएस (इंडियन पुलिस सर्विस) के लिए हो गया है। अविनाश कुमार पिछले दो साल से गोरखपुर में डीएफओ के पद पर कार्यरत हैं। अविनाश को तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। वह आईआईटी रुड़की से जूलोजिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके हैं।
अविनाश कुमार मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले स्थित गोह गांव के निवासी हैं। प्रारंभिक शिक्षा गांव में करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर चले आए। इस बीच उन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू की। लेकिन उनका चयन वन विभाग में बतौर डीएफओ के पद पर हो गया। इन सबके बीच उन्होंने हार नहीं मानी। नौकरी के साथ-साथ आईएएस की तैयारी में जुटे रहे।
अविनाश ने बताया कि दिनभर ऑफिस का काम करने के बाद घर जाकर तैयारी करता था। पढ़ाई के वक्त पत्नी डॉ आकांक्षा का पूरा साथ मिला जिससे कभी व्यवधान नहीं आए। परिवार में दो बड़े भाई हैं। दोनों अभियंता के पद पर तैनात हैं। पिता मोहन सिंह लोक निर्माण विभाग में अवर अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि मां माधुरी सिंह गृहिणी हैं।
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परिवार का सपना था आईएएस या आईपीएस बनना
अविनाश बताते हैं कि परिवार के लोगों ने एक सपना संजोया था कि बेटा एक न एक दिन आईएएस या आईपीएस जरूर बनेगा। आज यह हकीकत में बदल गया है। हर कदम पर परिजनों का पूरा सहयोग रहा। स्थिति ऐसी हो गई थी कि डीएफओ की नौकरी और पढ़ाई के बीच पिछले कुछ सालों से पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो सका। लेकिन इसके बाद भी परिवार के लोगों ने कभी कोई सवाल नहीं किया।
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अविनाश कुमार मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले स्थित गोह गांव के निवासी हैं। प्रारंभिक शिक्षा गांव में करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर चले आए। इस बीच उन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू की। लेकिन उनका चयन वन विभाग में बतौर डीएफओ के पद पर हो गया। इन सबके बीच उन्होंने हार नहीं मानी। नौकरी के साथ-साथ आईएएस की तैयारी में जुटे रहे।
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अविनाश ने बताया कि दिनभर ऑफिस का काम करने के बाद घर जाकर तैयारी करता था। पढ़ाई के वक्त पत्नी डॉ आकांक्षा का पूरा साथ मिला जिससे कभी व्यवधान नहीं आए। परिवार में दो बड़े भाई हैं। दोनों अभियंता के पद पर तैनात हैं। पिता मोहन सिंह लोक निर्माण विभाग में अवर अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि मां माधुरी सिंह गृहिणी हैं।
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परिवार का सपना था आईएएस या आईपीएस बनना
अविनाश बताते हैं कि परिवार के लोगों ने एक सपना संजोया था कि बेटा एक न एक दिन आईएएस या आईपीएस जरूर बनेगा। आज यह हकीकत में बदल गया है। हर कदम पर परिजनों का पूरा सहयोग रहा। स्थिति ऐसी हो गई थी कि डीएफओ की नौकरी और पढ़ाई के बीच पिछले कुछ सालों से पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो सका। लेकिन इसके बाद भी परिवार के लोगों ने कभी कोई सवाल नहीं किया।
परीक्षा के बारे में किसी को नहीं दी थी जानकारी
अविनाश बताते हैं कि परीक्षा के बारे में किसी को भी जानकारी नहीं दी थी। केवल पत्नी को बताया था। बुधवार सुबह विभागीय काम से प्रयागराज हाईकोर्ट आया था। शुक्रवार को वापस रास्ते में बताया गया कि यूपीएससी का परिणाम आ गया है और मेरा चयन हो गया है। मेरी 190वीं रैंक है।
कर्मियों का हर वक्त देते हैं साथ
कोविड महामारी के बीच एक अभिभावक की भूमिका में अविनाश कुमार डटे रहे। महामारी के दौरान जिन कर्मियों की मौत हो गई उनकी याद में विनोद वन में स्मृति वाटिका भी बनवाई। कहते हैं कि सभी कर्मचारी वन विभाग के परिवार के सदस्य हैं। अब वह हमारे बीच में नहीं लेकिन उनकी यादें सदैव हमारे दिल में बनी रहेंगी।
कर्मियों का हर वक्त देते हैं साथ
कोविड महामारी के बीच एक अभिभावक की भूमिका में अविनाश कुमार डटे रहे। महामारी के दौरान जिन कर्मियों की मौत हो गई उनकी याद में विनोद वन में स्मृति वाटिका भी बनवाई। कहते हैं कि सभी कर्मचारी वन विभाग के परिवार के सदस्य हैं। अब वह हमारे बीच में नहीं लेकिन उनकी यादें सदैव हमारे दिल में बनी रहेंगी।