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Gorakhpur: नई महायोजना से तेज होगा विकास, ले-आउट स्वीकृत कराकर बेच सकेंगे प्लाट

Wed, 24 Aug 2022 04:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 24 Aug 2022 04:15 PM IST
सार

जीडीए प्रेम रंजन सिंह उपाध्यक्ष ने कहा कि महायोजना 2031 के मद्देनजर जीडीए के विस्तारित क्षेत्र में कॉलोनी विकसित करने के नाम पर जमीन बेचने वालों को नोटिस देकर निर्माण पर रोक लगाई गई थी। महायोजना लागू होने के बाद ये सभी लोग ले-आउट स्वीकृत कराने के बाद प्लाटिंग कर जमीन की बिक्री कर सकेंगे। बिना ले-आउट और मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण कराने वालों पर सख्ती भी होगी।

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Development will be faster with new master plan plot will be sold after getting layout approved
गोरखपुर विकास प्राधिकरण। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की नई महायोजना 2031 के वजूद में आने से शहर एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में सुनियोजित विकास को गति मिलेगी, प्राधिकरण की आय भी बढ़ेगी। शहर से सटे क्षेत्रों में प्लाटिंग कर रहे 150 कारोबारियों को तो तत्काल लाभ मिल सकेगा। वे ले-आउट स्वीकृत कराकर न केवल जमीन की बिक्री कर सकेंगे बल्कि निर्माण कार्य भी करा सकेंगे।

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जीडीए का सीमा विस्तार के बाद अब प्राधिकरण क्षेत्र में शहर के चारों तरफ के 319 राजस्व गांव शामिल हो गए हैं। मुंडेरा बाजार (चौरीचौरा), पिपराइच एवं पीपीगंज नगर पंचायतों के क्षेत्र भी प्राधिकरण की सीमा में आ गए हैं।
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नई महायोजना में इन सभी क्षेत्रों के विकास का भी खाका खींचा गया है। सीमा विस्तार होने से पहले शहर से सटे आसपास के क्षेत्रों में जमीन कारोबारियों द्वारा धड़ल्ले से प्लाटिंग कर जमीन बेची जा रही थी। मगर सीमा विस्तार होने के बाद जीडीए ने नई महायोजना का हवाला देते हुए ऐसे करीब 150 जमीन कारोबारियों को नोटिस देकर निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया।
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 जीडीए की कार्रवाई के बाद इन कारोबारियों द्वारा विकासित की जा रही छोटी-बड़ी कॉलोनियों में जमीन की बिक्री का काम भी धीमा पड़ गया। मगर महायोजना के लागू होते ही ये सभी कारोबारी प्राधिकरण से ले-आउट स्वीकृत कराकर अपनी कॉलोनियों का काम आगे बढ़ा सकेंगे। यानी जमीन की बिक्री व निर्माण आदि का काम कर सकेंगे। इससे जीडीए को भी मोटी आय होगी और जमीन खरीदने वाले भी अवैध कॉलोनी के दाग से न केवल बचे रहेंगे बल्कि उन्हें जरूरी सुविधाएं मसलन सड़क, बिजली, पानी सुनिश्चित हो सकेगा।

नहीं टिकेंगे जमीन के बिचौलिए, पूंजी वाले ही काम कर सकेंगे

शहर के भीतर खाली जमीन अब बहुत कम बची होने से शहर से सटे चारों तरफ मसलन गोरखपुर-वाराणसी रोड, लखनऊ, देवरिया और सोनौली आदि मार्ग के आसपास के इलाकों में ही तेजी से जमीन की बिक्री हो रही है। पहले ये क्षेत्र जीडीए की सीमा में नहीं होने की वजह से ले-आउट स्वीकृति और रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में पंजीकरण के बिना धड़ल्ले से जमीन की प्लाटिंग हो रही थी। इससे अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैल रहा था।

खुद जीडीए की तरफ से दो साल पहले किए गए सर्वे में ऐसी कॉलोनियों की संख्या 170 पाई गई थीं। मगर अब सीमा विस्तार होने और इसमें शामिल क्षेत्रों के विकास का प्रारूप भी नई महायोजना में तैयार किए जाने के बाद नियमों की अनदेखी कर जमीन का कारोबार कर पाना मुमकिन नहीं होगा। बिना ले-आउट स्वीकृत कराए कॉलोनी बसाकर जमीन बेचने वालों पर शिकंजा कसेगा।

ले-आउट स्वीकृत कराने पर जमीन के पूरे क्षेत्रफल में से करीब 40 फीसदी क्षेत्रफल  सड़क, बिजली, पानी आदि के लिए खाली छोड़ना पड़ेगा। ऐसे में काश्तकारों से जमीन का अनुबंध कराकर बिक्री करने वाले बिचौलियों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी तो वहीं अपनी पूंजी लगाकर जमीन का व्यावसाय करने वालों को इस क्षेत्र में और विस्तार मिलेगा।   


 

नई महायोजना को आज जीडीए बोर्ड से मिल सकती है स्वीकृति

महायोजना 2031 का इंतजार जल्द खत्म हो जाने की उम्मीद है। इसका प्रारूप तैयार हो गया है। 24 अगस्त को आयोजित होने वाली जीडीए बोर्ड की बैठक में इसे रखा जाएगा। बैठक में महायोजना के प्रारूप को स्वीकृति मिलने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद इसे सार्वजनिक कर आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। लोगों की ओर से आने वाली आपत्तियों एवं सुझाव पर निर्णय के लिए जीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा।

इसके बाद शासन से इस महायोजना को अंतिम रूप से लागू कर दिया जाएगा। नई महायोजना में शहर के करीब 1700 एकड़ क्षेत्रफल को विनियमितीकरण के पेंच से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। विनियमितीकरण से मुक्त होने के बाद 50 से अधिक कॉलोनियों को नियमित किया जा सकेगा और लोग अपना मानचित्र भी पास करा सकेंगे।

जीडीए प्रेम रंजन सिंह उपाध्यक्ष ने कहा कि महायोजना 2031 के मद्देनजर जीडीए के विस्तारित क्षेत्र में कॉलोनी विकसित करने के नाम पर जमीन बेचने वालों को नोटिस देकर निर्माण पर रोक लगाई गई थी। महायोजना लागू होने के बाद ये सभी लोग ले-आउट स्वीकृत कराने के बाद प्लाटिंग कर जमीन की बिक्री कर सकेंगे। बिना ले-आउट और मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण कराने वालों पर सख्ती भी होगी। 24 अगस्त को आयोजित जीडीए बोर्ड बैठक में नई महायोजना का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद आपत्तियों एवं सुझाव के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा।

 
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