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एम्स: डीडीए ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी प्रारंभिक रिपोर्ट
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गोरखपुर। एम्स के कार्यकारी निदेशक पर लगे आरोपाें की प्रारंभिक जांच कर डीडीए ने स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच होगी या नहीं, इसका निर्णय होना है। वहीं इस मामले में कार्यकारी निदेशक ने भी बिंदुवार अपना पक्ष स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा है। शुक्रवार को कार्यकारी निदेशक, प्रेसिडेंट और डीडीए तीनों ही दिल्ली में थे। कार्यकारी निदेशक के रविवार रात तक गोरखपुर आने की उम्मीद है।
एम्स के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग में पीजी की रिक्त सीट पर एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पॉल के पुत्र औरव पॉल ने दाखिला लिया था। 31 अगस्त को नामांकन हुआ और तीन सितंबर को औरव पॉल ने व्यक्तिगत कारणाें से रिजाइन कर दिया। अगले दिन जनरल सर्जरी विभाग के एचओडी व एडिशनल प्रोफेसर डॉ. गौरव गुप्ता ने कार्यकारी निदेशक पर बेटे का दाखिला आठ लाख से कम आय वाले ओबीसी कैटेगरी के आवेदक के लिए आरक्षित सीट पर गलत ओबीसी सर्टिफिकेट के आधार पर करा लेने का आरोप लगाया। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
डॉ. गौरव गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। इसके अलावा एम्स थाने को भी ऑनलाइन शिकायत भेजी। प्रकरण चर्चा में आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में एम्स के डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन से जानकारी मांगी। डीडीए ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी है। उधर, कार्यकारी निदेशक ने भी डॉ. गौरव गुप्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों पर बिंदुवार अपना पक्ष रखा है। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि उन्होंने बेटे का जाति सर्टिफिकेट 43 लाख रुपये वार्षिक आय के आधार पर बनवाया है।
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वर्जन-
कार्यकारी निदेशक और डॉ. गौरव के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो रिपोर्ट डीडीए से मांगी थी, वह भेजी जा चुकी है। इस प्रकरण में अब आगे जो भी कार्रवाई होगी, उसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ही मिल सकेगी।
देश दीपक वर्मा, प्रेसिडेंट, एम्स
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एम्स के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग में पीजी की रिक्त सीट पर एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पॉल के पुत्र औरव पॉल ने दाखिला लिया था। 31 अगस्त को नामांकन हुआ और तीन सितंबर को औरव पॉल ने व्यक्तिगत कारणाें से रिजाइन कर दिया। अगले दिन जनरल सर्जरी विभाग के एचओडी व एडिशनल प्रोफेसर डॉ. गौरव गुप्ता ने कार्यकारी निदेशक पर बेटे का दाखिला आठ लाख से कम आय वाले ओबीसी कैटेगरी के आवेदक के लिए आरक्षित सीट पर गलत ओबीसी सर्टिफिकेट के आधार पर करा लेने का आरोप लगाया। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
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डॉ. गौरव गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। इसके अलावा एम्स थाने को भी ऑनलाइन शिकायत भेजी। प्रकरण चर्चा में आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में एम्स के डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन से जानकारी मांगी। डीडीए ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी है। उधर, कार्यकारी निदेशक ने भी डॉ. गौरव गुप्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों पर बिंदुवार अपना पक्ष रखा है। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि उन्होंने बेटे का जाति सर्टिफिकेट 43 लाख रुपये वार्षिक आय के आधार पर बनवाया है।
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कार्यकारी निदेशक और डॉ. गौरव के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो रिपोर्ट डीडीए से मांगी थी, वह भेजी जा चुकी है। इस प्रकरण में अब आगे जो भी कार्रवाई होगी, उसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ही मिल सकेगी।
देश दीपक वर्मा, प्रेसिडेंट, एम्स