{"_id":"610297a28ebc3e582d37ad57","slug":"despite-demarcation-being-done-ten-years-ago-occupiers-not-vacating-land","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी-बिहार सीमांकन मामला: नहीं सुलझा विवाद तो हो सकता है खूनी संघर्ष, जमीन से जुड़ा है मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी-बिहार सीमांकन मामला: नहीं सुलझा विवाद तो हो सकता है खूनी संघर्ष, जमीन से जुड़ा है मामला
Thu, 29 Jul 2021 05:33 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 29 Jul 2021 05:33 PM IST
सार
खड्डा क्षेत्र के ग्राम पंचायत भैसहां के राजस्व ग्राम बालगोविंद छपरा के किसानों की जमीन पर है कब्जा, दस साल पहले सीमांकन कराने के बावजूद कब्जेधारी जमीन नहीं कर रहे खाली।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कुशीनगर जिले के खड्डा क्षेत्र और बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले की सीमा पर खूनी संघर्ष के आसार बने हुए हैं। दस वर्ष पहले दोनों जनपदों के डीएम के संयुक्त निर्देशानुसार 17 किलोमीटर लंबी सीमा पर सीमांकन कराकर पिलर लगाए जाने के बावजूद कब्जा नहीं हटा है। बिहार के कुछ प्रभावशाली व्यक्ति भैसहां ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम बालगोविंद छपरा के लोगों की लगभग एक हजार एकड़ जमीन कब्जा जमाए हुए हैं। बीते मार्च में विवाद होने से चार लोग घायल भी हो गए थे।
विज्ञापन
खड्डा तहसील और बिहार के पश्चिमी चंपारण के बगहां अनुमंडल की लगभग 17 किलोमीटर लंबी सीमा के कुछ हिस्से पर विवाद की आशंका बनी हुई है। खड्डा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भैसहा के राजस्व गांव बालगोविंद छपरा की लगभग एक हजार एकड़ जमीन पर बिहार के कुछ प्रभावशाली लोग काबिज हैं।
विज्ञापन
पिछले वर्ष अक्तूबर में एसडीएम खड्डा ने बालगोविंद छपरा में पहुंचकर कोर्ट लगाते हुए जमीन व फसल जब्त कर लिया था और रिसीवर नियुक्त कर उसे सुपुर्द किया था। इसके बावजूद बिहार के लोगों ने जबरदस्ती फसल काट लिया और कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
इसकी जानकारी होने पर डीएम एस. राजलिंगम और तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर बिहार के लोगों को तुरंत इस जमीन से कब्जा छोड़ने को कहा था, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इस मामले को पश्चिमी चंपारण के डीएम व बगहां एसडीएम के संज्ञान में भी लाया जा चुका है, लेकिन भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर बिहार के लोग जमीन से कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं, न कानून का सम्मान कर रहे हैं। जानकार बताते हैँ कि इसे लेकर दोनों तरफ के किसानों में खूनी संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है।
खड्डा के तहसीलदार गोपाल कृष्ण तिवारी का कहना है कि विवाद की आशंका को देखते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इस बारे में दोनों जनपदों के अधिकारियों से समंवय बनाकर समस्या सुलझाने के लिए अनुरोध किया गया है।
विवादित क्षेत्र से होकर ही आते-जाते हैं ग्रामीण
गंडक नदी पार के दियारा में स्थित मरचहवा, बसंतपुर, वालगोविंद छपरा, विंध्याचलपुर, शाहपुर आदि गांवों तक जाने के लिए विवादित जमीन से होकर लोगों को जाना-आना पड़ता है। या फिर नदी के रास्ते नाव से जाना पड़ता है। दूसरे ओर जमीन पर कब्जा करने वाले लोग बिना किसी रूकावट के पहुंचकर फसल काट ले जाते हैं। मार्च में विंध्याचलपुर गांव में किसान जमीन की पैमाइश कर रहे थे। राजस्व कर्मचारी भी थे, तभी अचानक बिहार के लोगों ने हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया था।
सीमा का हो चुका है स्थाई निर्धारण, फिर भी नहीं होता पालन
नदी की कटान के कारण सीमा की स्थिति बदलने और टकराहट रोकने के लिए वर्ष 2011 में कुशीनगर व पश्चिमी चंपारण के तत्कालीन डीएम ने संयुक्त बैठक कर सीमा के स्थाई समाधान के लिए पैमाइश व पिलर लगाने की सहमति व्यक्त की थी। इसके बाद बगहां व पडरौना के तत्कालीन एसडीएम के नेतृत्व में गठित राजस्व टीम ने 6 जून 2011 से पंद्रह दिनों तक बिहार के अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराए गए 1914-15 के मानचित्र के आधार पर 17.25 किलोमीटर सीमा का निर्धारण कर दिया था। इसमें तीसरे पक्ष के रूप में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी शामिल थे। कुशीनगर जिला प्रशासन ने वर्ष 2013 में सीमा पर पिलर लगवा दिया। दोनों तरफ के प्रशासन ने यह एलान कर दिया की एक दूसरे की सीमा में खेती करने वाले किसान अपने अपने सीमा में चले जाएं। खड्डा तहसील क्षेत्र के लोगों ने तो कब्जा छोड़ दिया, लेकिन विहार के लोग अब भी काबिज हैं।
सीमा का हो चुका है स्थाई निर्धारण, फिर भी नहीं होता पालन
नदी की कटान के कारण सीमा की स्थिति बदलने और टकराहट रोकने के लिए वर्ष 2011 में कुशीनगर व पश्चिमी चंपारण के तत्कालीन डीएम ने संयुक्त बैठक कर सीमा के स्थाई समाधान के लिए पैमाइश व पिलर लगाने की सहमति व्यक्त की थी। इसके बाद बगहां व पडरौना के तत्कालीन एसडीएम के नेतृत्व में गठित राजस्व टीम ने 6 जून 2011 से पंद्रह दिनों तक बिहार के अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराए गए 1914-15 के मानचित्र के आधार पर 17.25 किलोमीटर सीमा का निर्धारण कर दिया था। इसमें तीसरे पक्ष के रूप में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी शामिल थे। कुशीनगर जिला प्रशासन ने वर्ष 2013 में सीमा पर पिलर लगवा दिया। दोनों तरफ के प्रशासन ने यह एलान कर दिया की एक दूसरे की सीमा में खेती करने वाले किसान अपने अपने सीमा में चले जाएं। खड्डा तहसील क्षेत्र के लोगों ने तो कब्जा छोड़ दिया, लेकिन विहार के लोग अब भी काबिज हैं।