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Gorakhpur News: प्रकाश के दिए तमंचे से शूटर ने की थी मधुमिता की हत्या

Sat, 14 Sep 2024 04:26 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2024 04:26 AM IST
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Deoria News: Shooter had murdered Madhumita with the pistol given by Prakash.
गोरखपुर। मधुमिता हत्याकांड में प्रकाश पांडेय (48) पर शूटर को तमंचा देने का आरोप लगा था। उसी तमंचे से गोली मारकर मधुमिता की हत्या की गई थी। यह आरोप सिद्ध होने पर हाईकोर्ट ने प्रकाश पांडेय को भी दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी, लेकिन वह केवल पांच साल तक जेल में रहा, जबकि बाकी आरोपियों में अमरमणि और मधुमणि 19 साल जेल में रहकर छूटे। वहीं मेन शूटर संतोष राय और रोहित चतुर्वेदी अभी भी सजा काट रहे हैं। कोर्ट में केस की पैरवी के लिए दौड़ भाग के तनाव के बीच प्रकाश कैंसर से पूरी तरह टूट गया।
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जानकारी के अनुसार, नौ मई 2003 को लखीमपुर खीरी की उभरती कवयित्री मधुमिता शुक्ला की लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी स्थित उनके घर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस समय मधुमिता सात महीने की गर्भवती थी। जांच में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि का नाम आया।
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पुलिस की जांच में पता चला कि अमरमणि त्रिपाठी और मधुमिता के बीच लंबे समय से संबंध थे। इसको लेकर मधुमिता की हत्या की साजिश रची गई। हत्या को अंजाम देने के लिए संतोष राय, रोहित चतुर्वेदी और प्रकाश पांडेय को मारने की सुपारी दी गई। लखनऊ के पॉश इलाके में दिनदहाड़े हुई इस निर्मम हत्या राज्य में सनसनी मच गई। हाई प्रोफाइल मामले में सीबीआई ने जांच कर आरोपियों को सजा दिलवाई।
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स्कूल कॉलेज में मारपीट करता था प्रकाश
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2003 में मधुमिता हत्याकांड में नाम आने के बाद वह रातों रात पूरे प्रदेश में एक बड़े शूटर के रूप में चर्चित हो गया। यह पहला बड़ा अपराध उसकी जीवन का आखिरी अपराध बन गया। इस वारदात से उसके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। कभी जेल कभी बाहर आने के तनाव ने उसे बीमार बना दिया था। वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। नशे की बुरी लत की वजह से वह मुख के कैंसर का रोगी हो गया। घरवालों ने काफी प्रयास किया, लेकिन वह ठीक नहीं हो पाया।


दाह संस्कार में उमड़ी भीड़
कैंसर बीमार से ग्रसित होने के बाद वह लगातार लखनऊ ही रह रहा था। बृहस्पतिवार को उसकी मौत के बाद जब शव चरगांवा स्थित उसके आवास पर लाया गया, तब उसे देखने के लिए दोस्तों रिश्तेदारों की भीड़ जुट गई। राजघाट में उसके दाह संस्कार के समय वहां गाड़ियों की लंबी कतार लग गई और देर रात तक लोग वहां जमे रहे।

एक नजर में घटनाक्रम-
09 मई 2003: मधुमिता की लखनऊ स्थित पेपर मिल कॉलोनी में गोली मारकर हत्या की गई।
10 मई 2003: निधि शुक्ला ने अमरमणि और मधुमणि पर बहन मधुमिता की हत्या का आरोप लगाया।
09 फरवरी 2007: सुप्रीम कोर्ट ने केस देहरादून स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर किया।
24 अप्रैल 2007: कोर्ट ने अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि त्रिपाठी, रोहित चतुर्वेदी, संतोष राय का उम्र कैद की सजा सुनाई। प्रकाश पांडेय को बरी कर दिया।
जुलाई 2012: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारों आरोपियों की सजा बरकरार रखी, शूटर प्रकाश पांडेय को भी उम्रकैद की सजा सुनाई।
2013: प्रकाश पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की और उसे जमानत मिल गई।
24 अगस्त 2023: अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि की सजा माफ कर रिहा कर दिया गया।

कांता हुड्डा गले से सरिया मोड़ते हुए।  फाइल फोटो 

कांता हुड्डा गले से सरिया मोड़ते हुए।  फाइल फोटो 

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